31 अक्टूबर 2026
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ज्ञानेश कुमार को हटाओ: खड़गे के आवास पर कांग्रेस की 'जन महाभियोग' कार्यवाही, 6 बड़े आरोप

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ज्ञानेश कुमार को हटाओ: खड़गे के आवास पर कांग्रेस की 'जन महाभियोग' कार्यवाही, 6 बड़े आरोप

सारांश

कांग्रेस ने प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' के ज़रिये मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 6 बड़े आरोप लगाए — जिसमें 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाना और मोदी-शाह के इशारे पर काम करना शामिल है। खड़गे ने तत्काल बर्खास्तगी और SIR रोकने की माँग की।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग कार्यवाही' का आयोजन किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 6 आरोप लगाए गए, जिनमें 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाना और फॉर्म-6 में अवैध बदलाव शामिल हैं।
कार्यवाही की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की; मंच लोकसभा जैसा तैयार किया गया।
खड़गे ने मतदाता सूची SIR प्रक्रिया रोकने और चुनाव आयुक्त नियुक्ति अधिनियम 2023 निरस्त करने की माँग की।
इंडी गठबंधन का दावा — वे देश की 60% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं; ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की माँग।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 31 अक्टूबर 2026 को अपने नई दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग कार्यवाही' की अध्यक्षता की। खड़गे ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार का पद पर बने रहना निष्पक्ष चुनाव, लोकतंत्र और संविधान के लिए सीधा खतरा है। इस कार्यक्रम में इंडी गठबंधन के प्रमुख नेता शामिल हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त की तत्काल बर्खास्तगी की माँग की गई।

कार्यवाही का स्वरूप और मंच

इस आयोजन के लिए लोकसभा जैसा विशेष मंच तैयार किया गया था, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी भी रखी गई। प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। खड़गे ने कार्यवाही का आरंभ मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए गए छह प्रमुख आरोपों को पढ़कर किया और एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया।

जैसे ही प्रस्ताव पेश हुआ, गठबंधन के नेताओं ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया और 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे लगाए।

मुख्य आरोप: क्या है कांग्रेस का दावा

खड़गे द्वारा पढ़े गए प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त पर निम्नलिखित छह आरोप लगाए गए:

पहला, चुनावों में हेरफेर की साजिश रचना। दूसरा, 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना। तीसरा, संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव करना। चौथा, ईसीआईनेट के माध्यम से मतदाता सूची पर एकतरफा नियंत्रण रखना। पाँचवाँ, अन्य दो चुनाव आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना। और छठा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करना।

ये सभी आरोप कांग्रेस के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

खड़गे की अन्य माँगें

खड़गे ने यह भी माँग की कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को भी निरस्त करने की माँग की, यह कहते हुए कि यह कानून चुनाव आयुक्तों को आजीवन कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

खड़गे ने यह भी कहा कि इंडी गठबंधन के सदस्य देश की 60 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और इस महाभियोग कार्यवाही के माध्यम से माँग की जा रही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

खड़गे ने राहुल गांधी पर युवाओं को भड़काने के आरोपों को भी खारिज किया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर आरोप लगाया कि वह संविधान लागू होने के समय से वयस्क मताधिकार का विरोध करता आया है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हम लोकतंत्र की उस बुनियाद को बचाना चाहते हैं, जिस पर भाजपा की ओर से खतरा पैदा किया जा रहा है।'

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर टकराव पहले से ही तेज़ है। गौरतलब है कि 2023 में पारित चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पहले से ही विपक्ष की आलोचना का निशाना रहा है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को सीमित किए जाने का मुद्दा उठाया जाता रहा है।

आगे क्या होगा

यह कार्यवाही प्रतीकात्मक थी और इसका कोई संवैधानिक प्रभाव नहीं है — मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया केवल संसद के माध्यम से संभव है। हालाँकि, कांग्रेस का इरादा इस मुद्दे को जन-चर्चा के केंद्र में बनाए रखना प्रतीत होता है। इंडी गठबंधन के अगले कदम और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक संदेश स्पष्ट है — विपक्ष चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है। मुख्यधारा की कवरेज नाटकीयता पर टिकी है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि 13.2 करोड़ मतदाता नामों के कथित हटाने की जाँच स्वतंत्र रूप से हुई या नहीं। 2023 का चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून — जिसने सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका घटाई — पहले से ही न्यायिक समीक्षा के दायरे में है; यह कार्यवाही उस मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय एजेंडे पर लाती है। सत्तापक्ष ने अब तक कोई विस्तृत खंडन नहीं दिया है, जो इस विवाद को और गहरा कर सकता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस की 'जन महाभियोग कार्यवाही' क्या है?
यह 31 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित एक प्रतीकात्मक संसदीय प्रक्रिया थी, जिसमें इंडी गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 6 आरोप पढ़कर उनकी तत्काल बर्खास्तगी की माँग की। यह कार्यवाही संवैधानिक रूप से बाध्यकारी नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक प्रदर्शन है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या-क्या आरोप लगाए गए?
कांग्रेस ने 6 आरोप लगाए: चुनावों में हेरफेर की साजिश, 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाना, संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव, ईसीआईनेट से मतदाता सूची पर एकाधिकार, दो अन्य आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना और प्रधानमंत्री मोदी व गृह मंत्री शाह के इशारे पर काम करना। ये सभी कांग्रेस के दावे हैं।
क्या इस 'जन महाभियोग' का कोई कानूनी असर होगा?
नहीं। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया केवल संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से संभव है। यह कार्यवाही पूरी तरह प्रतीकात्मक थी और इसका कोई संवैधानिक या कानूनी प्रभाव नहीं है।
कांग्रेस ने चुनाव आयुक्त नियुक्ति अधिनियम 2023 को रद्द करने की माँग क्यों की?
खड़गे का तर्क है कि यह कानून चुनाव आयुक्तों को आजीवन कानूनी सुरक्षा देता है, जिससे उनकी जवाबदेही सीमित होती है। यह कानून पहले से ही विपक्ष और कुछ कानूनी विशेषज्ञों की आलोचना का विषय रहा है क्योंकि इसने सर्वोच्च न्यायालय की चयन समिति में भूमिका को कम कर दिया।
मतदाता सूची SIR क्या है और कांग्रेस इसे रोकने की माँग क्यों कर रही है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची को अद्यतन करने की चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए गए हैं, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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