एफएसएसएआई का बड़ा निर्देश: खाद्य कारोबारी अब जंग लगे चाकू-ब्लेड नहीं कर सकते इस्तेमाल, उल्लंघन पर जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 18 जून 2026 को देशभर के खाद्य कारोबारियों को अनिवार्य निर्देश जारी किए हैं, जिनमें स्पष्ट कहा गया है कि खाद्य पदार्थों की कटाई, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में केवल फूड-ग्रेड और जंग-रोधी चाकू, ब्लेड तथा अन्य काटने वाले उपकरणों का ही उपयोग किया जाए। यह कदम उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें पाया गया कि कुछ कारोबारी जंग लगे, टूटे-फूटे और पेंट किए हुए कटिंग टूल्स से खाना तैयार कर रहे हैं।
क्यों जारी हुआ यह निर्देश
एफएसएसएआई को मिली रिपोर्टों में सामने आया कि कई खाद्य प्रतिष्ठानों में जंग लगे, क्षतिग्रस्त, दरार वाले, पेंट किए हुए या अन्यथा अनुपयोगी कटिंग उपकरणों का खाना बनाने, काटने और पैकेजिंग में धड़ल्ले से उपयोग हो रहा था। नियामक के अनुसार, ऐसे उपकरण खाद्य उत्पादों में फिजिकल, केमिकल और माइक्रोबायोलॉजिकल कंटैमिनेशन का गंभीर खतरा पैदा करते हैं। गौरतलब है कि यह समस्या केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित नहीं है — प्रोसेसिंग इकाइयों में भी ऐसी खामियाँ देखी गई हैं।
कानूनी आधार और नियमों का उल्लंघन
एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया कि जंग लगे या क्षतिग्रस्त उपकरणों का उपयोग 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड बिजनेस की लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन) रेगुलेशंस, 2011' के शेड्यूल 4 में निर्धारित स्वच्छता मानकों का सीधा उल्लंघन है। मौजूदा नियमों के तहत, खाने के रखरखाव, तैयारी, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और भंडारण में उपयोग होने वाले सभी उपकरण, बर्तन और खाद्य-संपर्क सतहें फूड-ग्रेड, नॉन-टॉक्सिक और जंग-रोधी सामग्री से निर्मित होनी अनिवार्य हैं।
खाद्य कारोबारियों के लिए मुख्य निर्देश
एफएसएसएआई ने खाद्य व्यवसायों को निम्नलिखित कदम तत्काल उठाने के निर्देश दिए हैं:
पहला — सभी चाकू, ब्लेड और काटने वाले उपकरण अच्छी साफ-सफाई वाली हालत में रखे जाएँ और उनमें जंग, दरार, टुकड़ों का टूटना, पेंट या अन्य कोई दोष न हो। दूसरा — जहाँ आवश्यक हो, इन उपकरणों की नियमित सफाई, सैनिटाइजेशन और स्टरलाइजेशन सुनिश्चित की जाए। तीसरा — जंग लगे, क्षतिग्रस्त या अनुपयोगी उपकरणों को तुरंत हटाकर बदला जाए ताकि कंटैमिनेशन का जोखिम समाप्त हो सके।
उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई
एफएसएसएआई ने चेतावनी दी है कि इस एडवाइजरी का पालन न करने पर 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' के प्रावधानों के अंतर्गत जुर्माना लगाया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है और नियामक अपनी प्रवर्तन क्षमता को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
आगे क्या होगा
एफएसएसएआई के इस निर्देश के बाद राज्य स्तरीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा निरीक्षण अभियान तेज होने की संभावना है। खाद्य उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे और मध्यम खाद्य कारोबारियों को फूड-ग्रेड उपकरणों की उपलब्धता और लागत को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। नियामक से अपेक्षा है कि वह अनुपालन की समय-सीमा और सहायता तंत्र पर शीघ्र स्पष्टता प्रदान करे।