10 अगस्त 2026
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जोधपुर सी-सेक्शन जटिलताएं: 8 महिलाएं प्रभावित, 25 दवाएं निलंबित, एम्स करेगा स्वतंत्र जांच

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जोधपुर सी-सेक्शन जटिलताएं: 8 महिलाएं प्रभावित, 25 दवाएं निलंबित, एम्स करेगा स्वतंत्र जांच

सारांश

जोधपुर के पाओटा जिला अस्पताल में 20 जून को सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 महिलाएं गंभीर जटिलताओं की चपेट में आईं — दो को डायलिसिस तक की नौबत आई। प्रशासन ने 25 दवाएं निलंबित कीं और एम्स को स्वतंत्र जांच सौंपी। असली सवाल दवा आपूर्ति-श्रृंखला की निगरानी पर है।

मुख्य बातें

20 जून 2026 को जोधपुर के पाओटा जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 महिलाओं में गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हुईं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने 25 दवाओं और एक इंजेक्शन बैच के उपयोग पर तत्काल रोक लगाई; नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए।
कथित तौर पर सोडियम लैक्टेट आईवी फ्लूइड का एक नया बैच घटना से एक सप्ताह पहले आया था और पहली बार उपयोग में था।
ललिता और सोनल को गुर्दे की खराबी और डायलिसिस की ज़रूरत पड़ी; दोनों को एम्स रेफर किया गया।
जिला कलेक्टर आलोक रंजन की अध्यक्षता में आपात समीक्षा बैठक हुई; एम्स टीम स्वतंत्र जांच करेगी।
अस्पताल में सभी सर्जिकल प्रक्रियाएं रिपोर्ट आने तक निलंबित; मरीजों को माथुरदास माथुर अस्पताल भेजा जा रहा है।

राजस्थान के जोधपुर स्थित पाओटा जिला अस्पताल में 20 जून 2026 को सिजेरियन डिलीवरी के बाद आठ महिलाओं में गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो गईं, जिसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने 25 दवाओं और एक इंजेक्शन के उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स की एक विशेष टीम इस घटना की स्वतंत्र जांच करेगी।

क्या हुआ उस दिन

20 जून को पाओटा जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली कई महिलाओं में सर्जरी के तुरंत बाद गंभीर लक्षण उभरे। पीड़ित परिवारों के अनुसार, मरीजों को अत्यधिक रक्तस्राव और मूत्र में असामान्य कमी जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ा, जिसके चलते आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलानी पड़ी।

अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित महिलाओं को सर्जरी से पहले और बाद में सोडियम लैक्टेट आईवी फ्लूइड दिया गया था। यह बैच घटना से लगभग एक सप्ताह पहले अस्पताल में आया था और कथित तौर पर पहली बार उपयोग में लाया जा रहा था।

प्रशासन की तत्काल कार्रवाई

जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने अस्पताल के दवा भंडार का दौरा किया और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ आपात समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा, पाओटा जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. कुलबीर चोपड़ा, एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित और सीएमएचओ डॉ. एस.एस. शेखावत उपस्थित रहे।

चिकित्सा विभाग ने प्रभावित मामलों में उपयोग की गई सभी दवाओं और उपभोग्य सामग्रियों के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेज दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने तक 25 दवाओं और एक इंजेक्शन बैच के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

मरीजों की वर्तमान स्थिति

अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित आठ में से छह महिलाओं की हालत फिलहाल स्थिर है और उनमें सुधार के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, ललिता और सोनल नाम की दो मरीजों में गुर्दे की गंभीर खराबी विकसित हो गई और उन्हें डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी। दोनों को विशेष देखभाल के लिए एम्स रेफर किया गया है।

डॉ. कुलबीर चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि सोडियम लैक्टेट आईवी फ्लूइड सिजेरियन डिलीवरी में एक मानक प्रक्रिया है और अन्य सभी दवाएं व उपचार प्रोटोकॉल सामान्य थे।

