28 जून 2026
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ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से 7 प्रसूताओं की मौत: निर्माता कंपनी का लाइसेंस रद्द, WHO ने भारत से माँगी रिपोर्ट

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ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से 7 प्रसूताओं की मौत: निर्माता कंपनी का लाइसेंस रद्द, WHO ने भारत से माँगी रिपोर्ट

सारांश

राजस्थान में सात प्रसूताओं की संदिग्ध मौत ने दवा नियामक व्यवस्था की कमज़ोरी उजागर कर दी। अमृतसर की जैक्सन लेबोरेट्रीज का लाइसेंस रद्द हुआ, WHO ने रिपोर्ट माँगी — यह त्रासदी अब सिर्फ राजस्थान की नहीं, पूरे देश की दवा गुणवत्ता निगरानी प्रणाली पर सवाल है।

मुख्य बातें

राजस्थान में मई–जून 2026 के बीच 7 प्रसूताओं की संदिग्ध मौत के मामले में 'टोसिन' ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जाँच के दायरे में।
अमृतसर स्थित एम/एस जैक्सन लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस केंद्र सरकार ने रद्द किया।
राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की जाँच में इंजेक्शन में निर्धारित मात्रा में ऑक्सीटोसिन नहीं पाया गया।
CDSCO ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कंपनी संयंत्रों का निरीक्षण किया; लाइसेंस रद्द की सिफारिश स्वास्थ्य मंत्रालय ने मानी।
WHO ने भारत से जानकारी माँगी कि दोषपूर्ण दवा अन्य राज्यों तक तो नहीं पहुँची।
जाँच एजेंसियाँ अब सप्लाई चेन , बैच वितरण रिकॉर्ड और अस्पताल खरीद प्रणाली की भी पड़ताल कर रही हैं।

राजस्थान में प्रसव के दौरान या बाद में सात महिलाओं की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बन चुका है। जाँच में अमृतसर स्थित एम/एस जैक्सन लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित 'टोसिन' ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन (5 एमएल) की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप न पाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारत सरकार से इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

दोषपूर्ण इंजेक्शन की पहचान कैसे हुई

राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की प्रयोगशाला जाँच में सामने आया कि 'टोसिन' इंजेक्शन में निर्धारित मात्रा में सक्रिय तत्व ऑक्सीटोसिन मौजूद नहीं था। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश स्थित कंपनी के विनिर्माण संयंत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई, जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया।

सात मृत महिलाओं का विवरण

जाँच के दायरे में आई सातों महिलाओं की मौतें मई और जून 2026 के बीच हुईं। पायल (5 मई, न्यू मेडिकल हॉस्पिटल, कोटा), ज्योति (7 मई), प्रिया महावर (9 मई, जे.के. लोन अस्पताल, कोटा), पिंकी महावर (10 मई), शिरीन (17 मई, न्यू मेडिकल हॉस्पिटल, कोटा), प्रीति (19 जून, पीबीएम अस्पताल, बीकानेर) और शारदा नायक (21 जून, पीबीएम अस्पताल, बीकानेर) — इन सभी को प्रसव के दौरान संदिग्ध 'टोसिन' इंजेक्शन दिया गया था। जाँच एजेंसियाँ अभी यह निर्धारित करने में जुटी हैं कि इन मौतों का सीधा संबंध दोषपूर्ण इंजेक्शन से था या नहीं।

WHO की चिंता और केंद्र की सक्रियता

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत से जानकारी माँगी है कि क्या इस प्रकार की घटनाएँ देश के अन्य हिस्सों में भी हुई हैं और दोषपूर्ण दवाओं की आपूर्ति किन-किन राज्यों तक पहुँची। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से पूरे मामले की विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट भी तलब की है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में दवा गुणवत्ता निगरानी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

ऑक्सीटोसिन क्यों है इतना महत्वपूर्ण

ऑक्सीटोसिन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे अनिवार्य जीवनरक्षक दवाओं में से एक मानी जाती है। इसका उपयोग प्रसव पीड़ा प्रेरित करने, प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव रोकने और गर्भाशय को संकुचित करने के लिए किया जाता है। गौरतलब है कि इस दवा की गुणवत्ता में कोई भी कमी माँ और नवजात शिशु, दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

आगे की जाँच का दायरा

जाँच एजेंसियाँ अब दवा की सप्लाई चेन, विभिन्न बैचों के वितरण रिकॉर्ड और अस्पतालों की खरीद प्रणाली की भी पड़ताल कर रही हैं। उद्देश्य यह है कि भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दवा गुणवत्ता निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ बनाया जाए। इस मामले का परिणाम भारत की दवा नियामक व्यवस्था में बड़े सुधारों की नींव रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक प्रणालीगत चूक है। CDSCO का निरीक्षण तंत्र आखिर तब क्यों सक्रिय होता है जब जानें जा चुकी होती हैं? WHO की दखलंदाज़ी यह संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की दवा आपूर्ति की विश्वसनीयता दाँव पर है। जब तक लाइसेंस रद्द करने से आगे बढ़कर पूर्व-बाज़ार गुणवत्ता सत्यापन अनिवार्य नहीं किया जाता, ऐसी त्रासदियाँ दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से सात प्रसूताओं की मौत का मामला क्या है?
मई और जून 2026 के बीच राजस्थान के कोटा और बीकानेर के अस्पतालों में सात महिलाओं की प्रसव के दौरान या बाद में संदिग्ध मौत हुई। जाँच में अमृतसर की जैक्सन लेबोरेट्रीज द्वारा निर्मित 'टोसिन' ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
जैक्सन लेबोरेट्रीज का लाइसेंस क्यों रद्द किया गया?
राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की प्रयोगशाला जाँच में 'टोसिन' इंजेक्शन में निर्धारित मात्रा में सक्रिय तत्व ऑक्सीटोसिन नहीं पाया गया। CDSCO ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश स्थित कंपनी के संयंत्रों का निरीक्षण किया और लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की, जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मान लिया।
WHO ने इस मामले में क्यों दखल दिया?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत सरकार से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। WHO जानना चाहता है कि क्या इस तरह की घटनाएँ अन्य राज्यों में भी हुई हैं और दोषपूर्ण दवा की आपूर्ति किन-किन जगहों तक पहुँची।
ऑक्सीटोसिन की गुणवत्ता में कमी माँ और बच्चे के लिए कितनी खतरनाक है?
ऑक्सीटोसिन प्रसव पीड़ा प्रेरित करने, प्रसवोत्तर रक्तस्राव रोकने और गर्भाशय संकुचन के लिए अनिवार्य दवा है। इसमें सक्रिय तत्व की कमी का अर्थ है कि रक्तस्राव नियंत्रित नहीं होगा, जो माँ और नवजात दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है।
आगे जाँच का दायरा क्या होगा?
जाँच एजेंसियाँ अब दवा की सप्लाई चेन, विभिन्न बैचों के वितरण रिकॉर्ड और अस्पतालों की खरीद प्रणाली की पड़ताल कर रही हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट भी माँगी है।
राष्ट्र प्रेस
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