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ममता बनर्जी ने सबसे पहले उठाई थी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज़, अब कांग्रेस-सपा सहित पूरा विपक्ष एकजुट: कुणाल घोष

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ममता बनर्जी ने सबसे पहले उठाई थी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज़, अब कांग्रेस-सपा सहित पूरा विपक्ष एकजुट: कुणाल घोष

सारांश

ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज़ सबसे पहले उठाई — और अब यह एक राष्ट्रव्यापी विपक्षी मुद्दा बन चुका है। श्रीरामपुर रैली से वे गैर-भाजपा दलों को एकजुट करने की रणनीति देंगी। TMC का दावा है कि अदालत के आदेश के बाद ही रैली संभव हो सकी।

मुख्य बातें

कुणाल घोष ने 25 सितंबर 2026 को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सबसे पहले ममता बनर्जी ने आवाज़ उठाई थी।
अब कांग्रेस , समाजवादी पार्टी और TMC सहित कई दल इस विरोध में शामिल हैं।
ममता बनर्जी श्रीरामपुर रैली से आगे की विपक्षी रणनीति तय करेंगी।
घोष का दावा — सरकार ने पहले रैली की अनुमति देने से इनकार किया था, अदालत के आदेश के बाद कार्यक्रम संभव हुआ।
घोष ने BJP पर पश्चिम बंगाल चुनावों में सर्वाधिक खर्च करने का आरोप भी लगाया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने 25 सितंबर 2026 को कोलकाता में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध सबसे पहले आवाज़ उठाने का श्रेय TMC प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जाता है। घोष ने स्पष्ट किया कि अब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC), समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी दल भी इस आंदोलन में शामिल हो चुके हैं।

श्रीरामपुर रैली: ममता देंगी आगे की रणनीति का संदेश

कुणाल घोष के अनुसार, ममता बनर्जी श्रीरामपुर में आयोजित रैली में विस्तार से बताएंगी कि ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों का पश्चिम बंगाल पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकता है और आगे की कार्ययोजना क्या होगी। घोष ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गैर-भाजपा, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील दलों को एकजुट करने की दिशा भी ममता बनर्जी इसी मंच से तय करेंगी।

घोष ने दावा किया कि प्रारंभ में सरकार की ओर से श्रीरामपुर रैली की अनुमति देने से इनकार किया गया था, लेकिन अदालत के आदेश के बाद यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस रैली में बड़ी संख्या में TMC कार्यकर्ता शामिल होंगे।

विपक्षी एकता का बढ़ता दायरा

घोष ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध अब कई राजनीतिक दलों और आम नागरिकों के बीच एक व्यापक मुद्दा बन चुका है। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी ने बंगाल की धरती से जिस सवाल को उठाया था, वही सवाल आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, TMC सहित कई दलों की साझा आवाज़ बन गया है। घोष ने दावा किया कि आम जनता और युवा वर्ग भी इस लोकतंत्र-रक्षा की मुहिम से जुड़ रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो रही है और कई विपक्षी दल संस्थागत स्वायत्तता पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।

भाजपा के चुनावी खर्च पर सवाल

कुणाल घोष ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनावी खर्च को लेकर भी आरोप लगाए। उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान BJP की ओर से सर्वाधिक खर्च किया गया, जिसे उन्होंने पार्टी की 'चुनावी रणनीति और आत्मविश्वास' से जोड़ा।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि ममता बनर्जी की श्रीरामपुर रैली को विपक्षी एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। रैली में लिए गए निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की अगली रणनीति को आकार दे सकते हैं। इस आंदोलन की दिशा और व्यापकता आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि महज़ तथ्यात्मक विवरण। जब भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, विपक्षी दल एकता का प्रदर्शन करते हैं, लेकिन श्रेय की होड़ भी साथ चलती है। असली सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन संस्थागत सुधार की माँग तक पहुँचेगा, या सिर्फ चुनावी गोलबंदी का औज़ार बनकर रह जाएगा। श्रीरामपुर रैली को अदालत के आदेश के बाद ही मंज़ूरी मिलने की घटना खुद लोकतांत्रिक अधिकारों की संकरी होती जगह की कहानी कहती है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्ञानेश कुमार विवाद क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दलों ने पक्षपात के आरोप लगाए हैं और उनके आचरण पर सवाल उठाए हैं। TMC, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित कई दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं।
ममता बनर्जी की श्रीरामपुर रैली क्यों महत्वपूर्ण है?
इस रैली में ममता बनर्जी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन की आगे की रणनीति और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता की दिशा तय करेंगी। TMC का दावा है कि सरकार ने पहले यह अनुमति देने से इनकार किया था और अदालत के आदेश के बाद यह रैली संभव हो सकी।
कुणाल घोष ने BJP के चुनावी खर्च पर क्या आरोप लगाया?
कुणाल घोष ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान BJP की ओर से सबसे अधिक खर्च किया गया। उन्होंने इसे पार्टी की चुनावी रणनीति और आत्मविश्वास से जोड़ा।
इस विरोध में कौन-कौन से दल शामिल हैं?
तृणमूल कांग्रेस (TMC), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) सहित कई विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस आंदोलन में शामिल हैं। कुणाल घोष के अनुसार, आम जनता और युवा वर्ग भी इस मुहिम से जुड़ रहे हैं।
क्या ममता बनर्जी ने वाकई सबसे पहले यह मुद्दा उठाया था?
TMC नेता कुणाल घोष का दावा है कि ममता बनर्जी ने बंगाल की धरती से इस मुद्दे को सबसे पहले उठाया था और बाद में अन्य राज्यों में भी चुनाव हुए और यह मुद्दा व्यापक हुआ। यह दावा TMC की ओर से है; अन्य दलों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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