कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में किडनी फेल — गहलोत ने भजनलाल को पत्र लिख मांगी जवाबदेही
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 19 जून 2026 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 मई के बाद से प्रसव के बाद पाँच महिलाओं की मौत और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में कई प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामलों पर उच्चतम स्तर पर जवाबदेही तय करने की माँग की है। गहलोत ने इन घटनाओं को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की 'संस्थागत विफलता' करार दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
पत्र के अनुसार, कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 4 मई के बाद से प्रसव के बाद पाँच महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य महिलाएँ किडनी खराब होने की समस्या से जूझ रही हैं और उन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता है। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी प्रसव के बाद कई महिलाओं की किडनी फेल होने की खबरें सामने आई हैं।
गहलोत ने बताया कि उन्होंने 17 जून को व्यक्तिगत रूप से कोटा का दौरा किया और प्रभावित महिलाओं एवं उनके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल में देखी गई स्थितियों को 'दिल दहला देने वाला' बताया।
जाँच में सामने आई कमियाँ
गहलोत के अनुसार, जाँच के प्रारंभिक नतीजों में गंभीर खामियाँ उजागर हुई हैं — जिनमें खराब साफ-सफाई, ऑपरेशन थिएटर के पास संक्रमण का खतरा और क्रिटिकल-केयर सुविधाओं की कमी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने दवाओं की गुणवत्ता, ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण-नियंत्रण व्यवस्था और राज्य की समग्र स्वास्थ्य प्रणाली के कामकाज पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
गहलोत की माँगें
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से निम्नलिखित कदम उठाने की माँग की है:
एम्स और राज्य एजेंसियों द्वारा तैयार की गई जाँच रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक किया जाए। जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज कर उन्हें निलंबित किया जाए। प्रभावित महिलाओं के जीवन भर के इलाज की सरकारी गारंटी दी जाए और प्रभावित परिवारों को न्याय सुनिश्चित किया जाए।
गहलोत ने कहा कि पारदर्शिता इसलिए भी आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि समस्या की जड़ दवाएँ थीं, इलाज के तरीके थे, मरीज की देखभाल में चूक थी या संक्रमण-रोकथाम उपायों की विफलता — और भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराने से रोका जा सके।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अस्पतालों पर निर्भर गरीब तबके की महिलाएँ ही इन घटनाओं की सबसे बड़ी पीड़ित हैं। गहलोत ने रेखांकित किया कि जो महिलाएँ सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा करके इन अस्पतालों में आईं, उन्हें कथित लापरवाही और प्रणालीगत खामियों की भारी कीमत चुकानी पड़ी।
क्या होगा आगे
अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं — विशेष रूप से एम्स और राज्य एजेंसियों की जाँच रिपोर्ट के सार्वजनिक होने और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई पर। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूता देखभाल की गुणवत्ता एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गई है।