क्या सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से किया इंकार?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से किया इंकार?

सारांश

दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया है। जानें, इस फैसले के पीछे की वजह और अन्य आरोपियों की जमानत के बारे में।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इंकार किया।
  • अन्य 5 आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दी गई।
  • उमर और शरजील एक वर्ष तक जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते।
  • दिल्ली दंगों में कई लोगों की मौत और 700 से अधिक घायल हुए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने गवाहियों के आधार पर निर्णय लिया।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इंकार कर दिया है, जबकि 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उमर और शरजील एक वर्ष तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं।

यह निर्णय जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को आरोपियों और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद के निरंतर कारावास को आवश्यक नहीं माना और उनकी जमानत मंजूर कर ली।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि एक वर्ष में गवाही पूरी नहीं होती है, तो आरोपी दोबारा जमानत याचिका निचली अदालत में दाखिल कर सकते हैं।

ज्ञात हो कि इससे पहले उमर खालिद की बहन के निकाह के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट ने खालिद को 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक की अंतरिम जमानत मंजूर की थी।

दालत ने अंतरिम रिहाई के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लागू की थीं, जिनमें उमर खालिद सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे, किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे और केवल परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबी दोस्तों से ही मिल सकेंगे। इसके साथ ही, उन्हें 29 दिसंबर की शाम तक सरेंडर करना था।

दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2020 में उमर खालिद को गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने फरवरी 2020 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रची थी। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। खालिद के साथ शरजील इमाम और कई अन्य लोगों पर भी इसी मामले में साजिशकर्ता होने का आरोप है।

दिल्ली दंगे में कई लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा की शुरुआत सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी, जहां कई स्थानों पर हालात बेकाबू हो गए थे।

पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (जो दिल्ली पुलिस का पक्ष रख रहे हैं) ने कहा था कि 2020 की हिंसा कोई अचानक हुई सांप्रदायिक झड़प नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करने के लिए सुविचारित, सुनियोजित और योजनाबद्ध षड्यंत्र था।

Point of View

तो एक वर्ष बाद आरोपी फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह निर्णय शायद उन लोगों के लिए एक संकेत है जो कानून के दायरे से बाहर जाकर हिंसा का सहारा लेते हैं।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत क्यों नहीं मिली?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे एक वर्ष तक जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं।
दिल्ली दंगों में कितने लोग घायल हुए थे?
दिल्ली दंगों में करीब 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
क्या अन्य आरोपियों को जमानत मिल गई?
हां, 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दी गई है।
उमर खालिद पर क्या आरोप हैं?
उमर खालिद पर आरोप है कि उसने फरवरी 2020 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रची थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला किस बेंच ने सुनाया?
यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने सुनाया।
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