पारसी डेयरी फार्म का FSSAI लाइसेंस निलंबित: मुंबई FDA को मिलीं 100 साल पुरानी डेयरी में गंभीर खाद्य सुरक्षा खामियां
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने मुंबई के मरीन लाइंस स्थित करीब 100 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित पारसी डेयरी फार्म प्राइवेट लिमिटेड का एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। 14 जुलाई 2026 को हुए निरीक्षण में खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता से जुड़ी अनेक गंभीर अनियमितताएं उजागर होने के बाद 15 जुलाई 2026 को यह निलंबन आदेश जारी किया गया।
निरीक्षण और कार्रवाई का घटनाक्रम
एफडीए अधिकारियों ने 14 जुलाई 2026 को प्रिंसेस स्ट्रीट, मरीन लाइंस, कालबादेवी स्थित डेयरी परिसर का औचक निरीक्षण किया। जांच में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा फूड बिजनेस लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन रेगुलेशन, 2011 के कई प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर सहायक आयुक्त (खाद्य) एवं पदनिर्दिष्ट अधिकारी, परिमंडल-1 ने अगले ही दिन 15 जुलाई 2026 को लाइसेंस निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
मुख्य खामियां जो जांच में सामने आईं
एफडीए की जांच टीम को डेयरी परिसर में स्वच्छता और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई गंभीर कमियां मिलीं। कच्चे दूध की प्राप्ति के लिए सुरक्षित रॉ मिल्क रिसेप्शन डॉक का अभाव पाया गया। भंडारण और उत्पादन क्षेत्रों की दीवारों पर फफूंदी की मौजूदगी दर्ज की गई, तथा कच्चे माल को सीधे जमीन पर रखा जा रहा था।
परिसर में बड़ी संख्या में मक्खियां पाई गईं और कीट एवं चूहा नियंत्रण की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। इसके अतिरिक्त, परिसर में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) की अनुपस्थिति भी दर्ज की गई, जो पर्यावरण एवं स्वच्छता मानकों का उल्लंघन है।
कर्मचारी रिकॉर्ड और लेबलिंग में भी चूक
निरीक्षण के दौरान खाद्य कारोबार से जुड़े कर्मचारियों के मेडिकल रिकॉर्ड अधूरे पाए गए। कई कर्मचारियों के लिए अनिवार्य सुरक्षात्मक फुटवियर उपलब्ध नहीं था। परिवहन वाहनों की सफाई से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके अलावा, कुछ खाद्य उत्पादों पर अनिवार्य लेबलिंग जानकारी अंकित नहीं थी — जिसे खाद्य सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
एफडीए का रुख और आगे की राह
एफडीए ने स्पष्ट किया है कि जब तक पारसी डेयरी फार्म के प्रबंधन द्वारा सभी चिह्नित खामियों को दूर नहीं किया जाता और निर्धारित मानकों के अनुरूप सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक प्रतिष्ठान को पुनः संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभाग ने प्रबंधन को आवश्यक सुधार करने के लिखित निर्देश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि मुंबई की प्रतिष्ठित डेयरियों में शुमार पारसी डेयरी फार्म का इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है। इस कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन के प्रति एफडीए की जीरो-टॉलरेंस नीति के रूप में देखा जा रहा है — और यह संकेत है कि ब्रांड की विरासत और प्रतिष्ठा नियामकीय जांच से छूट नहीं दिलाती।