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शरजील इमाम की जमानत याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से माँगा जवाब, 27 अगस्त को अगली सुनवाई

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शरजील इमाम की जमानत याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से माँगा जवाब, 27 अगस्त को अगली सुनवाई

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दंगों के आरोपी शरजील इमाम की दूसरी जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। जनवरी 2020 से हिरासत में बंद इमाम की पहली याचिका सुप्रीम कोर्ट और सत्र न्यायालय दोनों ने खारिज की थी। अब 27 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
अगली सुनवाई 27 अगस्त को जस्टिस प्रतिभा एम.
सिंह व जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ के समक्ष होगी।
यह इमाम की दूसरी जमानत याचिका है; पहली 5 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने UAPA के तहत प्रथम दृष्टया मामला बताते हुए खारिज की थी।
4 जुलाई को सत्र न्यायालय ने भी जमानत अर्जी अस्वीकार कर दी थी।
इमाम जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं — लगभग साढ़े पाँच वर्ष से अधिक।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को 2020 दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया। यह शरजील इमाम की दूसरी जमानत याचिका है, जिसमें तर्क दिया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के छह महीने बाद भी मुकदमे में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है।

पूर्व न्यायिक प्रक्रिया

इमाम को जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं — यानी लगभग साढ़े पाँच वर्ष से अधिक समय से। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने 5 जनवरी को उनकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

इसके बाद इमाम ने सत्र न्यायालय में नई जमानत अर्जी दाखिल की, किंतु 4 जुलाई को निचली अदालत ने यह याचिका यह कहते हुए अस्वीकार कर दी कि यह इस चरण में सुनवाई योग्य नहीं है। उसी आदेश को चुनौती देते हुए इमाम ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है। शरजील इमाम और कई अन्य पर दंगे भड़काने की बड़ी साजिश रचने का आरोप है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि इमाम ने उकसावे वाले भाषण दिए जिनसे हिंसा को बढ़ावा मिला — हालाँकि बचाव पक्ष इन आरोपों को निराधार बताता रहा है।

आगे क्या होगा

दिल्ली पुलिस को अब हाईकोर्ट के समक्ष अपना जवाब दाखिल करना होगा। 27 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का निर्णय करेगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि दीर्घ विचाराधीन कारावास के आधार पर हाईकोर्ट जमानत पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जेल अपवाद', फिर भी UAPA मामलों में यह सिद्धांत उलटा दिखता है। दिल्ली हाईकोर्ट के सामने असली सवाल यह है कि क्या साढ़े पाँच वर्ष से अधिक की विचाराधीन हिरासत और मुकदमे में सुस्त प्रगति जमानत का आधार बनती है। यह फैसला केवल इमाम के लिए नहीं, बल्कि UAPA के तहत बंद दर्जनों अन्य आरोपियों के लिए भी एक मिसाल तय करेगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरजील इमाम कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
शरजील इमाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व शोध छात्र हैं, जिन्हें जनवरी 2020 में 2020 दिल्ली दंगों की साजिश और उकसावे वाले भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर UAPA सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका पर क्या किया?
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित की गई है।
शरजील इमाम की पिछली जमानत याचिकाओं का क्या हुआ?
सर्वोच्च न्यायालय ने 5 जनवरी को उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि UAPA के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसके बाद सत्र न्यायालय ने भी 4 जुलाई को नई अर्जी यह कहते हुए अस्वीकार कर दी कि यह इस चरण में सुनवाई योग्य नहीं है।
2020 दिल्ली दंगे किससे जुड़े हैं?
ये दंगे फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े हैं, जिसमें कई लोगों की जान गई और बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ।
आगे इस मामले में क्या होने की संभावना है?
दिल्ली पुलिस को हाईकोर्ट के समक्ष जवाब दाखिल करना होगा और 27 अगस्त को सुनवाई होगी। अदालत दीर्घ विचाराधीन हिरासत तथा मुकदमे की प्रगति के आधार पर जमानत पर निर्णय ले सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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