कोटा में सीजेरियन डिलीवरी के बाद एक और मौत, जेके लोन अस्पताल में दो महिलाओं की किडनी फेल
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के कोटा में प्रसूता महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल एक बार फिर उठ खड़े हुए हैं। जेके लोन हॉस्पिटल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो अन्य प्रसूताओं की किडनी फेल होने की स्थिति सामने आई है। यह घटना 10 मई को उजागर हुई और चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है।
मृतका का विवरण और घटनाक्रम
बूंदी जिले के सुवांसा गाँव निवासी प्रिया, पत्नी रोहित महावर, की शनिवार को जेके लोन अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी कराई गई थी। डिलीवरी के कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और शनिवार देर रात करीब 12:30 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि प्रिया की शादी करीब दो साल पहले ही हुई थी, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि मृतका पहले से हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित थी और उन्हें सीने में दर्द की शिकायत थी। चिकित्सकों द्वारा बेहतर उपचार दिए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉ. शर्मा ने स्वीकार किया कि प्रसूताओं की किडनी फेल होने के कारणों को लेकर पूरा चिकित्सा विभाग चिंतित है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि ऐसी स्थिति किन कारणों से उत्पन्न हो रही है।
दो अन्य प्रसूताओं की किडनी फेल
आरती और पिंकी नामक दो प्रसूताओं की किडनी फेल होने की स्थिति सामने आई है — दोनों का यूरिन आना बंद हो गया था। आरती को शनिवार सुबह मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (SSB) में भर्ती कराया गया, लेकिन दोपहर बाद हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा। रात में पिंकी को भी SSB रेफर किया गया, जहाँ जयपुर से आई विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उनका उपचार कर रही है। अधीक्षक के अनुसार, फिलहाल दोनों की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि इससे पहले कोटा मेडिकल कॉलेज में भी दो महिलाओं की मौत और छह महिलाओं की किडनी फेल होने के मामले सामने आ चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूता देखभाल की गुणवत्ता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। इनमें से दो गंभीर मरीजों का इलाज निजी अस्पताल में जारी है।
आगे क्या होगा
चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम किडनी फेल होने के कारणों की जाँच में जुटी है। यदि यह किसी संक्रमण या दवा की प्रतिक्रिया से जुड़ा पाया गया, तो अस्पताल प्रशासन को व्यापक समीक्षा करनी पड़ सकती है। प्रसूता महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।