11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

स्कूलों में जंक फूड पर एफएसएसएआई की नई सख्ती: वसा, चीनी और नमक की तय होंगी सीमाएं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
स्कूलों में जंक फूड पर एफएसएसएआई की नई सख्ती: वसा, चीनी और नमक की तय होंगी सीमाएं

सारांश

एफएसएसएआई ने स्कूलों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के लिए वसा, चीनी और नमक की स्पष्ट सीमाएं प्रस्तावित की हैं — आईसीएमआर की 2024 गाइडलाइंस पर आधारित यह मसौदा बच्चों के पोषण को लेकर देश की सबसे ठोस नियामक पहल मानी जा रही है। 60 दिनों में जनता की राय ली जाएगी।

मुख्य बातें

एफएसएसएआई ने स्कूलों में खाद्य पदार्थों के लिए वसा, चीनी और नमक की मात्रात्मक सीमाएं निर्धारित करने का मसौदा भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया।
ठोस खाद्य पदार्थों में 4.2 ग्राम/100 ग्राम से अधिक वसा, 3 ग्राम/100 ग्राम से अधिक चीनी और 0.625 ग्राम/100 ग्राम से अधिक नमक होने पर उत्पाद उच्च जोखिम श्रेणी में आएगा।
मसौदा आईसीएमआर की डायटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस-2024 पर आधारित है और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त है।
जनता, खाद्य उद्योग और स्कूल अधिसूचना प्रकाशन की तारीख से 60 दिनों के भीतर सुझाव दे सकते हैं।
अंतिम नियम सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार के बाद ही अधिसूचित होंगे।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 11 अगस्त 2026 को स्कूलों में बच्चों को परोसे और बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों पर अंकुश लगाने के लिए नए मात्रात्मक मानकों का प्रस्ताव रखा है। भारत के राजपत्र में प्रकाशित मसौदा अधिसूचना के अनुसार, अतिरिक्त वसा, चीनी और सोडियम की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा वाले खाद्य उत्पादों को 'उच्च जोखिम' श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा। यह कदम बच्चों में बढ़ती मोटापे और जीवनशैली संबंधी बीमारियों की चिंता के बीच उठाया गया है।

मसौदे में क्या है प्रस्ताव

एफएसएसएआई ने 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार) विनियम, 2020' में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इस मसौदे का आधार भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी 'डायटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस-2024' है, जो स्वस्थ पोषण के लिए वैज्ञानिक मानदंड निर्धारित करती है।

वसा, चीनी और नमक की तय सीमाएं

प्रस्तावित मानकों के अनुसार, यदि किसी ठोस खाद्य पदार्थ में प्रति 100 ग्राम में 4.2 ग्राम से अधिक अतिरिक्त वसा हो, तो उसे 'हाई फैट' श्रेणी में रखा जाएगा। तरल उत्पादों के लिए यह सीमा 1.5 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर निर्धारित की गई है।

अतिरिक्त चीनी के मामले में ठोस उत्पादों के लिए सीमा 3 ग्राम प्रति 100 ग्राम और तरल उत्पादों के लिए 2 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर तय की गई है — इससे अधिक वाले उत्पाद 'हाई शुगर' कहलाएंगे। नमक के संदर्भ में, ठोस खाद्य पदार्थों में 0.625 ग्राम प्रति 100 ग्राम और तरल उत्पादों में 0.175 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर से अधिक सोडियम होने पर उन्हें 'हाई सोडियम' वर्ग में रखा जाएगा।

निगरानी और क्रियान्वयन

नए प्रावधान को स्कूलों में निगरानी और निरीक्षण से जुड़े मौजूदा नियमों के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे स्कूल परिसरों में उपलब्ध खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और पोषण स्तर का बेहतर मूल्यांकन संभव हो सकेगा। एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि ये मसौदा नियम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत तैयार किए गए हैं और इन्हें केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त है।

जनता और हितधारकों से सुझाव आमंत्रित

खाद्य नियामक ने इस मसौदे पर आम जनता, खाद्य उद्योग, स्कूलों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। अधिसूचना के सार्वजनिक होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर सुझाव भेजे जा सकते हैं। प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार के बाद ही अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में बच्चों में मोटापे की दर चिंताजनक रूप से बढ़ रही है और स्कूल कैंटीन में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की उपलब्धता एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — स्कूल कैंटीन और आसपास की दुकानों पर निगरानी की व्यवस्था अभी भी कमज़ोर बनी हुई है। 2020 के विनियम छह साल बाद भी धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं, जो यह सवाल उठाता है कि नए संशोधन की नियति अलग क्यों होगी। आईसीएमआर की गाइडलाइंस को आधार बनाना वैज्ञानिक दृष्टि से सराहनीय है, लेकिन खाद्य उद्योग के दबाव में सीमाएं कितनी कड़ी रहेंगी, यह 60-दिवसीय सार्वजनिक परामर्श के बाद स्पष्ट होगा। बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नियम बनाना पर्याप्त नहीं — उनके पालन की जवाबदेही तय करना ज़रूरी है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएसएसएआई ने स्कूलों में खाद्य पदार्थों के लिए क्या नए नियम प्रस्तावित किए हैं?
एफएसएसएआई ने स्कूलों में बिकने वाले खाद्य उत्पादों में वसा, चीनी और नमक की अधिकतम सीमाएं तय करने का मसौदा प्रस्तुत किया है। ठोस खाद्य पदार्थों में 4.2 ग्राम/100 ग्राम से अधिक वसा, 3 ग्राम/100 ग्राम से अधिक चीनी और 0.625 ग्राम/100 ग्राम से अधिक नमक वाले उत्पादों को उच्च जोखिम श्रेणी में रखा जाएगा।
यह मसौदा किस कानून और दिशानिर्देश पर आधारित है?
यह मसौदा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के प्रावधानों के तहत तैयार किया गया है और आईसीएमआर की 'डायटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस-2024' को इसका वैज्ञानिक आधार बनाया गया है। इसे केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति भी प्राप्त है।
इन नियमों पर सुझाव कब तक दिए जा सकते हैं?
अधिसूचना के भारत के राजपत्र में सार्वजनिक होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर आम जनता, खाद्य उद्योग, स्कूल और अन्य हितधारक अपने सुझाव और आपत्तियां एफएसएसएआई को भेज सकते हैं। इसके बाद ही अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।
तरल खाद्य पदार्थों के लिए क्या सीमाएं प्रस्तावित हैं?
तरल उत्पादों के लिए वसा की सीमा 1.5 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर, चीनी की सीमा 2 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर और नमक की सीमा 0.175 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर प्रस्तावित की गई है। इन सीमाओं से अधिक मात्रा वाले पेय पदार्थ क्रमशः 'हाई फैट', 'हाई शुगर' या 'हाई सोडियम' श्रेणी में आएंगे।
इन नियमों का स्कूलों और बच्चों पर क्या असर होगा?
लागू होने पर इन नियमों के तहत स्कूल परिसरों में उपलब्ध खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और पोषण स्तर की नियमित निगरानी और निरीक्षण अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य बच्चों में मोटापे, मधुमेह और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों की बढ़ती दर पर अंकुश लगाना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले