जोधपुर के पावटा अस्पताल में 8 महिलाओं की सीजेरियन के बाद हालत बिगड़ी, उच्च स्तरीय जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में 20 जून 2026 को सीजेरियन डिलीवरी कराने वाली आठ महिलाओं की ऑपरेशन के तुरंत बाद तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और विपक्ष को सरकार पर हमले का मौका दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार, 20 जून को पावटा जिला अस्पताल में एक के बाद एक सीजेरियन सर्जरी की गईं। ऑपरेशन के बाद कई महिलाओं का तापमान असामान्य रूप से बढ़ गया और उन्हें तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की ज़रूरत पड़ी। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा ने बताया कि सभी प्रभावित महिलाओं की गहन चिकित्सा निगरानी की जा रही है।
डॉ. जोधा के अनुसार, दो महिलाओं में विशेष रूप से गंभीर जटिलताएं सामने आईं — एक को उच्च रक्तचाप की समस्या हुई, जबकि दूसरी को सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का सामना करना पड़ा। प्रारंभिक जांच में अभी तक स्टाफ की लापरवाही का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, हालांकि जांच जारी है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जोधपुर जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने स्वयं पावटा जिला अस्पताल का निरीक्षण किया और चिकित्सा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों की देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी प्रभावित महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। जांच रिपोर्ट आने तक स्त्री रोग ऑपरेशन थिएटर में सभी प्रक्रियाएं तत्काल प्रभाव से रोक दी गई हैं।
विपक्ष की आलोचना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस घटना को 'बेहद दुखद और चिंताजनक' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी प्रबंधन करने में विफल रही है।
पायलट ने कोटा और बीकानेर में पहले हुई ऐसी ही घटनाओं का हवाला दिया, जहाँ प्रसव के बाद महिलाओं को किडनी फेलियर का सामना करना पड़ा था और कुछ मामलों में मृत्यु भी हुई थी। उन्होंने माँग की कि उच्च स्तरीय जांच हो, जांच में पाई गई किसी भी लापरवाही के लिए जवाबदेही तय की जाए, प्रभावित परिवारों को पर्याप्त वित्तीय सहायता दी जाए और महिलाओं को बेहतर चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जाए।
व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद जटिलताओं की घटनाएं बार-बार सुर्खियों में आती रही हैं। गौरतलब है कि कोटा और बीकानेर जैसी पिछली घटनाओं के बाद भी सुधार के वादे किए गए थे, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर व्यवस्था में बदलाव सीमित रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता, एनेस्थीसिया प्रोटोकॉल और पोस्ट-ऑपरेटिव निगरानी जैसे पहलुओं की नियमित समीक्षा अनिवार्य है।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। स्त्री रोग ऑपरेशन थिएटर तब तक बंद रहेगा जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती। प्रभावित महिलाओं की स्थिति पर चिकित्सा टीम की कड़ी नज़र बनी हुई है।