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एफएसएसएआई की सख्त चेतावनी: अखबार में खाना पैक या परोसना खतरनाक, फूड वेंडर्स को जारी हुए निर्देश

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एफएसएसएआई की सख्त चेतावनी: अखबार में खाना पैक या परोसना खतरनाक, फूड वेंडर्स को जारी हुए निर्देश

सारांश

एफएसएसएआई ने अखबार में खाना परोसने पर देशव्यापी रोक की पुष्टि की है — मुंबई में वड़ा-पाव विक्रेता पर कार्रवाई के बाद। प्रिंटिंग स्याही में लेड और विषैले रसायन गर्म खाने में घुल सकते हैं। स्ट्रीट वेंडर से लेकर क्लाउड किचन तक — सभी पर यह नियम लागू है।

मुख्य बातें

एफएसएसएआई ने 6 जून 2026 को देशभर के खाद्य विक्रेताओं को अखबार में खाना पैक या परोसने पर तत्काल रोक के निर्देश जारी किए।
मुंबई में एक वड़ा-पाव विक्रेता द्वारा अखबार में खाना परोसने की घटना के बाद एफएसएसएआई पश्चिमी क्षेत्र और एमसीजीएम ने संयुक्त कार्रवाई की।
अखबारी स्याही में लेड (सीसा) , हानिकारक पिगमेंट और रसायन होते हैं जो गर्म या तेलीय खाने में मिल सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) नियम, 2018 के तहत अखबार में खाना परोसना पहले से प्रतिबंधित है।
यह निर्देश स्ट्रीट वेंडर, रेस्तरां, क्लाउड किचन, कैटरर, हॉकर और मोबाइल फूड वेंडर सभी पर लागू है।
इससे पहले मई में एफएसएसएआई ने अस्वच्छता के आरोप में आईआरसीटीसी को भी कानूनी नोटिस जारी किया था।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 6 जून 2026 को देशभर के खाद्य विक्रेताओं और प्रतिष्ठानों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि खाना लपेटने या परोसने के लिए अखबारों का उपयोग तत्काल बंद किया जाए, क्योंकि इससे गंभीर स्वास्थ्य खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, यह निर्देश मुंबई की एक हालिया घटना के बाद जारी किए गए, जिसमें एक वड़ा-पाव विक्रेता को खाना पैक करने और परोसने के लिए अखबारों का इस्तेमाल करते पाया गया था।

मुंबई की घटना और संयुक्त कार्रवाई

इस मामले के सामने आने के बाद एफएसएसएआई के पश्चिमी क्षेत्र ने ग्रेटर मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की। दोनों संस्थाओं ने मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में अखबार में खाना परोसने की प्रथा पर रोक लगाने के लिए निर्देश जारी किए। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एफएसएसएआई ने इस विषय पर कार्रवाई की हो — लेकिन इस बार संयुक्त प्रवर्तन की गंभीरता पहले से अधिक है।

अखबारी स्याही से स्वास्थ्य को क्या खतरे हैं

एफएसएसएआई के अनुसार, अखबारों में उपयोग होने वाली प्रिंटिंग स्याही में हानिकारक रसायन, पिगमेंट, बाइंडर और लेड (सीसा) जैसी भारी धातुएं मौजूद होती हैं। जब यह स्याही गर्म या तेलीय खाद्य पदार्थों के संपर्क में आती है, तो ये विषैले तत्व सीधे खाने में घुल सकते हैं। इसके अतिरिक्त, वितरण और हैंडलिंग के दौरान अखबार अस्वच्छ वातावरण के संपर्क में आते हैं, जिससे उनमें रोगाणु पनप सकते हैं और भोजन से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

कानूनी प्रावधान और लागू नियम

एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) नियम, 2018 के तहत खाने को रखने, लपेटने या परोसने के लिए अखबारों या बिना मंजूरी वाली किसी भी सामग्री का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह सलाह सभी खाद्य व्यवसायों पर समान रूप से लागू होती है — जिनमें स्ट्रीट वेंडर, रेस्तरां, क्लाउड किचन, कैटरर, क्विक सर्विस रेस्तरां, हॉकर और मोबाइल फूड वेंडर शामिल हैं। सभी को केवल सुरक्षित और फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है।

उपभोक्ताओं से अपील

एफएसएसएआई ने आम उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने का आग्रह किया है। नागरिकों से कहा गया है कि वे अखबार में परोसे या लपेटे गए किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन न करें। नियामक और राज्य प्राधिकरण खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत निगरानी और प्रवर्तन जारी रखे हुए हैं।

पृष्ठभूमि: आईआरसीटीसी को भी मिल चुका है नोटिस

यह ऐसे समय में आया है जब एफएसएसएआई पहले से ही खाद्य स्वच्छता पर सख्त रुख अपना रहा है। इससे पहले मई में, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, नियामक ने ट्रेन संख्या 12223 लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी)-एर्नाकुलम (ईआरएस) दुरंतो एक्सप्रेस में बर्तनों को अस्वच्छ तरीके से संभालने के आरोप में भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) को कानूनी नोटिस जारी किया था। एफएसएसएआई ने संकेत दिया है कि खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के प्रति उसकी शून्य-सहिष्णुता नीति जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मुंबई जैसे महानगर में खुलेआम उल्लंघन हो रहे थे, जो प्रवर्तन की खामियों को उजागर करता है। असली सवाल यह है कि क्या यह निर्देश केवल कागज़ी कार्रवाई बनकर रह जाएगा, या ज़मीनी स्तर पर स्ट्रीट वेंडर्स को फूड-ग्रेड विकल्प सुलभ और सस्ते दाम पर मिलेंगे। छोटे विक्रेताओं के लिए वैकल्पिक पैकेजिंग की लागत एक बड़ी बाधा है, जिसे नीति में शामिल किए बिना अनुपालन सुनिश्चित करना कठिन होगा। आईआरसीटीसी नोटिस के बाद यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है — संकेत है कि एफएसएसएआई सार्वजनिक दबाव में सक्रिय होता है, न कि नियमित निगरानी से।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएसएसएआई ने अखबार में खाना पैक करने पर रोक क्यों लगाई है?
एफएसएसएआई के अनुसार, अखबारी प्रिंटिंग स्याही में लेड (सीसा), हानिकारक पिगमेंट और रसायन होते हैं जो गर्म या तेलीय खाने के संपर्क में आने पर उसमें घुल सकते हैं। इसके अलावा, अखबार वितरण के दौरान अस्वच्छ वातावरण के संपर्क में आते हैं जिससे रोगाणु खाने में मिल सकते हैं।
क्या अखबार में खाना परोसना भारत में कानूनी रूप से प्रतिबंधित है?
हाँ, खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) नियम, 2018 के तहत खाने को रखने, लपेटने या परोसने के लिए अखबारों या बिना मंजूरी वाली सामग्री का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। एफएसएसएआई ने इन मौजूदा नियमों को फिर से दोहराते हुए सभी खाद्य व्यवसायों को अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
यह निर्देश किन-किन खाद्य व्यवसायों पर लागू होता है?
यह निर्देश सभी खाद्य व्यवसायों पर लागू है — स्ट्रीट वेंडर, रेस्तरां, क्लाउड किचन, कैटरर, क्विक सर्विस रेस्तरां, हॉकर और मोबाइल फूड वेंडर सभी इसके दायरे में आते हैं। सभी को केवल सुरक्षित और फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है।
मुंबई में क्या घटना हुई जिसके बाद यह निर्देश जारी हुए?
मुंबई में एक वड़ा-पाव विक्रेता को खाना पैक करने और परोसने के लिए अखबारों का इस्तेमाल करते हुए पाया गया। इस घटना के बाद एफएसएसएआई के पश्चिमी क्षेत्र ने ग्रेटर मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की और देशव्यापी निर्देश जारी किए।
उपभोक्ता अपनी सुरक्षा के लिए क्या करें?
एफएसएसएआई ने उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे अखबार में परोसे या लपेटे गए किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन न करें और सतर्क रहें। यदि कोई विक्रेता अखबार में खाना परोस रहा हो, तो उसे अस्वीकार करें और संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सूचित करें।
राष्ट्र प्रेस
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