16 जुलाई 2026
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एचएमटी भूमि विवाद: कुमारस्वामी का आरोप — 1999-2004 में कांग्रेस राज में 175 एकड़ निजी हाथों में गई

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एचएमटी भूमि विवाद: कुमारस्वामी का आरोप — 1999-2004 में कांग्रेस राज में 175 एकड़ निजी हाथों में गई

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने बेंगलुरु में एचएमटी की 175 एकड़ भूमि निजी हाथों में जाने का आरोप कांग्रेस सरकार पर लगाया। उन्होंने सीधे तौर पर CM शिवकुमार को जिम्मेदार ठहराया, जो 1999-2004 में शहरी विकास मंत्री थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 16 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में एचएमटी भूमि का निरीक्षण कर कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
कथित तौर पर 1999 से 2004 के बीच 175 एकड़ एचएमटी भूमि निजी हाथों में हस्तांतरित हुई।
उस दौर में वर्तमान CM डी.के.
शिवकुमार राज्य के शहरी विकास मंत्री थे — कुमारस्वामी ने उन पर सीधा निशाना साधा।
कुमारस्वामी ने दावा किया कि 2006 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एचएमटी भूमि हस्तांतरण पर रोक लगाई थी।
एचएमटी भूमि विवाद सर्वोच्च न्यायालय में लंबित; केंद्र की डीपीआर तैयार, पुनरुद्धार पैकेज प्रक्रियाधीन।
विवादित परिसरों में रहने वाले निवासियों को खाता और ई-खाता मिलने में कठिनाइयाँ जारी हैं।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 16 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) की भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण को लेकर कांग्रेस सरकार पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 1999 से 2004 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में करीब 175 एकड़ एचएमटी भूमि निजी हाथों में चली गई — और उस दौर में वर्तमान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार राज्य के शहरी विकास मंत्री थे।

निरीक्षण और जाँच का निर्देश

कुमारस्वामी ने बेंगलुरु में एचएमटी की विभिन्न भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया और इसके बाद अधिकारियों को कथित अनियमितताओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, 'रिपोर्ट मिलते ही उचित कार्रवाई की जाएगी और पूरे मामले की गहन जाँच शुरू की जाएगी।' निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक्विला हाइट्स, गोवियानु एरिटिस, प्रेस्टिज केंसिंग्टन गार्डन्स और केकेआर एएमआर रूबी अपार्टमेंट्स सहित कई आवासीय परिसरों का दौरा किया, जो कथित तौर पर एचएमटी की भूमि पर खड़े हैं।

शिवकुमार पर सीधा निशाना

कुमारस्वामी ने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा, 'जो व्यक्ति आज बिदादी टाउनशिप परियोजना को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहा है, वही 1999 से 2004 के बीच शहरी विकास मंत्री रहते हुए एचएमटी की बहुमूल्य जमीन निजी हाथों में जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।' उन्होंने नक्शे और दस्तावेज़ दिखाते हुए दावा किया कि उनके पास उन सभी लोगों का पूरा ब्यौरा है जिन्हें इन भूमि सौदों का लाभ मिला।

मिलीभगत के आरोप और जनता से सवाल

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि एचएमटी के कुछ पूर्व अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की मिलीभगत से यह भूमि निजी हाथों में गई। उन्होंने सवाल किया कि कर्नाटक सरकार इस कथित अतिक्रमित जमीन को वापस लेने के लिए तैयार है या नहीं। साथ ही उन्होंने पूर्व वन मंत्री ईश्वर खंड्रे को चुनौती दी कि यदि सरकार वाकई गंभीर है, तो ऊँची इमारतों से घिरी कथित एचएमटी भूमि को वापस लेकर दिखाए।

