कोटा मातृ मृत्यु: जैक्सन लैबोरेटरीज का ऑक्सीटोसिन बैच घटिया, राजस्थान में राज्यव्यापी प्रतिबंध
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के कोटा में पाँच गर्भवती महिलाओं की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 26 मई 2026 को जैक्सन लैबोरेटरीज द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के एक बैच पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगा दिया, जो केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला के परीक्षण में घटिया पाया गया। राजस्थान की प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौर ने पुष्टि की है कि फार्मा कंपनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच में सामने आया कि प्रश्नगत इंजेक्शन बैच में आवश्यक सक्रिय तत्व — ऑक्सीटोसिन — की मात्रा बिल्कुल भी नहीं पाई गई। राजस्थान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक ड्रग अलर्ट के अनुसार, यह नमूना केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला के गुणवत्ता परीक्षण में विफल रहा।
सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र कुमार गर्ग ने बताया कि राजस्थान मेडिकल हॉल नामक फर्म ने ये इंजेक्शन कोटा के अस्पतालों को स्थानीय खरीद चैनलों के माध्यम से आपूर्ति किए थे। गौरतलब है कि पिछले चार महीनों में प्रसव के दौरान लगभग 12,500 महिलाओं को ये इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं।
जब्ती और प्रतिबंध
दवा परीक्षण रिपोर्ट मिलते ही अधिकारियों ने असफल बैच का बचा हुआ स्टॉक जब्त कर लिया। कोटा मेडिकल कॉलेज के भंडार से 2,479 इंजेक्शन (अनुमानित मूल्य लगभग ₹25,000) जब्त किए गए। जेके लोन अस्पताल से 72 इंजेक्शन और आपूर्तिकर्ता के पास रखे 950 इंजेक्शन भी जब्त किए गए।
अधिकारियों ने सभी अस्पतालों, फार्मेसियों और मेडिकल स्टोरों को अपने स्टॉक से इस बैच के इंजेक्शन तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी जाँचा जा रहा है कि क्या यही बैच अन्य अस्पतालों या खुले बाज़ार में भी पहुँचा था।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
चिकित्सा विशेषज्ञों ने इंजेक्शन को सीधे मौतों से जोड़ने के खिलाफ सावधानी बरतने की अपील की है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रितिका माथुर के अनुसार, इंजेक्शन के कारण मातृ मृत्यु होने की संभावना बेहद कम है।
उन्होंने बताया कि मृत महिलाओं में से एक — शिरीन — को कथित तौर पर यह इंजेक्शन दिया ही नहीं गया था, फिर भी उनकी गुर्दे की विफलता से मृत्यु हो गई। सहायक औषधि नियंत्रक गर्ग ने भी स्पष्ट किया कि इंजेक्शन के उपयोग से सीधे तौर पर मृत्यु, गुर्दे की विफलता या अन्य घातक जटिलताएँ होने की संभावना नहीं है।
एम्स टीम की जाँच और सिफारिशें
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली की एक विशेषज्ञ टीम ने कोटा का दौरा कर जाँच की। टीम ने सिफारिश की कि मौतों के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालने से पहले मरीजों को दी गई सभी दवाओं की विस्तृत जाँच की जानी चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दवा आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता पहले से सवालों के घेरे में है। प्रधान सचिव गायत्री राठौर ने बताया कि अस्पताल में भर्ती अन्य गर्भवती महिलाओं को भी यह दवा दी गई थी या नहीं, इसकी जाँच जारी है।
आगे क्या होगा
अधिकारी आपूर्ति श्रृंखला का पूरा ऑडिट करने और यह पता लगाने में जुटे हैं कि घटिया बैच कितने अस्पतालों तक पहुँचा। जाँच के नतीजों के आधार पर जैक्सन लैबोरेटरीज और आपूर्तिकर्ता फर्म के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग का यह कदम राज्य की दवा खरीद प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग को और तेज़ कर सकता है।