19 सितंबर 2026
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बूंदी में सी-सेक्शन के बाद दो प्रसूताओं की मौत, राजस्थान सरकार ने 4 सदस्यीय जांच समिति गठित

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बूंदी में सी-सेक्शन के बाद दो प्रसूताओं की मौत, राजस्थान सरकार ने 4 सदस्यीय जांच समिति गठित

सारांश

राजस्थान के बूंदी जनरल अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत ने सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार ने कोटा मेडिकल कॉलेज में 4 सदस्यीय जांच समिति गठित की है जिसे दो दिन में रिपोर्ट देनी है — जबकि ICU सुविधाओं की कमी और रेफरल में विलंब मौतों की बड़ी वजह बताई जा रही है।

मुख्य बातें

बूंदी के सरकारी जनरल अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो महिलाओं की 17 सितंबर 2026 को कोटा में मौत हो गई।
राजस्थान सरकार ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा में 4 सदस्यीय जांच समिति गठित की; रिपोर्ट दो दिन में तलब।
पहली महिला वर्षा सेन (सिलोर, बूंदी) को 15 सितंबर को भर्ती किया गया था; भ्रूण ट्रांसवर्स पोजिशन के कारण सी-सेक्शन हुआ।
दूसरी महिला को 16 सितंबर को भर्ती कराया गया; डिलीवरी के बाद PPH (पोस्टपार्टम हैमरेज) से स्थिति बिगड़ी।
दोनों मामलों में HDU/ICU सुविधाओं की अनुपलब्धता के चलते उच्च केंद्र रेफर किया गया।
समिति संयोजक उषा डडिया (एनेस्थिसियोलॉजी) सहित आशिमा विजय (गायनेकोलॉजी), पंकज जैन (मेडिसिन) और राहुल अग्रवाल (माइक्रोबायोलॉजी) जांच करेंगे।

राजस्थान के बूंदी ज़िले के सरकारी जनरल अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो महिलाओं की मौत के मामले में राज्य सरकार ने 19 सितंबर 2026 को कड़ा संज्ञान लेते हुए गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा में एक चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

पहला मामला बूंदी ज़िले के सिलोर निवासी वर्षा सेन का है, जिन्हें 15 सितंबर 2026 को बूंदी के जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार वे लगभग साढ़े आठ महीने की गर्भवती थीं और भ्रूण के ट्रांसवर्स पोजिशन (आड़ी स्थिति) में होने के कारण सिजेरियन सेक्शन किया गया, जिसमें उन्होंने 2.800 किलोग्राम वज़न की बच्ची को जन्म दिया।

सर्जरी के बाद जटिलताएँ उत्पन्न होने पर उन्हें एक बड़े चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया। रिकॉर्ड बताते हैं कि 17 सितंबर 2026 को कोटा में उनकी मौत हो गई।

दूसरा मामला उस गर्भवती महिला का है जिसे 16 सितंबर 2026 को बूंदी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने दोपहर 12:12 बजे 2.280 किलोग्राम वज़न के बच्चे को जन्म दिया। लगभग दोपहर 3:40 बजे उन्हें गंभीर पोस्टपार्टम हैमरेज (PPH) — यानी प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव — शुरू हो गया।

इलाज और रेफरल की प्रक्रिया

पीएमओ लक्ष्मीनारायण मीणा ने बताया कि दोनों मामलों में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने बैलून टैम्पोनैड, दवा और ब्लड ट्रांसफ्यूजन के ज़रिए रक्तस्राव रोकने का प्रयास किया। दूसरी महिला को रेफर किए जाने से पहले एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया था। चूँकि HDU/ICU सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं और रक्तस्राव नियंत्रण में नहीं आ रहा था, इसलिए दोनों को उच्चस्तरीय चिकित्सा केंद्र भेजा गया।

यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान के ग्रामीण सरकारी अस्पतालों में आईसीयू और विशेषज्ञ सुविधाओं की कमी को लेकर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि वर्षा सेन ने गर्भावस्था के दौरान सिलोर सब-हेल्थ सेंटर में चार नियमित ANC जाँचें19 फरवरी, 16 अप्रैल, 25 जून और 20 अगस्त 2026 — करवाई थीं, जो प्रसव-पूर्व देखभाल की निरंतरता दर्शाती हैं।

