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चुनाव आयोग विवाद: BJP प्रवक्ता संदीप वर्मा बोले — विपक्ष की 'नौटंकी' से कुछ हासिल नहीं

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चुनाव आयोग विवाद: BJP प्रवक्ता संदीप वर्मा बोले — विपक्ष की 'नौटंकी' से कुछ हासिल नहीं

सारांश

BJP प्रवक्ता संदीप वर्मा ने रांची में विपक्ष के चुनाव आयोग-विरोधी मार्च को 'नौटंकी' बताया और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के 'गैरकानूनी सरकार' वाले बयान पर पूछा — तो फिर कर्नाटक, केरल और झारखंड की कांग्रेस सरकारें इस्तीफा क्यों नहीं देतीं?

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता संदीप वर्मा ने 6 अक्टूबर 2026 को रांची में विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग -विरोधी मार्च को 'नौटंकी' करार दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के 'गैरकानूनी सरकार' वाले बयान पर BJP ने कहा — कर्नाटक, केरल, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में कांग्रेस पहले अपनी सरकारें भंग करे।
वर्मा ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस.
गिल का हवाला देकर कांग्रेस की आयोग-आलोचना को 'हास्यास्पद' बताया।
UCC को देशव्यापी ज़रूरत बताते हुए कांग्रेस पर शरीयत समर्थन का आरोप लगाया।
विपक्षी प्रदर्शनों की फंडिंग और राहुल गांधी के विदेशी मंचों पर भारत-आलोचना पर भी सवाल उठाए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता संदीप वर्मा ने 6 अक्टूबर 2026 को रांची में विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान पर तीखा पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर सरकारों को 'गैरकानूनी' बताया था। वर्मा ने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनावी हार की जिम्मेदारी संवैधानिक संस्थाओं पर डालकर जनता को गुमराह कर रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

विपक्षी सांसदों के मार्च पर प्रतिक्रिया देते हुए संदीप वर्मा ने कहा कि इस प्रकार की 'नौटंकी' से कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग अपना काम कर रहा है और उसे बिना अनावश्यक हस्तक्षेप के काम करने देना चाहिए।' वर्मा ने 1975 के आपातकाल का संदर्भ देते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे थे — और जिन्होंने संविधान की धज्जियाँ उड़ाई थीं, वे आज संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।

चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर BJP का रुख

वर्मा ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है और इसमें BJP या केंद्र सरकार के हस्तक्षेप का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि यदि प्रक्रियागत कोई खामी है, तो सर्वोच्च न्यायालय उसका संज्ञान ले सकता है और आवश्यकतानुसार निर्देश जारी कर सकता है। आलोचकों का कहना है कि इस बयान से BJP ने न्यायपालिका को ढाल बनाकर विपक्ष की माँगों को खारिज करने की कोशिश की है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल का उल्लेख करते हुए वर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें अपने शासनकाल में संसद और केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दिया था। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे में कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाना 'हास्यास्पद' है।

खड़गे के बयान पर पलटवार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित बयान — जिसमें उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को 'गैरकानूनी' बताया — पर वर्मा ने पूछा कि यदि चुनाव प्रक्रिया ही अवैध है, तो कर्नाटक, केरल, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में कांग्रेस की सरकारों को तत्काल इस्तीफा देकर दोबारा जनादेश लेना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस हाल की कई राज्यों की हार के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।

UCC और विदेशी फंडिंग के आरोप

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर वर्मा ने कहा कि यह पूरे देश की ज़रूरत है और मुस्लिम महिलाओं को भी अपने अधिकारों के अनुसार जीवन जीने का पूरा हक होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर शरीयत कानून का समर्थन करने का आरोप लगाया, जिसे कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

इसके अलावा वर्मा ने विपक्षी प्रदर्शनों के दौरान फंडिंग के स्रोतों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी मंचों पर भारत की नीतियों की आलोचना करते हैं, जो राष्ट्रहित में नहीं है। उन्होंने कहा कि BJP का विरोध और राष्ट्र का विरोध — दोनों अलग-अलग हैं, और विपक्ष को यह अंतर समझना होगा।

BJP का राजनीतिक संदेश

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब BJP ने चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों को विपक्ष की 'हार की खीझ' बताकर खारिज किया हो। वर्मा ने दावा किया कि कांग्रेस का जनाधार देशभर में लगातार कमजोर हुआ है और पार्टी को संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। आने वाले समय में BJP का कहना है कि जनता खुद इसका जवाब देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर वह दशकों पुरानी मिसाल है — आज की संस्थागत स्वायत्तता की कसौटी उस पर नहीं, बल्कि वर्तमान प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर टिकी होनी चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि दोनों पक्षों का आचरण — सत्ता में आयोग से मतभेद छिपाना और विपक्ष में उसे निशाना बनाना — एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP प्रवक्ता संदीप वर्मा ने चुनाव आयोग विवाद पर क्या कहा?
संदीप वर्मा ने विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग-विरोधी मार्च को 'नौटंकी' बताते हुए कहा कि आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसे बिना अनावश्यक हस्तक्षेप के काम करने देना चाहिए। उन्होंने 1975 के आपातकाल का हवाला देते हुए कांग्रेस पर संवैधानिक मूल्यों के प्रति दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के बयान पर BJP ने क्या जवाब दिया?
BJP ने कहा कि यदि कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया को गैरकानूनी मानती है, तो उसे कर्नाटक, केरल, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में अपनी सरकारें भंग कर दोबारा जनादेश लेना चाहिए। वर्मा ने इसे कांग्रेस की 'चुनावी हार पर राजनीतिक छटपटाहट' करार दिया।
BJP ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को क्या उदाहरण दिया?
वर्मा ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल का उल्लेख किया, जिन्हें कांग्रेस ने अपने शासनकाल में संसद और केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दिया था। BJP का तर्क है कि ऐसे इतिहास के बावजूद आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना विरोधाभासी है।
पश्चिम बंगाल में UCC पर BJP का क्या रुख है?
BJP प्रवक्ता ने कहा कि समान नागरिक संहिता पूरे देश की ज़रूरत है और मुस्लिम महिलाओं को भी अपने अधिकारों के अनुसार जीने का हक मिलना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर शरीयत कानून का समर्थन करने का आरोप लगाया।
BJP ने विपक्षी प्रदर्शनों की फंडिंग पर क्या सवाल उठाए?
वर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को खाने-पीने और अन्य सुविधाएँ प्रदान करने के स्रोत सामने आने चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के विदेश दौरों का भी जिक्र करते हुए कहा कि विदेशी मंचों पर भारत की नीतियों की आलोचना उचित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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