एफएसएसएआई का सख्त निर्देश: खाद्य पैकेजिंग में धातु पिन और तार तत्काल बंद करें
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 12 जून 2026 को सभी खाद्य व्यापार संचालकों (एफबीओ) को तत्काल प्रभाव से एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है — खाने-पीने के किसी भी उत्पाद की पैकेजिंग में धातु की पिन, स्टेपल पिन, तार या इसी प्रकार की अन्य सामग्री का उपयोग पूरी तरह बंद किया जाए। नियामक के अनुसार, ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें केक, मिठाई और खाने के पैकेटों में धातु के टुकड़े पाए गए, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।
क्या है पूरा मामला
एफएसएसएआई ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट किया कि सजावटी केक, केक बॉक्स, मिठाई के डिब्बे, स्नैक पाउच, टेकअवे फूड पार्सल और अन्य खाद्य पैकेजों को बंद करने या सुरक्षित रखने के लिए धातु के फास्टनर सामग्री का व्यापक उपयोग हो रहा है। नियामक ने कहा कि यह प्रवृत्ति उपभोक्ताओं को अनजाने में धातु के टुकड़े निगलने के जोखिम में डालती है, जिससे शारीरिक चोट और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
उपभोक्ताओं पर क्या असर
खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, धातु के टुकड़े निगलने से गले, आहार नली और पाचन तंत्र में गंभीर चोट लग सकती है। यह जोखिम बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से अधिक है। गौरतलब है कि बेकरी और मिठाई उद्योग में पैकेजिंग के लिए स्टेपल और धातु पिन का उपयोग वर्षों से एक अनौपचारिक चलन बना हुआ था, जिसे अब नियामक ने औपचारिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया है।
एफएसएसएआई का निर्देश और कानूनी प्रावधान
एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि इस निर्देश का पालन न करने वाले खाद्य व्यापार संचालकों के विरुद्ध 'खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006' और उसके तहत बने नियमों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा और किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।
खाद्य व्यापार संचालकों को क्या करना होगा
एफएसएसएआई ने सभी एफबीओ को निर्देश दिया है कि वे बेकरी उत्पाद, टेकअवे भोजन, स्नैक पैकेट, मिठाई के डिब्बे और अन्य सभी खाद्य पैकेजों को सील करने या बंद करने के लिए वैकल्पिक सुरक्षित सामग्री — जैसे खाद्य-ग्रेड चिपकने वाली टेप, कागज़ी सील या अन्य गैर-धातु विकल्प — अपनाएँ। नियामक का यह कदम खाद्य सुरक्षा मानकों को मज़बूत करने और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है।
आगे क्या होगा
एफएसएसएआई के इस निर्देश के बाद खाद्य नियामक की प्रवर्तन शाखाएँ बाज़ारों, बेकरी और मिठाई की दुकानों में जाँच तेज़ कर सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों को लेकर उपभोक्ता जागरूकता बढ़ रही है और नियामक अपनी निगरानी क्षमता को और धारदार बना रहा है।