जांच समिति की संरचना

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा के प्रिंसिपल एवं कंट्रोलर द्वारा गठित इस समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:

उषा डडिया — प्रोफेसर, एनेस्थिसियोलॉजी विभाग (संयोजक); पंकज जैन — प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग (सदस्य); राहुल अग्रवाल — एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग (सदस्य); तथा आशिमा विजय — एसोसिएट प्रोफेसर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभाग (सदस्य)।

समिति दोनों मामलों के मेडिकल रिकॉर्ड, सर्जिकल प्रक्रिया, प्रसव के बाद की देखभाल, दिए गए उपचार और रेफरल प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा करेगी।

आम जनता और स्वास्थ्य तंत्र पर असर

PPH — प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव — भारत में मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर ICU/HDU सुविधा उपलब्ध न होना और रेफरल में विलंब जानलेवा साबित हो सकता है। यह मामला ज़िला स्तरीय अस्पतालों में विशेषज्ञ प्रसूति देखभाल की गंभीर कमी को उजागर करता है।

आगे क्या होगा

जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। दोनों मौतों के असल चिकित्सीय कारण रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएँगे। यह मामला राजस्थान में सरकारी प्रसूति सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राजस्थान ही नहीं, पूरे देश की एक पुरानी और बार-बार दोहराई जाने वाली विफलता है। दो दिन में जांच रिपोर्ट माँगना प्रशासनिक सक्रियता का संकेत है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस रिपोर्ट से ज़िला स्तर पर संरचनात्मक सुधार होंगे, या यह महज़ कागज़ी कार्रवाई बनकर रह जाएगी। प्रसव-पूर्व देखभाल (ANC) की चार जाँचें करवाने के बावजूद वर्षा सेन को अपनी जान गँवानी पड़ी — यह दर्शाता है कि सिस्टम की विफलता ANC स्तर पर नहीं, प्रसव के वक्त उच्च-जोखिम प्रबंधन में है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बूंदी में सी-सेक्शन के बाद दो महिलाओं की मौत कब और कैसे हुई?
दोनों महिलाओं को क्रमशः 15 और 16 सितंबर 2026 को बूंदी के सरकारी जनरल अस्पताल में भर्ती किया गया था और सिजेरियन डिलीवरी के बाद जटिलताएँ उत्पन्न होने पर कोटा रेफर किया गया, जहाँ 17 सितंबर 2026 को उनकी मौत हो गई। दोनों मामलों में पोस्टपार्टम हैमरेज (PPH) को प्रमुख जटिलता बताया गया है।
राजस्थान सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
राजस्थान सरकार ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा में एक चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को दोनों मामलों के मेडिकल रिकॉर्ड, सर्जरी, उपचार और रेफरल प्रक्रिया की जाँच कर दो दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
जांच समिति में कौन-कौन से सदस्य हैं?
समिति में उषा डडिया (प्रोफेसर, एनेस्थिसियोलॉजी — संयोजक), पंकज जैन (प्रोफेसर, मेडिसिन), राहुल अग्रवाल (एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी) और आशिमा विजय (एसोसिएट प्रोफेसर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी) शामिल हैं। इन्हें गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा के प्रिंसिपल एवं कंट्रोलर द्वारा नियुक्त किया गया है।
पोस्टपार्टम हैमरेज (PPH) क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है?
PPH यानी प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, मातृ मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। यदि समय पर ICU/HDU सुविधा और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध न हो, तो यह जानलेवा हो सकता है। बूंदी के मामलों में बैलून टैम्पोनैड और ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बावजूद रक्तस्राव नियंत्रित नहीं हो पाया और ICU सुविधाएँ उपलब्ध न होने के कारण रेफर करना पड़ा।
इन मौतों के बाद क्या आगे की कार्रवाई होगी?
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। रिपोर्ट में दोनों मामलों के वास्तविक चिकित्सीय कारण और संभावित चूक की पहचान की जाएगी, जिसके बाद ज़िम्मेदारी तय करना और सुधारात्मक कदम उठाना सरकार के एजेंडे पर होगा।
राष्ट्र प्रेस
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