दिल्ली दंगा साजिश: ताहिर हुसैन की जमानत अपील पर हाईकोर्ट ने पुलिस से माँगा जवाब, 16 जुलाई को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जून 2026 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत अपील पर दिल्ली पुलिस को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने अगली सुनवाई 16 जुलाई के लिए निर्धारित की है।
मामले की पृष्ठभूमि
ताहिर हुसैन पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज है। फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली के साम्प्रदायिक दंगों की जाँच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि इन दंगों के पीछे एक व्यापक साजिश रची गई थी। इसी जाँच के तहत हुसैन समेत कई आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और मुकदमे की कार्यवाही जारी है।
विशेष अदालत का आदेश और हाईकोर्ट में अपील
29 जनवरी को विशेष अदालत ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया उनके विरुद्ध गंभीर आरोपों की ओर संकेत करती है। इसके बाद हुसैन ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।
देरी माफी का आवेदन — मुख्य विवाद बिंदु
बुधवार की सुनवाई में हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उस आवेदन पर ध्यान केंद्रित किया जिसमें हुसैन ने अपील दाखिल करने में हुई 67 दिनों की देरी को माफ करने का अनुरोध किया है। हुसैन का तर्क है कि कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण निर्धारित समयसीमा के भीतर अपील दाखिल नहीं की जा सकी, अतः न्यायहित में देरी माफ की जाए।
पुलिस की भूमिका और अगला कदम
अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह देरी माफी के आवेदन पर अपना स्पष्ट पक्ष प्रस्तुत करे — यानी पुलिस को यह बताना होगा कि क्या वह इस माँग का विरोध करती है और यदि हाँ, तो किस आधार पर। गौरतलब है कि UAPA मामलों में जमानत मिलना पहले से ही कानूनी रूप से कठिन माना जाता है, क्योंकि इस अधिनियम के तहत जमानत के लिए कड़ी शर्तें निर्धारित हैं।
न्यायिक हिरासत और व्यापक संदर्भ
ताहिर हुसैन लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और इससे पहले भी विभिन्न मामलों में अदालतों का दरवाजा खटखटा चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली दंगा साजिश मामले में कई आरोपियों की जमानत अर्जियाँ अलग-अलग स्तरों पर विचाराधीन हैं। अब 16 जुलाई की सुनवाई में पुलिस के जवाब के बाद अदालत आगे की दिशा तय करेगी।