FSSAI ने खाद्य लेबलिंग और विज्ञापन नियमों पर FBO के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 14 अगस्त 2026 को खाद्य कारोबार संचालकों (FBO) के लिए पैकेज्ड खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, डिस्प्ले, विज्ञापन और दावों से संबंधित नियमों पर एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सर्वोच्च न्यायालय फ्रंट-ऑफ-पैक पोषण चेतावनी लेबल की देरी पर केंद्र सरकार और FSSAI से सवाल कर चुका है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का स्वरूप
FSSAI ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 'अंडरस्टैंडिंग लेबलिंग, डिस्प्ले, एडवरटाइज़िंग एंड क्लेम्स रेगुलेशंस' विषय पर आयोजित इस सत्र में खाद्य उद्योग के बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्राधिकरण के अनुसार, उद्योग की यह सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि खाद्य कंपनियाँ लेबलिंग और विज्ञापन अनुपालन को लेकर अधिक सजग हो रही हैं।
गौरतलब है कि FSSAI पहले से ही देशभर में खाद्य सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन पर FBO के विरुद्ध लगातार कार्रवाई करता रहा है। यह प्रशिक्षण उसी व्यापक अनुपालन अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग की बढ़ती माँग
यह प्रशिक्षण ऐसे दौर में आया है जब अधिक चीनी, नमक और संतृप्त वसा वाले पैकेज्ड उत्पादों पर स्पष्ट पोषण चेतावनी लेबल लगाने की माँग तेज़ हो रही है। उपभोक्ता संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पैकेजिंग के अग्र भाग पर सुस्पष्ट चेतावनी से आम उपभोक्ता को स्वस्थ विकल्प चुनने में सहायता मिलेगी।
सर्वोच्च न्यायालय की चिंता और सरकार का रुख
न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पहले की सुनवाई में केंद्र सरकार से पूछा था कि मज़बूत पोषण चेतावनी प्रणाली लागू करने की दिशा में अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य के मामले में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
अदालत ने उन तर्कों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि कड़े वार्निंग लेबल से खाद्य उत्पाद निर्माताओं के व्यावसायिक हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतिम निर्णय उपभोक्ता का होता है और व्यावसायिक हितों को सार्वजनिक स्वास्थ्य से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
एक पूर्व सुनवाई में केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चेतावनी प्रणाली लागू करने में व्यावहारिक चुनौतियों का हवाला दिया था, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार करते हुए कहा कि भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा में देरी के लिए विदेशी मानकों का बहाना नहीं बना सकता।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित लेबलिंग ढाँचे का पूरा विवरण माँगा है और जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि ठोस प्रगति नहीं दिखाई गई तो वह आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है। FSSAI का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उस दबाव के बीच खाद्य उद्योग को अनुपालन के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।