मणिपुर CM खेमचंद सिंह का ऐलान: महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को मिलेगी विशेष वित्तीय सहायता
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 25 सितंबर 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार मेइती समाज के प्रमुख त्योहार 'निंगोल चाकौबा-2026' से पहले महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए एक विशेष वित्तीय सहायता योजना लागू करेगी। इस योजना का उद्देश्य उन महिलाओं को आर्थिक बल देना है जो अपने परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए फुटकर व्यापार पर निर्भर हैं।
कार्यक्रम और घोषणा का संदर्भ
मुख्यमंत्री बिश्नुपुर जिले के मोइरांग स्थित आईएनए शहीद स्मारक परिसर में आयोजित 'सेवा संकल्प अभियान' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि यह एक माह का अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य जनसेवा और सुशासन की भावना को और सुदृढ़ करना है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 25 से अधिक सेवा काउंटरों और स्टॉलों का निरीक्षण किया और विभिन्न सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को लाभ वितरित किए।
पंजीकरण प्रक्रिया और पात्रता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन महिला विक्रेताओं ने अब तक अपना पंजीकरण नहीं कराया है, वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के विधायकों (एमएलए) के माध्यम से पंजीकरण करा सकती हैं। यह व्यवस्था योजना के क्रियान्वयन को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से की गई है। गौरतलब है कि राज्य में जारी अशांति के बीच यह कदम महिलाओं की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।
जातीय हिंसा का आर्थिक असर
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि 2023 से जारी जातीय हिंसा ने राज्य की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुँचाई है। बार-बार होने वाले बंद और नाकेबंदी के कारण राज्य सरकार को प्रतिदिन लगभग ₹25 से ₹30 करोड़ के कर राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस हिंसा से जीएसटी राजस्व संग्रह भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पिछले तीन वर्षों से मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष से जूझ रहा है, जिसने हज़ारों परिवारों को विस्थापित किया है और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को ठप कर दिया है।
परिवारों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में संपन्न मणिपुर विधानसभा के आठवें सत्र में विचार-विमर्श के बाद राज्य सरकार ने करीब 3,00,050 परिवारों को ₹10,000 प्रति परिवार की वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इसके लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान पहले ही कर लिए गए हैं।
शांति और सद्भाव की अपील
खेमचंद सिंह ने कहा कि संकट के बाद विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास की खाई काफी हद तक कम हुई है और कई क्षेत्रों में लोग पुनः शांति और सौहार्द के साथ रहने लगे हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि मतभेदों का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए और ऐसे आंदोलनों से बचा जाए जो आम जनजीवन को बाधित करते हैं। राज्य की एकता और अखंडता को बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई। आने वाले समय में इन घोषणाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही यह तय करेगा कि संकटग्रस्त परिवारों तक राहत वास्तव में पहुँच पाती है या नहीं।