जामताड़ा: प्रसूता और नवजात की मौत के बाद सदर अस्पताल में तोड़फोड़, डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के जामताड़ा जिले में 22 वर्षीय रीना देवी और उनके नवजात शिशु की कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण मौत के बाद गुरुवार शाम जिले के सदर अस्पताल में व्यापक तोड़फोड़ हुई और मुख्य सड़क घंटों जाम रही। यह घटना झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के गृह क्षेत्र में हुई, जिससे मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है।
घटनाक्रम: क्या हुआ जामताड़ा में
परिजनों के अनुसार, 17 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर रीना देवी को जामताड़ा शहर के सरकारबांध (महुलडंगाल) इलाके से सदर अस्पताल लाया गया। परिवार का आरोप है कि वहाँ इलाज में लापरवाही बरती गई और मरीज को रेफर किए जाने के बाद समय पर सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसके बाद निजी वाहन से दूसरे अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही माँ और नवजात दोनों की मौत हो गई। इस दोहरी मौत की खबर फैलते ही आक्रोशित परिजन और स्थानीय लोग सदर अस्पताल पहुँचे और परिसर में जमकर तोड़फोड़ की। मुख्य सड़क को घंटों जाम कर दिया गया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा।
एफआईआर और आरोपी
अस्पताल प्रशासन की शिकायत पर तोड़फोड़ के मामले में आठ नामजद लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। नामजद अभियुक्तों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिलाध्यक्ष सुमित शरण, जिला महामंत्री कमलेश मंडल, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष कुणाल सिंह, नगर अध्यक्ष प्रदीप रावत, आकाश साव, टिंकू साव, राज सोनकर और वार्ड पार्षद बच्चू साव शामिल हैं। कई अज्ञात लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आश्वासन
जिला प्रशासन और परिजनों के बीच वार्ता के बाद प्रशासन ने तीन प्रमुख आश्वासन दिए — मृतका के पति को संविदा आधार पर सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और ड्यूटी पर तैनात संबंधित एएनएम को तत्काल प्रभाव से निलंबन। इसके साथ ही पूरे मामले की जाँच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अस्पताल में हुई हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि चिकित्सा संस्थानों में हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन को आरोपियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल
अस्पताल में हुई हिंसा के विरोध में झारखंड मेडिकल एसोसिएशन और चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर शुक्रवार 18 जुलाई से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। इससे सदर अस्पताल की ओपीडी सेवाएँ बाधित हो गई हैं, हालाँकि आपातकालीन सेवाएँ जारी रखी गई हैं।
राजनीतिक हलचल और आगे की जाँच
BJP ने इस घटना की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जो घटनास्थल का दौरा कर प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपेगी। प्रशासन का कहना है कि प्रसूता और नवजात की मौत तथा अस्पताल में हिंसा — दोनों मामलों की अलग-अलग जाँच की जा रही है। यह घटना ऐसे समय में आई है जब झारखंड में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और एंबुलेंस उपलब्धता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई से यह तय होगा कि इस दोहरी त्रासदी के लिए जवाबदेही कहाँ तय होती है।