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जौहर विश्वविद्यालय बुलडोजर विवाद: अखिलेश यादव बोले — 'भाजपा को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता दिखती है'

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जौहर विश्वविद्यालय बुलडोजर विवाद: अखिलेश यादव बोले — 'भाजपा को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता दिखती है'

सारांश

रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों पर विध्वंस नोटिस ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई आग लगा दी है। अखिलेश यादव ने BJP पर शिक्षा को सांप्रदायिक नज़रिए से देखने का आरोप लगाया, तो AIMIM ने सपा पर ही अल्पसंख्यकों को वोट बैंक मानने का पलटवार किया।

मुख्य बातें

रामपुर जिला प्रशासन ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित बताते हुए विध्वंस नोटिस जारी किया।
अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर BJP पर शिक्षा संस्थानों को सांप्रदायिक नज़रिए से देखने का आरोप लगाया।
यादव ने BJP के 'अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों' के कथित अवैध भवनों पर कार्रवाई न होने पर सवाल उठाया।
AIMIM के प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि सपा सरकार की खामियों का फायदा उठाकर BJP कार्रवाई कर रही है और अखिलेश यादव अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर मौन रहते हैं।
विश्वविद्यालय आज़म खान द्वारा स्थापित है; मामले में न्यायालय हस्तक्षेप की संभावना बनी हुई है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 16 जुलाई को रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल शिक्षा संस्थानों को भी सांप्रदायिक नज़रिए से देखता है। यह विवाद तब सुर्खियों में आया जब रामपुर जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत भवन नक्शे के निर्मित पाए जाने के बाद उन्हें ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया।

अखिलेश यादव का हमला

यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और रोज़गार — ये सब BJP के एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा संस्थानों को भी राजनीतिक और सांप्रदायिक दृष्टि से देख रही है।

यादव ने यह भी सवाल उठाया कि BJP के 'अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों' के कथित अवैध भवनों पर कार्रवाई कब होगी। उनका तर्क था कि जब सहयोगी संगठन पंजीकृत नहीं हैं, तो उनके भवन, कार्यालय और संस्थान कैसे वैध माने जा सकते हैं। सपा प्रमुख ने प्रस्तावित विध्वंस कार्रवाई को 'निंदनीय' करार दिया।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विश्वविद्यालय सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान द्वारा स्थापित किया गया था। प्रशासन के अनुसार, 40 में से 38 इमारतें बिना अनुमोदित भवन नक्शे के खड़ी की गई हैं, जिसके आधार पर विध्वंस नोटिस जारी किया गया। इस कदम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाइयाँ पहले से ही राजनीतिक विवाद का केंद्र रही हैं और सर्वोच्च न्यायालय भी इस मुद्दे पर दिशानिर्देश जारी कर चुका है।

एआईएमआईएम का दोहरा हमला

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस मामले में BJP सरकार के साथ-साथ समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय निर्माण के दौरान सपा सरकार द्वारा छोड़ी गई कथित खामियों का फायदा उठाकर वर्तमान BJP सरकार अब कार्रवाई कर रही है।

चौहान ने दावा किया कि यह सब अखिलेश यादव की मौन सहमति से हो रहा है और उन्होंने आरोप लगाया कि यादव ने कभी भी अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दों पर दृढ़ता से आवाज़ नहीं उठाई तथा मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया।

संस्थागत जवाबदेही का सवाल

AIMIM ने यह भी सवाल उठाया कि जिन सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में ये इमारतें बनीं, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। पार्टी ने विध्वंस नोटिस को अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षणिक संस्थान को निशाना बनाने की कोशिश बताया।

आगे क्या होगा

फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी — दोनों मोर्चों पर गरमाया हुआ है। यदि प्रशासन विध्वंस कार्रवाई आगे बढ़ाता है, तो इसे न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन AIMIM का यह सवाल भी उतना ही प्रासंगिक है कि सपा के शासनकाल में ये इमारतें बिना नक्शे के कैसे खड़ी होती रहीं। असली जवाबदेही उन अधिकारियों की है जिन्होंने निर्माण के दौरान आँखें मूँद लीं — और किसी भी दल ने अब तक उस सवाल का जवाब नहीं दिया।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जौहर विश्वविद्यालय को विध्वंस नोटिस क्यों मिला?
रामपुर जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत भवन नक्शे के निर्मित पाए जाने के आधार पर विध्वंस नोटिस जारी किया। यह विश्वविद्यालय सपा नेता आज़म खान द्वारा स्थापित किया गया था।
अखिलेश यादव ने इस मामले पर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर BJP पर आरोप लगाया कि वह शिक्षा संस्थानों को भी सांप्रदायिक नज़रिए से देखती है। उन्होंने प्रस्तावित कार्रवाई को निंदनीय बताया और BJP के सहयोगी संगठनों के कथित अवैध भवनों पर कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाया।
AIMIM ने इस विवाद में समाजवादी पार्टी पर क्या आरोप लगाए?
AIMIM के प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान छोड़ी गई खामियों का फायदा उठाकर BJP अब कार्रवाई कर रही है और यह सब अखिलेश यादव की मौन सहमति से हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यादव ने कभी अल्पसंख्यक अधिकारों पर मज़बूती से आवाज़ नहीं उठाई।
क्या जौहर विश्वविद्यालय की इमारतें वाकई अवैध हैं?
प्रशासन के अनुसार 40 में से 38 इमारतें बिना अनुमोदित भवन नक्शे के बनाई गई हैं। हालाँकि, AIMIM ने सवाल उठाया है कि निर्माण के समय मौजूद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही — यह मामला अभी कानूनी रूप से विवादित है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
यदि प्रशासन विध्वंस कार्रवाई आगे बढ़ाता है, तो इसे न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और मामला राजनीतिक व कानूनी — दोनों स्तरों पर गरमाया हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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