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प्रतुल शाह देव का कांग्रेस पर पलटवार: 'संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना दुर्भाग्यपूर्ण'

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प्रतुल शाह देव का कांग्रेस पर पलटवार: 'संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना दुर्भाग्यपूर्ण'

सारांश

चुनाव आयोग में कथित अंदरूनी मतभेद की रिपोर्टों पर मचे सियासी घमासान में BJP ने कांग्रेस के इतिहास का आईना दिखाया — राजीव गांधी से नवीन चावला तक। प्रतुल शाह देव का सीधा सवाल: एक भी दस्तावेज़ दिखाइए।

मुख्य बातें

BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने 25 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग विवाद पर विपक्ष को 'नैरेटिव निर्माण' का दोषी ठहराया।
शाह देव ने कहा कि चुनाव आयोग के सभी आधिकारिक फैसले सर्वसम्मति से हुए — किसी आयुक्त ने कोई असहमति नोट दर्ज नहीं कराया।
कांग्रेस काल के उदाहरण: टीएन शेषन , नवीन चावला की विवादास्पद नियुक्ति ( 2009 ), और एमएस गिल को पद के बाद मंत्री बनाया जाना।
2006 में चावला के ट्रस्ट को कांग्रेस सांसदों ने ₹85 लाख देने का आरोप लगाया गया।
पूर्व DGP एसपी वैद ने PM मोदी से 140 करोड़ लोगों की ताकत का भरोसा रखते हुए 'बाहरी टूलकिट' से न डरने की अपील की।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने 25 सितंबर 2026 को रांची में चुनाव आयोग पर उठ रहे विपक्षी सवालों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राजनीति करना और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना दो अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और फैसलों में वोटिंग की मीडिया रिपोर्टों को 'बेबुनियाद नैरेटिव' करार दिया।

मुख्य आरोप और BJP का जवाब

शाह देव ने सवाल उठाया कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच वास्तव में मतभेद होते, तो क्या किसी आयुक्त ने कोई 'असहमति नोट' दर्ज कराया? उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग की तमाम आधिकारिक प्रेस रिलीज़ देख लीजिए — सब एकमत हैं। हाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मुख्य आयुक्त और दोनों आयुक्त एक साथ मौजूद थे।' उन्होंने यह भी कहा कि 'एक चुनाव आयुक्त का कोट दिखा दीजिए, एक भी दस्तावेज़ दिखाइए।'

कांग्रेस काल का ऐतिहासिक संदर्भ

शाह देव ने कांग्रेस के शासनकाल के कई उदाहरण गिनाए। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का हवाला देते हुए कहा कि शेषन ने स्वयं बताया था कि जब वे कैबिनेट सचिव थे, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सीधे निर्देश देते थे कि चुनाव आयुक्त को फलाँ तारीखों पर चुनाव कराने को कह दो। उन्होंने यह दावा करते हुए कहा कि इसका वीडियो भी उपलब्ध है।

शाह देव ने नवीन चावला का भी जिक्र किया, जिन्हें 2005 में चुनाव आयोग में नियुक्त किया गया था। उनके अनुसार, 2006 में चावला के परिवार के एक ट्रस्ट को कांग्रेस के सांसदों — जिनमें गोयनका और अंबिका सोनी का नाम शामिल है — ने ₹85 लाख दिए थे। 2009 में जब चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने की प्रक्रिया चल रही थी, तब तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी, परंतु सोनिया गांधी की सरकार ने उनकी नियुक्ति की।

उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का उदाहरण भी दिया, जिन्हें पद से हटने के बाद कांग्रेस ने पहले सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री बनाया। शाह देव ने कहा कि शेषन की शक्तियों को सीमित करने के लिए दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए थे और बाद में कांग्रेस ने शेषन को ही अहमदाबाद से लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ अपना चुनाव चिह्न देकर उतार दिया था।

मीडिया रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल

BJP प्रवक्ता ने उस मीडिया रिपोर्ट की भी आलोचना की, जिसके आधार पर यह विवाद खड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि उसी अखबार ने 2012 में यह भी रिपोर्ट किया था कि आर्मी आगरा से निकलकर दिल्ली पर कब्जा करने चली थी — जो एक निराधार दावा था। उनके अनुसार, ऐसी रिपोर्टों पर अंधा भरोसा करके बवाल मचाना उचित नहीं है।

पूर्व DGP एसपी वैद की अपील

इस अवसर पर पूर्व DGP एसपी वैद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP नेतृत्व से अपील की कि उनके पीछे 140 करोड़ लोगों की शक्ति है और उन्हें किसी 'बाहरी टूलकिट' से डरने की ज़रूरत नहीं। वैद ने कहा कि कोविड जैसे संकट और वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भी मोदी सरकार ने देश को आगे बढ़ाया है, और यह भरोसा बनाए रखना ज़रूरी है।

आगे क्या

चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद का मुद्दा विपक्ष के लिए राजनीतिक हथियार बनता जा रहा है। BJP ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हर ऐसे दावे का खंडन दस्तावेजी आधार पर करेगी। गौरतलब है कि आने वाले महीनों में कई राज्यों में चुनाव होने की संभावना है, जिससे इस विवाद का राजनीतिक तापमान और बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो मौजूदा सवालों का जवाब नहीं देता। मीडिया रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना एक बात है, लेकिन स्वयं चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक खंडन अब तक नहीं आया — यह चुप्पी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। संवैधानिक संस्थाओं की साख दोनों पक्षों के लिए दांव पर है, और इस बहस को महज़ पार्टी-लाइन पर नहीं देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतुल शाह देव ने चुनाव आयोग विवाद पर क्या कहा?
BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्टें बेबुनियाद हैं और यह सिर्फ एक नैरेटिव बनाने की कोशिश है। उन्होंने चुनौती दी कि किसी भी आयुक्त का एक भी असहमति नोट या दस्तावेज़ सामने लाया जाए।
नवीन चावला विवाद क्या था जिसका BJP ने हवाला दिया?
शाह देव के अनुसार, 2009 में नवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए जाने पर तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद उनकी नियुक्ति हुई, और 2006 में उनके परिवार के ट्रस्ट को कांग्रेस सांसदों से ₹85 लाख मिलने का आरोप भी लगाया गया।
टीएन शेषन और कांग्रेस के बीच क्या विवाद था?
शाह देव के अनुसार, शेषन ने स्वयं बताया था कि कैबिनेट सचिव रहते हुए उन्हें राजीव गांधी की सरकार से निर्देश मिलते थे कि चुनाव आयुक्त को तय तारीखों पर चुनाव कराने का आदेश दिया जाए। बाद में उनकी शक्तियाँ घटाने के लिए दो अतिरिक्त आयुक्त नियुक्त किए गए और कांग्रेस ने उन्हें अहमदाबाद से लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ खड़ा किया।
पूर्व DGP एसपी वैद ने PM मोदी से क्या अपील की?
पूर्व DGP एसपी वैद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP नेतृत्व से अपील की कि 140 करोड़ लोगों की शक्ति उनके साथ है और उन्हें किसी 'बाहरी टूलकिट' के दबाव में आए बिना साहसी फैसले लेते रहना चाहिए।
चुनाव आयोग में वोटिंग और मतभेद की रिपोर्ट पर BJP का क्या रुख है?
BJP का रुख है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह निराधार है। शाह देव ने कहा कि चुनाव आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं और हाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी तीनों आयुक्त एक साथ उपस्थित थे — मतभेद का कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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