एसआईआर के पीछे बंगाल पर कब्जे की साजिश: ममता बनर्जी का मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 26 सितंबर 2026 को हुगली जिले के श्रीरामपुर में आयोजित एक जनसभा में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का एकमात्र मकसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बंगाल की सत्ता में स्थापित करना है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग की आईटी प्रमुख सीमा खन्ना की भूमिका को सीधे तौर पर संदिग्ध बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'वैनिश कुमार' कहकर संबोधित किया — एसआईआर के क्रियान्वयन को लेकर चुनाव आयोग के शीर्ष स्तर पर उभरे कथित मतभेदों की खबरों के बीच यह तंज एक राजनीतिक बयान बन गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक कुमार पद से हटते नहीं या उन्हें हटाया नहीं जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
बनर्जी ने कहा, 'जैसे हमने 'वैनिश कुमार' की चालों को पकड़ा है, वैसे ही हम ऐसी गड़बड़ियों के पीछे छिपे दूसरों को भी पकड़ेंगे। 'वैनिश कुमार' को जाना होगा। जब तक वह नहीं जाते, हमारा एकजुट आंदोलन जारी रहेगा।' यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष उबल रहा है।
विपक्षी एकता और इंडी गठबंधन
ममता ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग पर एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने सीपीआई(एम) नेता एम.ए. बेबी के साथ हुई टेलीफोन पर बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मुद्दा साझा हो तो पार्टी लाइन नहीं देखेंगी।
30 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली इंडी गठबंधन की बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पूरा देश एक साथ आ रहा है। बनर्जी ने कहा, 'हम एकजुट होकर लड़ेंगे। यह देखने की जरूरत नहीं कि कौन लाल है, नीला है या पीला। हम सब लोकतंत्र बहाल करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे।'
पुलिस की भूमिका पर सवाल
अपनी रैली के दौरान ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कथित कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली से एक रात पहले पुलिस ने श्रीरामपुर में तृणमूल समर्थकों को उनके घरों से ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार किया, ताकि सभा में भीड़ न जुट सके। गौरतलब है कि ममता ने यह भी स्पष्ट किया, 'पुलिस मेरी दुश्मन नहीं है। उनका काम लोगों की सुरक्षा करना है।' — यानी वह इसे संस्थागत विफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं, न कि व्यक्तिगत दुश्मनी के रूप में।
एसआईआर विवाद की पृष्ठभूमि
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों की गहन जाँच होती है। आलोचकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में इसका समय और तरीका संदिग्ध है, जबकि चुनाव आयोग इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताता है। यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया हो — वह पहले भी बंगाल चुनावों के संदर्भ में इसी तरह के आरोप लगा चुकी हैं।
आगे क्या होगा
30 सितंबर 2026 की इंडी गठबंधन बैठक इस आंदोलन का अगला निर्णायक पड़ाव होगी, जहाँ मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग पर साझा रणनीति तय होने की संभावना है। ममता बनर्जी के इस तेवर से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में बंगाल की सियासत और केंद्र-राज्य संबंध दोनों गर्म रहेंगे।