परिजनों की मांग और अस्पताल पर असर

पीड़ित महिलाओं के परिजनों ने घटना की गहन और निष्पक्ष जांच की माँग की है। उनका आरोप है कि प्रसव के तुरंत बाद मरीजों की स्थिति तेजी से बिगड़ी, जो सामान्य प्रसव जटिलताओं से भिन्न थी।

यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में दवा गुणवत्ता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि यह घटना सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में आपूर्ति-श्रृंखला निगरानी की कमजोरियों को उजागर करती है।

आगे क्या होगा

पाओटा जिला अस्पताल में सभी सर्जिकल प्रक्रियाएं तब तक निलंबित रहेंगी, जब तक दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और ऑपरेशन थिएटर के वातावरण से संबंधित रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती। सर्जरी की ज़रूरत वाले मरीजों को माथुरदास माथुर अस्पताल भेजा जा रहा है। एम्स की स्वतंत्र जांच टीम और मेडिकल कॉलेज स्तरीय जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि जटिलताओं का वास्तविक कारण दवा की गुणवत्ता थी या कोई और कारक।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में दवा आपूर्ति-श्रृंखला की व्यापक खामियों का संकेत है — एक नया बैच बिना पर्याप्त गुणवत्ता जांच के सीधे ऑपरेशन थिएटर तक पहुंच गया। एम्स की स्वतंत्र जांच स्वागत योग्य है, लेकिन असली परीक्षण यह है कि क्या राजस्थान सरकार दवा खरीद और भंडारण प्रोटोकॉल में संरचनात्मक सुधार करती है या यह मामला भी रिपोर्ट दाखिल होने के बाद ठंडे बस्ते में चला जाता है। दो महिलाओं को डायलिसिस की नौबत यह बताती है कि जटिलताएं सामान्य पोस्ट-ऑपरेटिव जोखिम से कहीं अधिक गंभीर थीं, और जवाबदेही तय किए बिना जनता का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोधपुर के पाओटा अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद क्या हुआ?
20 जून 2026 को पाओटा जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली 8 महिलाओं में सर्जरी के तुरंत बाद गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हुईं, जिनमें अत्यधिक रक्तस्राव और मूत्र में कमी शामिल थी। दो मरीजों — ललिता और सोनल — को गुर्दे की खराबी के चलते डायलिसिस और एम्स रेफरल की ज़रूरत पड़ी।
25 दवाएं क्यों निलंबित की गईं?
प्रभावित मामलों में उपयोग की गई दवाओं और उपभोग्य सामग्रियों के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने तक एहतियात के तौर पर 25 दवाओं और एक इंजेक्शन बैच — जिसमें संदिग्ध सोडियम लैक्टेट आईवी फ्लूइड शामिल है — के उपयोग पर तत्काल रोक लगाई गई है।
सोडियम लैक्टेट आईवी फ्लूइड से क्या संबंध है?
अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी से पहले और बाद में सोडियम लैक्टेट आईवी फ्लूइड दिया गया था। यह बैच घटना से लगभग एक सप्ताह पहले आया था और कथित तौर पर पहली बार उपयोग में लाया जा रहा था। हालांकि जटिलताओं का सटीक कारण अभी जांच का विषय है।
एम्स की जांच में क्या होगा और अस्पताल की स्थिति क्या है?
एम्स की एक स्वतंत्र टीम घटना की जांच करेगी, जबकि मेडिकल कॉलेज स्तर पर भी अलग जांच जारी है। पाओटा जिला अस्पताल में सभी सर्जिकल प्रक्रियाएं रिपोर्ट आने तक निलंबित हैं और ज़रूरी मरीजों को माथुरदास माथुर अस्पताल भेजा जा रहा है।
प्रभावित महिलाओं की अभी क्या स्थिति है?
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, 8 में से 6 महिलाओं की हालत स्थिर है और उनमें सुधार हो रहा है। ललिता और सोनल नाम की दो मरीजों को गुर्दे की गंभीर खराबी के कारण डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी और उन्हें विशेष देखभाल के लिए एम्स रेफर किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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