1 अक्टूबर 2026
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ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: भारत की चुनाव प्रक्रिया 'हाईजैक' और 'केंद्रीकृत', CEC ज्ञानेश कुमार पर निशाना

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ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: भारत की चुनाव प्रक्रिया 'हाईजैक' और 'केंद्रीकृत', CEC ज्ञानेश कुमार पर निशाना

सारांश

ममता बनर्जी का यह बयान महज़ राजनीतिक आरोप नहीं — यह चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सीधा सवाल है। बंगाल में 3.5 लाख नाम हटाने का दावा, CEC को 'वैनिश कुमार' का तंज, और 2023 के प्रतिरक्षा कानून पर निशाना — विपक्ष की लड़ाई अब चुनाव मैदान से चुनाव आयोग के दरवाज़े तक पहुँच गई है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारत की चुनाव प्रक्रिया 'हाईजैक' करने का आरोप लगाया।
उनके अनुसार 2021 से 2026 के बीच पश्चिम बंगाल में लगभग 3.5 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, ज़्यादातर TMC के गढ़ों से।
बनर्जी ने 2023 में लागू CEC प्रतिरक्षा प्रावधान को 'विषैले साँप के डंक' जैसा बताया और कहा यह 147 सांसदों के निलंबन के दौरान पारित हुआ।
IT महानिदेशक सीमा खन्ना पर भी मतदाता नाम हटाने में भूमिका का आरोप; 18 BLO ने आत्महत्या का दावा।
भवानीपुर मतगणना में 'EVM हैकिंग', CCTV अवरोध और व्यक्तिगत हमले का आरोप बनर्जी ने दोहराया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को खुश करने के लिए 'हाईजैक' और 'केंद्रीकृत' कर दिया गया है। यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।

CEC पर सीधा हमला

बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कथित तौर पर 'वैनिश कुमार' कहकर संबोधित किया और कहा, 'जिसने नागरिकों के मतदान के अधिकार छीनने की कोशिश की है, मैं उसे कैसे माफ कर सकती हूँ? इसका फैसला भारत की जनता को करना है।' उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली में प्रतिशोध की भावना थी, जो केवल केंद्र सरकार को संतुष्ट करने के लिए थी।

उन्होंने CEC और चुनाव आयुक्तों के लिए 2023 में लागू किए गए प्रतिरक्षा प्रावधान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह विधेयक तब पारित किया गया जब लोकसभा और राज्यसभा से 147 सांसदों को निलंबित किया गया था। उनके अनुसार, 'यह एक विषैले साँप के डंक के समान है।'

पश्चिम बंगाल में मतदाता नाम हटाने का आरोप

बनर्जी ने दावा किया कि 2021 से 2026 के विधानसभा चुनावों के बीच पश्चिम बंगाल में लगभग 3.5 लाख मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा दिया गया। उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रवार आँकड़े प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि सबसे अधिक नाम उन क्षेत्रों से हटाए गए हैं जहाँ (अविभाजित) TMC ने पहले जीत दर्ज की थी।

गौरतलब है कि बनर्जी ने यह भी कहा कि जब उनकी पार्टी SIR के 100 'पीड़ितों' को लेकर चुनाव आयोग कार्यालय पहुँची, तो उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। पार्टी के सांसदों को पार्टी चिन्ह के संबंध में मिलने गए तो उन्हें 'चले जाओ' कह दिया गया, ऐसा उनका आरोप है।

चुनाव आयोग की IT महानिदेशक पर आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की महानिदेशक सीमा खन्ना पर भी मतदाताओं के नाम अचानक हटाने में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सीमा खन्ना की नियुक्ति पर भी पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी।

बनर्जी ने यह भी उल्लेख किया कि पश्चिम बंगाल कार्यकारी अधिकारी संघ ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ERO को ECINET सॉफ्टवेयर तक पहुँच से वंचित किए जाने पर आपत्ति जताई थी। उनके अनुसार इस विवाद के बीच 18 BLO ने आत्महत्या तक कर ली।

भवानीपुर और मतगणना पर आरोप

बनर्जी ने भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से अपनी जीत का हवाला देते हुए दावा किया कि मतगणना केंद्रों पर दो-तीन दौर के बाद 'कब्ज़ा' कर लिया गया, CCTV कैमरे अवरुद्ध कर दिए गए, और EVM को 'हैक' कर लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन पर व्यक्तिगत रूप से हमला किया गया और उन्हें मतगणना केंद्र में प्रवेश से रोका गया।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ चल रही हैं और विपक्षी दलों ने 'वोट चोरी' के आरोप लगाए हैं। बनर्जी ने स्वीकार किया कि बिहार में कांग्रेस और राजद की कोशिश देर से हुई। साथ ही उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी ऐसी ही घटनाएँ हुईं, लेकिन किसी ने सवाल नहीं उठाए।

आगे क्या होगा

ममता बनर्जी के इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी खेमे में SIR को लेकर नाराज़गी बढ़ रही है और यह विवाद आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से और गरमा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

IT महानिदेशक, ECINET सॉफ्टवेयर — का हवाला दिया, जो इसे केवल राजनीतिक भड़ास से ऊपर उठाता है। असली सवाल यह है कि चुनाव आयोग इन आँकड़ों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देगा या चुप्पी साध लेगा — क्योंकि पारदर्शिता की अनुपस्थिति में आरोप और बड़े होते जाते हैं। 2023 का प्रतिरक्षा प्रावधान संसदीय जवाबदेही को कमज़ोर करता है, और यह लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसे का गंभीर प्रश्न है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारत की चुनाव प्रक्रिया को BJP नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को खुश करने के लिए 'हाईजैक' और 'केंद्रीकृत' किया जा रहा है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार और IT महानिदेशक सीमा खन्ना पर पश्चिम बंगाल में मतदाता नाम हटाने और मतगणना प्रक्रिया को प्रभावित करने का सीधा आरोप लगाया।
पश्चिम बंगाल में कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए?
ममता बनर्जी के दावे के अनुसार 2021 से 2026 के विधानसभा चुनावों के बीच पश्चिम बंगाल में लगभग 3.5 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि ये नाम मुख्य रूप से उन निर्वाचन क्षेत्रों से हटाए गए जहाँ (अविभाजित) TMC ने पहले जीत दर्ज की थी।
SIR (विशेष गहन संशोधन) विवाद क्या है?
मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों, विशेष रूप से TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया में उनके समर्थकों के नाम लक्षित तरीके से हटाए गए हैं, जबकि चुनाव आयोग इसे नियमित प्रशासनिक कदम बताता रहा है।
CEC के लिए 2023 का प्रतिरक्षा प्रावधान क्या है जिस पर बनर्जी ने सवाल उठाया?
2023 में एक कानून के ज़रिए मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से प्रतिरक्षा प्रदान की गई। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह विधेयक तब पारित किया गया जब लोकसभा और राज्यसभा से 147 सांसदों को निलंबित किया गया था, और कहा कि इसे बहुमत का स्वाभाविक समर्थन नहीं मिलता।
ममता बनर्जी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
1 अक्टूबर 2026 तक ममता बनर्जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इन आरोपों पर आयोग का आधिकारिक पक्ष अभी प्रतीक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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