शरजील इमाम ने दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की, 17 जुलाई को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
2020 दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम ने 16 जुलाई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की, जिसमें कड़कड़डूमा कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसने उनकी पूर्व जमानत अर्जी को अस्वीकार कर दिया था। उच्च न्यायालय इस याचिका पर 17 जुलाई को सुनवाई करेगा। शरजील इमाम पिछले छह वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
शरजील इमाम की ओर से दाखिल याचिका में तर्क दिया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के छह महीने बीत जाने के बावजूद मामले की सुनवाई में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। इससे पहले 5 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने शरजील इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद दोनों की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दी थीं।
कड़कड़डूमा कोर्ट का रुख
इससे पूर्व कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएँ इस चरण में सुनवाई योग्य नहीं हैं। कोर्ट ने कहा था कि 5 जनवरी 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, दोनों आरोपी केवल दो स्थितियों में नए सिरे से जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं — या तो उस फैसले के एक वर्ष बाद, या अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज हो जाने के बाद। चूँकि इनमें से कोई भी शर्त अभी पूरी नहीं हुई थी, इसलिए कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी पेचीदगी
कड़कड़डूमा कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि जमानत से जुड़े कानूनी पहलू पर सर्वोच्च न्यायालय की दो पीठों की अलग-अलग राय सामने आई है। इस विरोधाभास को सुलझाने के लिए मामला सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ को पहले ही भेजा जा चुका है। जब तक बड़ी पीठ कोई निर्णय नहीं देती, तब तक निचली अदालतें इस विषय पर स्वतंत्र रूप से सुनवाई नहीं कर सकतीं।
पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले वर्षों से अदालतों में लंबित हैं। गौरतलब है कि शरजील इमाम और उमर खालिद दोनों ने कड़कड़डूमा कोर्ट में दूसरी बार जमानत अर्जी दाखिल की थी, जिसे भी अस्वीकार किया गया था। अब शरजील इमाम ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
आगे क्या होगा
दिल्ली उच्च न्यायालय 17 जुलाई को इस याचिका पर सुनवाई करेगा। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि उच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय की शर्तों की व्याख्या किस प्रकार करता है और बड़ी पीठ के लंबित फैसले के संदर्भ में याचिका पर क्या रुख अपनाता है।