दिल्ली दंगे 2020: शरजील इमाम की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस को दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2025 को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष को भी पुलिस के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए समान अवधि दी है। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित की गई है।
जमानत याचिका के मुख्य आधार
शरजील इमाम के वकील अहमद इब्राहिम ने बताया कि जमानत की माँग मुख्यतः दो आधारों पर टिकी है। पहला आधार सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें जमानत के सिद्धांतों और लंबी हिरासत के मामलों में राहत देने के प्रावधानों की विस्तार से चर्चा की गई थी। वकील का तर्क है कि शरजील इमाम के मामले में भी वही सिद्धांत समान रूप से लागू होने चाहिए।
दूसरा आधार मुकदमे की अत्यंत धीमी रफ्तार है। वकील के अनुसार, ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही लंबे समय से व्यावहारिक रूप से ठप पड़ी है।
सुप्रीम कोर्ट का जनवरी निर्देश और सह-आरोपी की मिसाल
सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी में निर्देश दिया था कि इस मामले में एक वर्ष के भीतर या तो ट्रायल पूरा किया जाए या संरक्षित गवाहों की गवाही दर्ज की जाए। वकील के अनुसार, इस निर्देश के बावजूद अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी मामले के सह-आरोपी तस्लीम अहमद को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल चुकी है और शरजील इमाम के मामले में भी समान न्यायिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब 2020 दिल्ली दंगे साजिश मामले में अनेक आरोपी वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं और ट्रायल की गति को लेकर अदालतें बार-बार चिंता जता चुकी हैं। गौरतलब है कि इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जो जमानत की प्रक्रिया को स्वाभाविक रूप से जटिल बनाते हैं।
आगे क्या होगा
दिल्ली पुलिस को अब निर्धारित समय-सीमा में अपना पक्ष हाईकोर्ट के समक्ष रखना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ता पक्ष को प्रत्युत्तर का अवसर मिलेगा। 27 अगस्त की सुनवाई में अदालत तय करेगी कि जमानत पर विस्तृत बहस के लिए मामला आगे बढ़ाया जाए या नहीं।