17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली दंगे 2020: शरजील इमाम की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस को दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली दंगे 2020: शरजील इमाम की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस को दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दंगे साजिश मामले में वर्षों से हिरासत में बंद शरजील इमाम की जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब माँगा है। बचाव पक्ष की दलील है कि ट्रायल की धीमी रफ्तार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी के मद्देनज़र जमानत मिलनी चाहिए। अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2025 को शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
पुलिस को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया; मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को।
बचाव पक्ष की दो मुख्य दलीलें: सर्वोच्च न्यायालय के जमानत सिद्धांत और ट्रायल की अत्यंत धीमी गति।
सह-आरोपी तस्लीम अहमद को दिल्ली हाईकोर्ट से पहले ही अंतरिम जमानत मिल चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में एक वर्ष के भीतर ट्रायल पूरा करने या गवाही दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिस पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2025 को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष को भी पुलिस के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए समान अवधि दी है। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित की गई है।

जमानत याचिका के मुख्य आधार

शरजील इमाम के वकील अहमद इब्राहिम ने बताया कि जमानत की माँग मुख्यतः दो आधारों पर टिकी है। पहला आधार सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें जमानत के सिद्धांतों और लंबी हिरासत के मामलों में राहत देने के प्रावधानों की विस्तार से चर्चा की गई थी। वकील का तर्क है कि शरजील इमाम के मामले में भी वही सिद्धांत समान रूप से लागू होने चाहिए।

दूसरा आधार मुकदमे की अत्यंत धीमी रफ्तार है। वकील के अनुसार, ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही लंबे समय से व्यावहारिक रूप से ठप पड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट का जनवरी निर्देश और सह-आरोपी की मिसाल

सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी में निर्देश दिया था कि इस मामले में एक वर्ष के भीतर या तो ट्रायल पूरा किया जाए या संरक्षित गवाहों की गवाही दर्ज की जाए। वकील के अनुसार, इस निर्देश के बावजूद अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी मामले के सह-आरोपी तस्लीम अहमद को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल चुकी है और शरजील इमाम के मामले में भी समान न्यायिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब 2020 दिल्ली दंगे साजिश मामले में अनेक आरोपी वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं और ट्रायल की गति को लेकर अदालतें बार-बार चिंता जता चुकी हैं। गौरतलब है कि इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जो जमानत की प्रक्रिया को स्वाभाविक रूप से जटिल बनाते हैं।

आगे क्या होगा

दिल्ली पुलिस को अब निर्धारित समय-सीमा में अपना पक्ष हाईकोर्ट के समक्ष रखना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ता पक्ष को प्रत्युत्तर का अवसर मिलेगा। 27 अगस्त की सुनवाई में अदालत तय करेगी कि जमानत पर विस्तृत बहस के लिए मामला आगे बढ़ाया जाए या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

निचली अदालतों में क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों पर सवाल खड़े करता है। सह-आरोपी तस्लीम अहमद को मिली अंतरिम जमानत एक न्यायिक मिसाल बन गई है जिसे नज़रअंदाज़ करना हाईकोर्ट के लिए कठिन होगा। असली परीक्षा यह है कि क्या न्यायपालिका त्वरित सुनवाई के संवैधानिक अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के बीच संतुलन बना पाती है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या किया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2025 को शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
शरजील इमाम किस मामले में जेल में हैं?
शरजील इमाम 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में हिरासत में हैं। उन पर यूएपीए सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है और ट्रायल ट्रायल कोर्ट में लंबित है।
जमानत के लिए बचाव पक्ष ने क्या दलीलें दी हैं?
वकील अहमद इब्राहिम ने दो आधार रखे हैं: पहला, सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का हवाला जिसमें लंबी हिरासत के मामलों में जमानत के सिद्धांत तय किए गए हैं; दूसरा, ट्रायल की अत्यंत धीमी गति, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के जनवरी निर्देश के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
सह-आरोपी तस्लीम अहमद को जमानत कैसे मिली?
तस्लीम अहमद को दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है। बचाव पक्ष का तर्क है कि शरजील इमाम के मामले में भी समान न्यायिक सिद्धांत लागू होने चाहिए, क्योंकि दोनों एक ही मामले के सह-आरोपी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिए थे?
सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी में निर्देश दिया था कि एक वर्ष के भीतर या तो ट्रायल पूरा किया जाए या संरक्षित गवाहों की गवाही दर्ज की जाए। बचाव पक्ष के अनुसार, इस निर्देश के बावजूद अब तक मामले में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 22 घंटे पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले