एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026: भारत ने अंडर-23 में 2 गोल्ड व 1 सिल्वर, अंडर-19 में 2 सिल्वर जीते
सारांश
मुख्य बातें
जकार्ता में आयोजित एशियन अंडर-19 और अंडर-23 बॉक्सिंग चैंपियनशिप के पुरुष फाइनल में भारत ने 16 जुलाई को दमदार प्रदर्शन करते हुए अंडर-23 वर्ग में 2 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल अपने नाम किए, जबकि अंडर-19 वर्ग में 2 सिल्वर मेडल हासिल किए। इंडोनेशिया की मेज़बानी में हुई इस प्रतियोगिता में भारतीय मुक्केबाज़ों ने अपनी श्रेणी में एशिया के शीर्ष प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी।
अंडर-23 पुरुष फाइनल: दो गोल्ड की चमक
50 किलोग्राम वर्ग में विश्वनाथ सुरेश ने जापान के दाइची इवाई को 3:2 के करीबी मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक जीता। 55 किलोग्राम वर्ग में गंगा ने कजाकिस्तान के बेक्सुलतान बोरानबेक को 3:2 के स्प्लिट फैसले से शिकस्त देकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। दोनों मुकाबले अत्यंत कांटेदार रहे और भारतीय बॉक्सरों के तकनीकी कौशल का प्रमाण बने।
अंडर-23 में सिल्वर: वंशज का संघर्ष
65 किलोग्राम वर्ग में वंशज ने पूरे जज़्बे के साथ मुकाबला किया, लेकिन उज्बेकिस्तान के अनुभवी मुक्केबाज़ इल्खोमजोन एर्गाशेव ने 4:1 के फैसले से जीत दर्ज की। वंशज को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। गौरतलब है कि उज्बेकिस्तान एशियाई बॉक्सिंग में परंपरागत रूप से एक प्रमुख शक्ति रहा है।
अंडर-19 पुरुष फाइनल: सिल्वर तक सीमित रहा सफर
65 किलोग्राम वर्ग में आदित्य को उज्बेकिस्तान के एल्योर रुस्तमोव के हाथों 0:5 से हार झेलनी पड़ी। 90 किलोग्राम वर्ग में शुभम राजपूत भी उज्बेकिस्तान के असदबेक सुल्तानबोएव से 0:5 के एकतरफा मुकाबले में पराजित हुए। दोनों ही भारतीय खिलाड़ी रजत पदक लेकर लौटे।
महिला वर्ग में पहले ही मचाई थी धूम
यह ध्यान देने योग्य है कि इससे एक दिन पहले, बुधवार को, भारतीय महिला मुक्केबाज़ों ने जकार्ता में शानदार प्रदर्शन किया था। अंडर-19 और अंडर-23 महिला वर्ग को मिलाकर भारत ने कुल 5 गोल्ड, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल जीते थे। अंडर-19 में चंद्रिका भोरेस पुजारी (51 किलोग्राम) ने उज्बेकिस्तान की नाजोकत मारडोनोवा को 5:0 से और प्राची ने इंडोनेशिया की दिरा आर्टिका को हराकर स्वर्ण पदक जीते। अंडर-23 में निशा (54 किलोग्राम) ने जापान की कोइन कोकुफू को 5:0 से हराकर गोल्ड मेडल हासिल किया।
समग्र प्रदर्शन और आगे की राह
पुरुष और महिला वर्ग को मिलाकर इस चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। युवा मुक्केबाज़ों ने एशिया के कठिन प्रतिस्पर्धियों के सामने अपनी क्षमता साबित की है। यह प्रदर्शन भारतीय बॉक्सिंग के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देता है, विशेषकर आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की दृष्टि से।