भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, पर कमजोर मानसून और पश्चिम एशिया तनाव बड़े जोखिम: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 17 जुलाई को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। हालाँकि, उन्होंने कमजोर मानसून और मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष को अर्थव्यवस्था के समक्ष सबसे बड़े जोखिम करार दिया। दूरदर्शन को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मल्होत्रा ने नीति-निर्माताओं को फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाने की सलाह दी।
रुपए की स्थिति और बाह्य क्षेत्र
अमेरिकी डॉलर की मजबूती के सामने रुपए के प्रदर्शन का बचाव करते हुए मल्होत्रा ने कहा, 'पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद डॉलर मजबूत हुआ है। कई देशों की मुद्राएँ कमजोर हुई हैं। अगर वैश्विक स्तर पर देखें तो भारतीय रुपए की स्थिति सामान्य मानी जा सकती है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मजबूत सेवा निर्यात, प्रवासी भारतीयों से होने वाली आय (रेमिटेंस), रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और नए व्यापार समझौतों के कारण भारत का बाह्य क्षेत्र आने वाले समय में भी सुदृढ़ रहेगा।
RBI गवर्नर ने सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) में विदेशी निवेश को सुगम बनाने के हालिया सरकारी कदमों, ब्रिटेन के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) तथा यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ जारी व्यापार वार्ताओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ये सभी पहल देश के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को और मजबूत करेंगी।
महंगाई और नीतिगत ब्याज दर
महंगाई पर बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल महंगाई लगभग 4 प्रतिशत के स्तर पर है और हालिया मूल्य दबाव मुख्यतः आपूर्ति पक्ष से जुड़े कारणों की वजह से रहे हैं। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, जून में खुदरा महंगाई (CPI) 4.38 प्रतिशत दर्ज की गई — जो RBI के 2 से 6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के भीतर है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हेडलाइन CPI महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था। यह संशोधन पश्चिम एशियाई भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान और जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर किया गया है। इस वर्ष अब तक RBI ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखी है।
कच्चे तेल का जोखिम और होरमुज स्ट्रेट
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नई तेजी आई है और होरमुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। आलोचकों का कहना है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव पड़ सकता है।
MPC की अगली बैठक और आगे की राह
RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच होगी, जिसमें मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करते हुए प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में होगी जब वैश्विक अनिश्चितता चरम पर है और मानसून की प्रगति पर सभी की निगाहें टिकी हैं। RBI गवर्नर की यह टिप्पणी आने वाले महीनों में भारत की मौद्रिक नीति की दिशा के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।