11 अगस्त 2026
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कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में किडनी फेल — गहलोत ने भजनलाल को पत्र लिख मांगी जवाबदेही

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कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में किडनी फेल — गहलोत ने भजनलाल को पत्र लिख मांगी जवाबदेही

सारांश

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 मई के बाद पाँच प्रसूताओं की मौत और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में किडनी फेल होने के मामलों ने राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है। गहलोत ने इसे 'संस्थागत विफलता' बताते हुए CM भजनलाल से जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 मई के बाद से प्रसव के बाद पाँच महिलाओं की मौत हो चुकी है।
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद कई महिलाओं की किडनी फेल हुई, जिन्हें नियमित डायलिसिस की ज़रूरत है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 17 जून को कोटा का दौरा किया और 19 जून को CM भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा।
जाँच में खराब साफ-सफाई , ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण का खतरा और क्रिटिकल-केयर सुविधाओं की कमी उजागर हुई।
गहलोत ने एम्स व राज्य एजेंसियों की जाँच रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करने, दोषियों पर आपराधिक मुकदमा और प्रभावित महिलाओं के आजीवन इलाज की सरकारी गारंटी की माँग की।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 19 जून 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 मई के बाद से प्रसव के बाद पाँच महिलाओं की मौत और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में कई प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामलों पर उच्चतम स्तर पर जवाबदेही तय करने की माँग की है। गहलोत ने इन घटनाओं को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की 'संस्थागत विफलता' करार दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

पत्र के अनुसार, कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 मई के बाद से प्रसव के बाद पाँच महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य महिलाएँ किडनी खराब होने की समस्या से जूझ रही हैं और उन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता है। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी प्रसव के बाद कई महिलाओं की किडनी फेल होने की खबरें सामने आई हैं।

गहलोत ने बताया कि उन्होंने 17 जून को व्यक्तिगत रूप से कोटा का दौरा किया और प्रभावित महिलाओं एवं उनके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल में देखी गई स्थितियों को 'दिल दहला देने वाला' बताया।

जाँच में सामने आई कमियाँ

गहलोत के अनुसार, जाँच के प्रारंभिक नतीजों में गंभीर खामियाँ उजागर हुई हैं — जिनमें खराब साफ-सफाई, ऑपरेशन थिएटर के पास संक्रमण का खतरा और क्रिटिकल-केयर सुविधाओं की कमी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने दवाओं की गुणवत्ता, ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण-नियंत्रण व्यवस्था और राज्य की समग्र स्वास्थ्य प्रणाली के कामकाज पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

गहलोत की माँगें

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से निम्नलिखित कदम उठाने की माँग की है:

एम्स और राज्य एजेंसियों द्वारा तैयार की गई जाँच रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक किया जाए। जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज कर उन्हें निलंबित किया जाए। प्रभावित महिलाओं के जीवन भर के इलाज की सरकारी गारंटी दी जाए और प्रभावित परिवारों को न्याय सुनिश्चित किया जाए।

गहलोत ने कहा कि पारदर्शिता इसलिए भी आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि समस्या की जड़ दवाएँ थीं, इलाज के तरीके थे, मरीज की देखभाल में चूक थी या संक्रमण-रोकथाम उपायों की विफलता — और भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराने से रोका जा सके।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अस्पतालों पर निर्भर गरीब तबके की महिलाएँ ही इन घटनाओं की सबसे बड़ी पीड़ित हैं। गहलोत ने रेखांकित किया कि जो महिलाएँ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा करके इन अस्पतालों में आईं, उन्हें कथित लापरवाही और प्रणालीगत खामियों की भारी कीमत चुकानी पड़ी।

क्या होगा आगे

अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं — विशेष रूप से एम्स और राज्य एजेंसियों की जाँच रिपोर्ट के सार्वजनिक होने और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई पर। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूता देखभाल की गुणवत्ता एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संरचनात्मक सुधार की रफ्तार धीमी रही है। गहलोत का पत्र राजनीतिक रूप से प्रासंगिक है, पर यह भी याद रखना ज़रूरी है कि पीबीएम और न्यू मेडिकल कॉलेज जैसे अस्पतालों की बुनियादी खामियाँ पिछली सरकारों के कार्यकाल में भी बनी रहीं। असली सवाल यह है कि एम्स और राज्य एजेंसियों की जाँच रिपोर्ट — जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुई — में क्या है, और क्या दोषियों पर कार्रवाई महज निलंबन तक सीमित रहेगी या प्रणालीगत बदलाव भी होगा। जब तक जाँच परिणाम सार्वजनिक नहीं होते और प्रभावित परिवारों को ठोस राहत नहीं मिलती, यह मामला केवल राजनीतिक पत्राचार बनकर न रह जाए — यही सबसे बड़ी चिंता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटा अस्पताल में प्रसव के बाद कितनी महिलाओं की मौत हुई?
गहलोत के पत्र के अनुसार, कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 मई 2026 के बाद से प्रसव के बाद पाँच महिलाओं की मौत हो चुकी है। कई अन्य महिलाएँ किडनी फेल होने की समस्या से जूझ रही हैं और उन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता है।
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में क्या हुआ?
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद कई महिलाओं की किडनी फेल होने की खबरें सामने आई हैं। जाँच के प्रारंभिक नतीजों में खराब साफ-सफाई, ऑपरेशन थिएटर के पास संक्रमण का खतरा और क्रिटिकल-केयर सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर खामियाँ उजागर हुई हैं।
अशोक गहलोत ने CM भजनलाल से क्या माँगें की हैं?
गहलोत ने एम्स और राज्य एजेंसियों की जाँच रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करने, जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज कर उन्हें निलंबित करने और प्रभावित महिलाओं के जीवन भर के इलाज की सरकारी गारंटी देने की माँग की है।
क्या इन मामलों की जाँच हो रही है?
हाँ, एम्स और राज्य एजेंसियों द्वारा जाँच की जा रही है, लेकिन गहलोत के अनुसार रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने पारदर्शिता की माँग करते हुए कहा कि यह जानना ज़रूरी है कि समस्या की वजह दवाएँ थीं, इलाज के तरीके थे या संक्रमण-रोकथाम उपायों की विफलता।
गहलोत ने कोटा का दौरा कब किया?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 17 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोटा का दौरा किया और प्रभावित महिलाओं एवं उनके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल में देखी गई स्थितियों को 'दिल दहला देने वाला' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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