2006 में कुमारस्वामी ने लगाई थी रोक

पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने बताया कि 2006 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एचएमटी की भूमि के आगे किसी भी हस्तांतरण पर रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा, 'मैंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि एचएमटी की कोई अतिरिक्त जमीन न बेची जाए और न ही उसका पंजीकरण किया जाए। इसी फैसले की वजह से आज भी एचएमटी की बड़ी भूमि सुरक्षित बची हुई है।' उल्लेखनीय है कि विवादित भूखंडों पर बने अपार्टमेंट में रहने वाले निवासियों को खाता और ई-खाता प्राप्त करने में कठिनाइयाँ हो रही हैं — जिसे कुमारस्वामी ने अनियमितताओं का प्रमाण बताया।

एचएमटी पुनरुद्धार और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

कुमारस्वामी ने बताया कि केंद्र सरकार एचएमटी के पुनरुद्धार के लिए पैकेज तैयार कर रही है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में कुछ स्वार्थी तत्व बाधाएँ पैदा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसरो (ISRO) जैसे राष्ट्रीय संस्थानों को एचएमटी भूमि आवंटित किए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। एचएमटी भूमि विवाद फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, और कुमारस्वामी ने सभी पक्षों से इस सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के पुनरुद्धार में सहयोग करने की अपील की।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी विश्वसनीयता इस बात पर टिकी है कि वे जो 'नक्शे और दस्तावेज़' दिखाने का दावा करते हैं, वे सार्वजनिक जाँच में कितने खरे उतरते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि वे स्वयं 2004 से 2006 तक JD(S)-Congress गठबंधन सरकार के उपमुख्यमंत्री रहे — यानी उसी कालखंड के आखिरी दो वर्षों में। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद राजनीतिक बयानबाज़ी की यह तेज़ी बताती है कि असली लड़ाई कोर्ट से ज़्यादा जनमत में है। एचएमटी पुनरुद्धार की डीपीआर तैयार होने के बावजूद अगर भूमि विवाद अनसुलझा रहा, तो केंद्र की पुनरुद्धार योजना भी कागज़ों तक सिमटी रह सकती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एचएमटी भूमि विवाद क्या है और इसमें कितनी जमीन शामिल है?
यह बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) की करीब 175 एकड़ भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण से जुड़ा विवाद है। आरोप है कि 1999 से 2004 के बीच यह भूमि निजी हाथों में चली गई और अब वहाँ कई आवासीय परिसर खड़े हैं। मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
कुमारस्वामी ने CM शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए हैं?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि डी.के. शिवकुमार, जो 1999 से 2004 के बीच कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री थे, एचएमटी की बहुमूल्य जमीन निजी हाथों में जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने शिवकुमार का नाम लिए बिना यह बयान दिया, लेकिन संदर्भ स्पष्ट था।
क्या कुमारस्वामी ने खुद एचएमटी भूमि बचाने के लिए कोई कदम उठाया था?
कुमारस्वामी का दावा है कि 2006 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एचएमटी की किसी भी अतिरिक्त भूमि की बिक्री और पंजीकरण पर रोक लगा दी थी। उनके अनुसार इसी निर्देश की वजह से आज भी एचएमटी की बड़ी भूमि सुरक्षित है।
एचएमटी के पुनरुद्धार की क्या स्थिति है?
केंद्र सरकार एचएमटी के पुनरुद्धार के लिए एक पैकेज तैयार कर रही है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार हो चुकी है। कुमारस्वामी ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व इस प्रक्रिया में बाधाएँ डाल रहे हैं, और सभी पक्षों को सहयोग करना चाहिए।
विवादित अपार्टमेंट में रहने वाले निवासियों पर क्या असर पड़ा है?
कुमारस्वामी के अनुसार, एचएमटी की कथित भूमि पर बने अपार्टमेंट्स में रहने वाले कई लोगों को खाता और ई-खाता प्राप्त करने में कठिनाइयाँ हो रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये सौदे कानूनी थे, तो राज्य सरकार ने अब तक इन संपत्तियों को नियमित क्यों नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
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