24 सितंबर 2026
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13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए; CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफे की माँग, CJP ने दी आंदोलन की चेतावनी

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13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए; CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफे की माँग, CJP ने दी आंदोलन की चेतावनी

सारांश

कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दिपके ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफे का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी का दावा है कि देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूचियों से हटाए गए — एक ऐसा कदम जो, उनके अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

मुख्य बातें

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने 24 सितंबर 2026 को CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी।
पार्टी का दावा है कि देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
दिपके ने 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए और विपक्ष के बीच मात्र 2% वोट अंतर का हवाला देते हुए इस हटाव को चुनावी परिणामों के लिए खतरनाक बताया।
ममता बनर्जी के क्षेत्र से 50,000 , एमके स्टालिन के क्षेत्र से 1 लाख और अरविंद केजरीवाल के क्षेत्र से 40,000 वोट हटाने का आरोप लगाया गया — ये दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
आशुतोष रांका ने गोवा, पश्चिम बंगाल और बिहार में कल्याण योजनाओं को मतदाता सूची से जोड़ने पर भी चिंता जताई।
समयसीमा समाप्त होने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग करते हुए 48 घंटे की समयसीमा निर्धारित की। दिपके ने आरोप लगाया कि देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। पार्टी ने चेतावनी दी कि समयसीमा समाप्त होने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मुख्य आरोप और मतदाता सूची विवाद

दिपके ने चुनाव आयोग से संबंधित हालिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से काटे गए हैं। उनके अनुसार यह संख्या असामान्य है और इसका चुनावी राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि एनडीए और विपक्ष के बीच मतों का अंतर मात्र 2 प्रतिशत रहा था — ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाना निर्णायक असर डाल सकता है।

विपक्षी नेताओं के क्षेत्रों का उदाहरण

दिपके ने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि मतदाता सूची में बदलाव का असर विपक्षी दलों के नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों में विशेष रूप से देखा गया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव क्षेत्र से करीब 50,000 वोट हटाए गए, और वह लगभग 15,000 मतों के अंतर से हारीं। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के क्षेत्र से करीब 1 लाख वोट हटाए गए जबकि हार का अंतर 45,000 मतों का बताया गया। दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के क्षेत्र से करीब 40,000 वोट कटे और वे 4-5 हजार मतों के अंतर से हार गए — यह आरोप भी दिपके ने लगाया, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

CEC पर लोकतंत्र-विरोधी आचरण का आरोप

दिपके ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के CEC बनने के बाद सरकार यह तय करने लगी है कि किसे मतदान की अनुमति होगी और किसे नहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव जानबूझकर इस तरह किए जा रहे हैं जिससे सत्तारूढ़ दल को राजनीतिक लाभ हो। CJP ने माँग की है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी पात्र नागरिक को प्रशासनिक कारणों से मताधिकार से वंचित न किया जाए।

आशुतोष रांका की अपील और कल्याण योजनाओं पर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने देश के युवाओं और 'जेन-Z' से लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की। रांका ने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया था, जो इसे कई विकसित देशों से अलग करता है। उन्होंने गोवा, पश्चिम बंगाल और बिहार में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को मतदाता सूची से जोड़ने पर भी चिंता जताई, यह कहते हुए कि यदि नाम हटने से राशन, पेंशन या अन्य योजनाओं का लाभ रुकता है तो यह नागरिक अधिकारों पर सीधी चोट है।

आगे क्या होगा

CJP ने स्पष्ट किया है कि 48 घंटे की समयसीमा समाप्त होते ही देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी और तब तक पार्टी अपनी माँग से पीछे नहीं हटेगी। यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया (SIR) को लेकर कई विपक्षी दल और नागरिक समाज संगठन पहले से सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग की ओर से इस माँग पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे इसकी राजनीतिक पहुँच सीमित है। असल सवाल यह है कि क्या विपक्ष के बड़े दल इन आँकड़ों को आधार बनाकर चुनाव आयोग से जवाब माँगेंगे। मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया — विशेषकर SIR — की पारदर्शिता पर बहस नई नहीं है, पर इसे व्यापक समर्थन तभी मिलेगा जब दावों को स्वतंत्र सत्यापन का सामना करना पड़े। चुनाव आयोग की चुप्पी इस बहस को और हवा देगी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत दिपके कौन हैं और उन्होंने CEC से इस्तीफे की माँग क्यों की?
अभिजीत दिपके कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक हैं। उन्होंने 24 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का दावा क्या है?
CJP के अनुसार चुनाव आयोग से जुड़ी हालिया रिपोर्टों में देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से काटे जाने का उल्लेख है। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है।
CJP ने किन विपक्षी नेताओं के क्षेत्रों में वोट हटाने का आरोप लगाया?
दिपके ने दावा किया कि ममता बनर्जी के क्षेत्र से करीब 50,000, एमके स्टालिन के क्षेत्र से करीब 1 लाख और अरविंद केजरीवाल के क्षेत्र से करीब 40,000 वोट हटाए गए। ये सभी दावे कथित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
48 घंटे की समयसीमा के बाद CJP क्या करेगी?
CJP ने चेतावनी दी है कि यदि CEC ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते, तो पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और तब तक पीछे नहीं हटेगी।
मतदाता सूची से नाम हटने पर कल्याण योजनाओं पर क्या असर पड़ सकता है?
CJP के आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि गोवा, पश्चिम बंगाल और बिहार में मतदाता सूची को सरकारी कल्याण योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। उनके अनुसार, यदि किसी नागरिक का नाम हटता है तो उसे राशन, पेंशन या अन्य सरकारी सुविधाएँ मिलनी बंद हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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