17 जुलाई 2026
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जामताड़ा: प्रसूता और नवजात की मौत के बाद सदर अस्पताल में तोड़फोड़, डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

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जामताड़ा: प्रसूता और नवजात की मौत के बाद सदर अस्पताल में तोड़फोड़, डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

सारांश

जामताड़ा में 22 वर्षीय प्रसूता और नवजात की कथित लापरवाही से मौत ने एक साथ तीन संकट खड़े कर दिए — अस्पताल में तोड़फोड़, BJP नेताओं पर FIR और डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल। मामला स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र का होने से राजनीतिक तनाव और गहरा है।

मुख्य बातें

22 वर्षीय रीना देवी और उनके नवजात शिशु की 17 जुलाई को जामताड़ा में कथित चिकित्सीय लापरवाही और एंबुलेंस न मिलने से मौत हो गई।
आक्रोशित लोगों ने जामताड़ा सदर अस्पताल में तोड़फोड़ की और मुख्य सड़क घंटों जाम रखी।
BJP जिलाध्यक्ष सुमित शरण समेत 8 नामजद लोगों के खिलाफ सरकारी संपत्ति नुकसान और कार्य बाधा का FIR दर्ज।
प्रशासन ने ड्यूटी ANM को निलंबित किया, मृतका के पति को संविदा नौकरी और आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया; मेडिकल बोर्ड गठित।
झारखंड मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल ; OPD बाधित, आपातकालीन सेवाएँ जारी।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ.
इरफान अंसारी ने हिंसा की निंदा कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए; BJP ने तीन सदस्यीय जाँच समिति बनाई।

झारखंड के जामताड़ा जिले में 22 वर्षीय रीना देवी और उनके नवजात शिशु की कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण मौत के बाद गुरुवार शाम जिले के सदर अस्पताल में व्यापक तोड़फोड़ हुई और मुख्य सड़क घंटों जाम रही। यह घटना झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के गृह क्षेत्र में हुई, जिससे मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है।

घटनाक्रम: क्या हुआ जामताड़ा में

परिजनों के अनुसार, 17 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर रीना देवी को जामताड़ा शहर के सरकारबांध (महुलडंगाल) इलाके से सदर अस्पताल लाया गया। परिवार का आरोप है कि वहाँ इलाज में लापरवाही बरती गई और मरीज को रेफर किए जाने के बाद समय पर सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई।

इसके बाद निजी वाहन से दूसरे अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही माँ और नवजात दोनों की मौत हो गई। इस दोहरी मौत की खबर फैलते ही आक्रोशित परिजन और स्थानीय लोग सदर अस्पताल पहुँचे और परिसर में जमकर तोड़फोड़ की। मुख्य सड़क को घंटों जाम कर दिया गया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा।

एफआईआर और आरोपी

अस्पताल प्रशासन की शिकायत पर तोड़फोड़ के मामले में आठ नामजद लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। नामजद अभियुक्तों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिलाध्यक्ष सुमित शरण, जिला महामंत्री कमलेश मंडल, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष कुणाल सिंह, नगर अध्यक्ष प्रदीप रावत, आकाश साव, टिंकू साव, राज सोनकर और वार्ड पार्षद बच्चू साव शामिल हैं। कई अज्ञात लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आश्वासन

जिला प्रशासन और परिजनों के बीच वार्ता के बाद प्रशासन ने तीन प्रमुख आश्वासन दिए — मृतका के पति को संविदा आधार पर सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और ड्यूटी पर तैनात संबंधित एएनएम को तत्काल प्रभाव से निलंबन। इसके साथ ही पूरे मामले की जाँच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अस्पताल में हुई हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि चिकित्सा संस्थानों में हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन को आरोपियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

अस्पताल में हुई हिंसा के विरोध में झारखंड मेडिकल एसोसिएशन और चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर शुक्रवार 18 जुलाई से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। इससे सदर अस्पताल की ओपीडी सेवाएँ बाधित हो गई हैं, हालाँकि आपातकालीन सेवाएँ जारी रखी गई हैं।

राजनीतिक हलचल और आगे की जाँच

BJP ने इस घटना की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जो घटनास्थल का दौरा कर प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपेगी। प्रशासन का कहना है कि प्रसूता और नवजात की मौत तथा अस्पताल में हिंसा — दोनों मामलों की अलग-अलग जाँच की जा रही है। यह घटना ऐसे समय में आई है जब झारखंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और एंबुलेंस उपलब्धता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई से यह तय होगा कि इस दोहरी त्रासदी के लिए जवाबदेही कहाँ तय होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। डॉक्टरों की हड़ताल न्यायसंगत माँग है, लेकिन इससे जिले के अन्य मरीज़ों पर बोझ पड़ेगा — असली जवाबदेही मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और उस पर की जाने वाली कार्रवाई से तय होगी, न कि महज आश्वासनों से।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामताड़ा में प्रसूता और नवजात की मौत कैसे हुई?
परिजनों के अनुसार, 22 वर्षीय रीना देवी को प्रसव पीड़ा होने पर जामताड़ा सदर अस्पताल लाया गया, जहाँ कथित तौर पर इलाज में लापरवाही बरती गई। रेफर किए जाने के बाद समय पर सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली और निजी वाहन से दूसरे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही माँ और नवजात दोनों की मौत हो गई।
जामताड़ा अस्पताल तोड़फोड़ में किन पर FIR दर्ज हुई है?
अस्पताल प्रशासन की शिकायत पर BJP जिलाध्यक्ष सुमित शरण समेत 8 नामजद लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। अन्य नामजद अभियुक्तों में कमलेश मंडल, कुणाल सिंह, प्रदीप रावत, आकाश साव, टिंकू साव, राज सोनकर और बच्चू साव शामिल हैं।
झारखंड में डॉक्टर हड़ताल पर क्यों हैं और इससे क्या प्रभाव पड़ेगा?
झारखंड मेडिकल एसोसिएशन और चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने अस्पताल में हुई हिंसा के विरोध में शुक्रवार 18 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया है। इससे जामताड़ा सदर अस्पताल की OPD सेवाएँ बाधित हैं, हालाँकि आपातकालीन सेवाएँ जारी रखी गई हैं।
प्रशासन ने मृतका के परिवार को क्या आश्वासन दिए हैं?
जिला प्रशासन ने मृतका रीना देवी के पति को संविदा आधार पर सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा ड्यूटी पर तैनात संबंधित ANM को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है और पूरे मामले की जाँच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है।
इस मामले में BJP और सरकार की क्या भूमिका है?
BJP ने घटना की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है जो घटनास्थल का दौरा कर प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी — जिनका यह गृह क्षेत्र है — ने अस्पताल में हिंसा की निंदा कर जिला प्रशासन को आरोपियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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