एफएसएसएआई का बड़ा एक्शन: ए.बी. एंटरप्राइज, जाइका ऑर्गेनिक्स और नारायणी फूड्स के लाइसेंस निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 13 अगस्त 2026 को तीन खाद्य व्यवसाय संचालकों — मेघालय की ए.बी. एंटरप्राइज, ओडिशा की जाइका ऑर्गेनिक्स (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड और नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज — के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए। नियामक के अनुसार, इन कंपनियों पर भ्रामक स्वास्थ्य दावे करने, अत्यंत खराब स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन के आरोप सिद्ध हुए, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को सीधा खतरा था।
ए.बी. एंटरप्राइज: भ्रामक दावे और बिना स्वीकृति कारोबार
मेघालय स्थित ए.बी. एंटरप्राइज के विरुद्ध जांच में पाया गया कि कंपनी अपने उत्पादों के लेबल और प्रचार सामग्री पर स्वास्थ्य लाभ से संबंधित ऐसे दावे कर रही थी, जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018 का सीधा उल्लंघन हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनी अपने एफएसएसएआई लाइसेंस में दर्ज आवश्यक विनिर्माण स्वीकृति के बिना खाद्य उत्पादों का कारोबार कर रही थी।
एफएसएसएआई ने बताया कि कंपनी को पहले सुधार नोटिस जारी किया गया था और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया था। हालांकि, कंपनी की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। नियामक ने स्पष्ट किया कि ऐसे भ्रामक दावे उपभोक्ताओं के खरीद व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं और उन्हें गुमराह कर सकते हैं। कंपनी को अगले आदेश तक सभी खाद्य कारोबार गतिविधियाँ रोकने का निर्देश दिया गया है।
जाइका ऑर्गेनिक्स: अनुपालन में मात्र 12 प्रतिशत अंक
ओडिशा की जाइका ऑर्गेनिक्स (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के संयंत्र में निरीक्षण के दौरान व्यापक स्वच्छता और सैनिटेशन संबंधी कमियाँ उजागर हुईं। खाद्य उत्पादों का निर्माण, पैकेजिंग और भंडारण अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था।
निरीक्षण में खराब हाउसकीपिंग, कीट नियंत्रण में विफलता, जंग लगे उपकरण, कच्चे माल और तैयार उत्पादों का अनुचित भंडारण तथा उत्पादन प्रक्रियाओं में आवश्यक नियंत्रण का अभाव पाया गया। कुछ उत्पादों पर निर्माण तिथि, बैच नंबर और उपयोग की अंतिम तिथि जैसी अनिवार्य जानकारियाँ भी अंकित नहीं थीं। अनुपालन मूल्यांकन में कंपनी को 90 में से केवल 10 अंक यानी 12 प्रतिशत प्राप्त हुए, जो इसे 'नॉन-कम्प्लायंस' श्रेणी में रखता है।
एफएसएसएआई के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक और जैविक जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सीधा खतरा हैं।
नारायणी फूड्स: मक्खियाँ, जंग और रिकॉर्ड का अभाव
नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज के उत्पादन परिसर में निरीक्षण के दौरान अत्यंत खराब स्वच्छता व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली में गंभीर कमियाँ सामने आईं। प्रसंस्करण और भंडारण क्षेत्रों में मक्खियाँ, मकड़ी के जाले, कीटों के प्रवेश मार्ग, जल स्रोतों के आसपास शैवाल की मौजूदगी, जंग लगे उपकरण और खाद्य सामग्री के पास कचरे का जमाव पाया गया।
तैयार उत्पादों का भंडारण भी मानकों के अनुरूप नहीं था। खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड और नियंत्रण नमूनों के दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे। अनुपालन मूल्यांकन में कंपनी को 80 में से केवल 20 अंक यानी 25 प्रतिशत स्कोर मिला, जो इसे भी 'नॉन-कम्प्लायंस' श्रेणी में रखता है।
एफएसएसएआई का कड़ा संदेश
एफएसएसएआई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इन कार्रवाइयों की जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नियामक ने चेतावनी दी कि मानकों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों के विरुद्ध सख्त नियामकीय कार्रवाई जारी रहेगी। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब देशभर में खाद्य मिलावट और भ्रामक लेबलिंग के मामलों पर नियामकीय निगरानी तेज हो रही है।