जौहर विश्वविद्यालय बुलडोजर विवाद: अखिलेश यादव बोले — 'भाजपा को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता दिखती है'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 16 जुलाई को रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल शिक्षा संस्थानों को भी सांप्रदायिक नज़रिए से देखता है। यह विवाद तब सुर्खियों में आया जब रामपुर जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत भवन नक्शे के निर्मित पाए जाने के बाद उन्हें ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया।
अखिलेश यादव का हमला
यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और रोज़गार — ये सब BJP के एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा संस्थानों को भी राजनीतिक और सांप्रदायिक दृष्टि से देख रही है।
यादव ने यह भी सवाल उठाया कि BJP के 'अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों' के कथित अवैध भवनों पर कार्रवाई कब होगी। उनका तर्क था कि जब सहयोगी संगठन पंजीकृत नहीं हैं, तो उनके भवन, कार्यालय और संस्थान कैसे वैध माने जा सकते हैं। सपा प्रमुख ने प्रस्तावित विध्वंस कार्रवाई को 'निंदनीय' करार दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विश्वविद्यालय सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान द्वारा स्थापित किया गया था। प्रशासन के अनुसार, 40 में से 38 इमारतें बिना अनुमोदित भवन नक्शे के खड़ी की गई हैं, जिसके आधार पर विध्वंस नोटिस जारी किया गया। इस कदम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाइयाँ पहले से ही राजनीतिक विवाद का केंद्र रही हैं और सर्वोच्च न्यायालय भी इस मुद्दे पर दिशानिर्देश जारी कर चुका है।
एआईएमआईएम का दोहरा हमला
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस मामले में BJP सरकार के साथ-साथ समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। पार्टी के प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय निर्माण के दौरान सपा सरकार द्वारा छोड़ी गई कथित खामियों का फायदा उठाकर वर्तमान BJP सरकार अब कार्रवाई कर रही है।
चौहान ने दावा किया कि यह सब अखिलेश यादव की मौन सहमति से हो रहा है और उन्होंने आरोप लगाया कि यादव ने कभी भी अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दों पर दृढ़ता से आवाज़ नहीं उठाई तथा मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया।
संस्थागत जवाबदेही का सवाल
AIMIM ने यह भी सवाल उठाया कि जिन सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में ये इमारतें बनीं, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। पार्टी ने विध्वंस नोटिस को अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षणिक संस्थान को निशाना बनाने की कोशिश बताया।
आगे क्या होगा
फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी — दोनों मोर्चों पर गरमाया हुआ है। यदि प्रशासन विध्वंस कार्रवाई आगे बढ़ाता है, तो इसे न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।