स्कूलों में जंक फूड पर एफएसएसएआई की नई सख्ती: वसा, चीनी और नमक की तय होंगी सीमाएं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 11 अगस्त 2026 को स्कूलों में बच्चों को परोसे और बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों पर अंकुश लगाने के लिए नए मात्रात्मक मानकों का प्रस्ताव रखा है। भारत के राजपत्र में प्रकाशित मसौदा अधिसूचना के अनुसार, अतिरिक्त वसा, चीनी और सोडियम की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा वाले खाद्य उत्पादों को 'उच्च जोखिम' श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा। यह कदम बच्चों में बढ़ती मोटापे और जीवनशैली संबंधी बीमारियों की चिंता के बीच उठाया गया है।
मसौदे में क्या है प्रस्ताव
एफएसएसएआई ने 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार) विनियम, 2020' में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इस मसौदे का आधार भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी 'डायटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस-2024' है, जो स्वस्थ पोषण के लिए वैज्ञानिक मानदंड निर्धारित करती है।
वसा, चीनी और नमक की तय सीमाएं
प्रस्तावित मानकों के अनुसार, यदि किसी ठोस खाद्य पदार्थ में प्रति 100 ग्राम में 4.2 ग्राम से अधिक अतिरिक्त वसा हो, तो उसे 'हाई फैट' श्रेणी में रखा जाएगा। तरल उत्पादों के लिए यह सीमा 1.5 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर निर्धारित की गई है।
अतिरिक्त चीनी के मामले में ठोस उत्पादों के लिए सीमा 3 ग्राम प्रति 100 ग्राम और तरल उत्पादों के लिए 2 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर तय की गई है — इससे अधिक वाले उत्पाद 'हाई शुगर' कहलाएंगे। नमक के संदर्भ में, ठोस खाद्य पदार्थों में 0.625 ग्राम प्रति 100 ग्राम और तरल उत्पादों में 0.175 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर से अधिक सोडियम होने पर उन्हें 'हाई सोडियम' वर्ग में रखा जाएगा।
निगरानी और क्रियान्वयन
नए प्रावधान को स्कूलों में निगरानी और निरीक्षण से जुड़े मौजूदा नियमों के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे स्कूल परिसरों में उपलब्ध खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और पोषण स्तर का बेहतर मूल्यांकन संभव हो सकेगा। एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि ये मसौदा नियम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत तैयार किए गए हैं और इन्हें केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त है।
जनता और हितधारकों से सुझाव आमंत्रित
खाद्य नियामक ने इस मसौदे पर आम जनता, खाद्य उद्योग, स्कूलों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। अधिसूचना के सार्वजनिक होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर सुझाव भेजे जा सकते हैं। प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार के बाद ही अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में बच्चों में मोटापे की दर चिंताजनक रूप से बढ़ रही है और स्कूल कैंटीन में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की उपलब्धता एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बनती जा रही है।