29 सितंबर 2026
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खड़गे का BJP सरकार पर प्रहार: '12 वर्षों में लोकतंत्र की जड़ें खोखली कीं, CEC को हटाया जाए'

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खड़गे का BJP सरकार पर प्रहार: '12 वर्षों में लोकतंत्र की जड़ें खोखली कीं, CEC को हटाया जाए'

सारांश

CWC की बैठक में खड़गे का दो-टूक हमला — BJP सरकार पर '12 साल में लोकतंत्र खोखला करने' का आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त को 'कठपुतली' बताते हुए तत्काल बर्खास्तगी की माँग। पाँच राज्यों के चुनाव से पहले कांग्रेस ने मतदाता सूची पारदर्शिता को अपना केंद्रीय मुद्दा बना लिया है।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 29 सितंबर 2026 को CWC बैठक में केंद्र सरकार पर 12 वर्षों में 'षड्यंत्रकारी तरीके' से लोकतंत्र की नींव खोखली करने का आरोप लगाया।
खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 'केंद्र सरकार की कठपुतली' बताते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की माँग की।
फॉर्म-6 के नियमों में चुपचाप बदलाव का आरोप लगाया; इसे 2016 की नोटबंदी के समान 'वोटबंदी' की संज्ञा दी।
कांग्रेस ने मतदाता सूची पारदर्शिता, स्वतंत्र जाँच और डेटा प्रकाशन सहित पाँच माँगें सामने रखीं।
बैठक में सोनिया गांधी , राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत CWC के प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।
खड़गे ने कहा कि पार्टी 'सड़क से संसद तक' लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ेगी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने 12 वर्षों में 'षड्यंत्रकारी तरीके' से लोकतंत्र की नींव को कमज़ोर किया है और मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर फेरबदल कर नागरिकों के मताधिकार को खतरे में डाला है।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस महत्वपूर्ण CWC बैठक में सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी और वर्किंग कमेटी के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता खड़गे ने की।

खड़गे के प्रमुख आरोप

खड़गे ने कहा, 'साजिश के साथ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त केंद्र सरकार की कठपुतली बन गया है।' उन्होंने डॉ. बी. आर. अंबेडकर के 15 जून 1949 के संविधान सभा के वक्तव्य का हवाला देते हुए कहा कि बाबासाहेब ने मताधिकार को लोकतंत्र की 'सर्वाधिक मौलिक चीज़' बताया था, किंतु आज उसका उल्लंघन हो रहा है।

खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुपचाप फॉर्म-6 के नियमों में बदलाव करवा दिया, जिससे युवा मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने इसकी तुलना 2016 की नोटबंदी से करते हुए इसे 'वोटबंदी' की संज्ञा दी और कहा कि दोनों की सबसे अधिक मार गरीबों पर पड़ती है।

CEC को हटाने की माँग

खड़गे ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त की गतिविधियों को 'मनमाना और अनुचित' करार दिया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को 'तत्काल पद से हटाने' और प्रधानमंत्री से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की माँग की। उन्होंने यह भी पूछा कि SIR (Special Intensive Revision) का फैसला किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया।

राहुल गांधी के उठाए सवालों का समर्थन

खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी ने महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र के चुनावों में दस्तावेजों के आधार पर फर्जी मतदाताओं, एक ही पते पर बड़ी संख्या में दर्ज मतदाताओं और फॉर्म-6 से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उनके अनुसार, यदि चुनाव आयोग ने उस दिशा में थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो उसकी विश्वसनीयता बनी रहती।

कांग्रेस की पाँच माँगें और आगे का रास्ता

खड़गे ने CWC की ओर से पाँच स्पष्ट माँगें रखीं: मतदाता सूची में हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो; नाम हटाए गए मतदाताओं को सूचना और अपील का अवसर मिले; राजनीतिक दलों को डेटा सरल प्रारूप में समय पर उपलब्ध हो; गंभीर विसंगतियों पर स्वतंत्र व समयबद्ध जाँच हो; और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों में पूरी पारदर्शिता हो।

उन्होंने CWC से संकल्प लेने का आह्वान किया कि कांग्रेस 'सड़क से संसद तक' लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में पाँच राज्यों के चुनाव निकट हैं और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष पहले से ही मुखर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन पर चुनाव आयोग की ओर से सार्वजनिक स्पष्टीकरण अपेक्षित है। पाँच राज्यों के चुनाव से ठीक पहले उठाई गई ये माँगें रणनीतिक रूप से समयबद्ध हैं — असली परीक्षा यह होगी कि क्या कांग्रेस इन्हें अदालत और संसद में भी उतनी ही ताकत से उठा पाती है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CWC बैठक में खड़गे ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
खड़गे ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीके से लोकतंत्र की नींव खोखली की है। उनका कहना था कि मतदाता सूचियों से नाम साजिशन हटाए जा रहे हैं और फॉर्म-6 के नियमों में चुपचाप बदलाव कर युवा मतदाताओं को बेदखल किया जा रहा है।
खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग क्यों की?
खड़गे के अनुसार, चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त की गतिविधियों को मनमाना और अनुचित बताया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि SIR का फैसला किसने लिया और दो आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से क्यों बाहर रखा गया।
'वोटबंदी' से खड़गे का क्या तात्पर्य है?
खड़गे ने 2016 की नोटबंदी के समानांतर 'वोटबंदी' शब्द का प्रयोग किया — उनका आरोप है कि जिस तरह नोटबंदी में गरीब लाइन में खड़ा था, उसी तरह अब उसे वोटर सूची से ही बाहर कर दिया जा रहा है। उनके अनुसार गरीब, दलित और वंचित वर्ग का एकमात्र हथियार उनका वोट है।
कांग्रेस की चुनाव आयोग से पाँच माँगें क्या हैं?
कांग्रेस ने माँग की है कि: (1) मतदाता सूची में हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो; (2) नाम हटाए गए मतदाताओं को सूचना व अपील का अवसर मिले; (3) राजनीतिक दलों को डेटा सरल प्रारूप में मिले; (4) गंभीर विसंगतियों पर स्वतंत्र जाँच हो; (5) चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता हो।
राहुल गांधी के किन सवालों का खड़गे ने समर्थन किया?
खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी ने महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र के चुनावों में दस्तावेजों के आधार पर फर्जी मतदाताओं, एक ही पते पर दर्ज बड़ी संख्या में मतदाताओं और फॉर्म-6 की अनियमितताओं को उजागर किया था, जो बाद में प्रामाणिक रूप से सही साबित हुईं।
राष्ट्र प्रेस
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