FSSAI का बड़ा प्रस्ताव: नमक, चीनी, वसा वाले पैकेज्ड खाने पर लगेगा लाल हेक्सागन चेतावनी लेबल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 23 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे के ज़रिये पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग (FOPL) लागू करने का प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत अधिक नमक, चीनी या वसा वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के पैकेट के सामने सफेद पृष्ठभूमि पर लाल हेक्सागन (षट्कोणीय) चेतावनी चिन्ह लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। यह कदम उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय त्वरित और सरल पोषण-संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत पहल है।
प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय ने खाद्य नियामक और सरकार से फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लागू करने की समयसीमा पर स्पष्ट जानकारी माँगी थी, जिसके जवाब में FSSAI ने यह हलफनामा दाखिल किया। गौरतलब है कि भारत में पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर पोषण संबंधी चेतावनी लेबलिंग का मुद्दा वर्षों से लंबित था और इस पर उद्योग जगत व स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच मतभेद रहे हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ — जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा — तेज़ी से बढ़ रही हैं।
चेतावनी लेबल कैसे काम करेगा
प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी पैकेज्ड खाद्य उत्पाद में नमक, चीनी या वसा में से कोई भी एक पोषक तत्व निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाता है, तो उस उत्पाद के पैकेट पर लाल हेक्सागन चेतावनी चिन्ह प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इस चिन्ह के भीतर संबंधित पोषक तत्व का नाम स्पष्ट रूप से अंकित किया जाएगा।
यदि किसी उत्पाद में दो या तीनों पोषक तत्व एक साथ निर्धारित सीमा से अधिक हों, तो सभी संबंधित पोषक तत्वों का उल्लेख उसी एकल चेतावनी चिन्ह के भीतर किया जाएगा। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल एकाधिक उल्लंघनों तक सीमित नहीं है — एकल पोषक तत्व की सीमा पार करने पर भी चेतावनी लेबल लागू होगा।
कनाडा मॉडल से प्रेरणा
FSSAI के अनुसार, प्रस्तावित चेतावनी प्रारूप कुछ हद तक कनाडा में लागू मॉडल से प्रेरित है। इसका उद्देश्य उन पोषक तत्वों को उजागर करना है जिनका अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकता है। नियामक का कहना है कि यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने की ओर तत्काल और आसानी से समझ आने वाली पोषण-प्रोफाइल जानकारी देगी, जिससे वे अधिक सूचित खाद्य विकल्प चुन सकेंगे।
लागू करने की प्रक्रिया और समयसीमा
FSSAI ने संकेत दिया है कि FOPL को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के बजाय एक ही चरण में लागू करने की योजना है। हालाँकि नियमों को अंतिम रूप देने से पहले उद्योग जगत और आम जनता से व्यापक परामर्श किया जाएगा। प्राधिकरण के अनुसार, परामर्श प्रक्रिया पूरी होने और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आवश्यक नियामकीय प्रक्रियाओं के बाद मसौदा नियमों को जारी और अंतिम रूप देने में लगभग चार महीने का समय लग सकता है।
आम उपभोक्ता पर असर
यह प्रस्ताव लागू होने पर करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों पर सीधा असर पड़ सकता है। बिस्कुट, चिप्स, नमकीन, शीतल पेय, प्रसंस्कृत स्नैक्स और रेडी-टु-ईट खाद्य पदार्थों सहित बड़ी संख्या में उत्पाद इस चेतावनी प्रणाली के दायरे में आ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एफओपीएल जैसी व्यवस्थाएँ उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने और खाद्य उद्योग को स्वास्थ्यकर उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध होती हैं। आगे देखना होगा कि परामर्श प्रक्रिया में उद्योग जगत किस हद तक इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है और अंतिम नियमों का स्वरूप क्या होता है।