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ज्ञानेश कुमार को सजा मिलेगी — उदित राज ने ममता की गिरफ्तारी मांग का समर्थन किया

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ज्ञानेश कुमार को सजा मिलेगी — उदित राज ने ममता की गिरफ्तारी मांग का समर्थन किया

सारांश

कांग्रेस नेता उदित राज ने ममता बनर्जी की CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को 'पूरी तरह' सही ठहराया, PM के चिंतन शिविर को 'नौटंकी' कहा, और दिल्ली में आधे मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का आरोप लगाया — एक बयान में कई मोर्चों पर विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरा।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता उदित राज ने CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की ममता बनर्जी की मांग का समर्थन किया; कहा — 'अपराध अक्षम्य हैं, सजा मिलेगी।' उन्होंने दिल्ली में करीब आधे मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का आरोप लगाया।
PM के दो दिवसीय चिंतन शिविर को 'नौटंकी' बताया; कहा — मंत्रियों के पास निर्णय लेने की शक्ति नहीं।
लेडी श्री राम कॉलेज में ऑफलाइन कक्षाएं ऑनलाइन किए जाने को 'समस्या का हल नहीं' करार दिया; गृह मंत्रालय से कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग।
सपा-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन; कहा — साथ लड़ने पर आईं थीं 42 सीटें , बयानबाजी से बचना ज़रूरी।

कांग्रेस नेता उदित राज ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने जो अपराध किए हैं, वे अक्षम्य हैं और उन्हें समय आने पर सजा मिलेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दलों में असंतोष चरम पर है।

ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला

उदित राज ने ममता बनर्जी की CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग का 'पूरी तरह समर्थन' करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 'अक्षम्य अपराध' किए हैं। उन्होंने दिल्ली में करीब आधे मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का उल्लेख किया और इसे विपक्षी मतदाताओं को निशाना बनाने की सुनियोजित प्रक्रिया बताया। गौरतलब है कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति की खबरें भी चर्चा में हैं, जिस पर उन्होंने कहा कि यह 'लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।'

चिंतन शिविर को बताया 'नौटंकी'

प्रधानमंत्री की ओर से केंद्रीय मंत्रियों के साथ आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उदित राज ने इसे 'नौटंकी' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि मंत्रियों को गाड़ी, स्टाफ और आवास तो दिए गए हैं, लेकिन महत्वपूर्ण निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर ही होते हैं। उनका कहना था कि जब फैसले लेने की शक्ति ही नहीं है, तो ऐसा शिविर महज एक औपचारिकता है।

सड़क की राजनीति और संजय राउत की टिप्पणी

शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत की संसद के साथ-साथ सड़क पर भी आवाज उठाने की बात पर उदित राज ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि अगर सड़क खाली रहेगी, तो संसद भी कमज़ोर हो जाएगी। उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसान सड़क पर उतरे, तब सरकार ने उनकी मांगें सुनीं।

अन्य प्रमुख मुद्दों पर राय

मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बिना वसीयत संपत्ति के बंटवारे के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने पर उन्होंने सतर्क रुख अपनाया और कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही अंतिम फैसला आएगा, अभी राय देना उचित नहीं। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका का विरोध किए जाने को उन्होंने सही ठहराया और उम्मीद जताई कि अदालत निष्पक्ष फैसला करेगी।

दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज फॉर वुमन में सुरक्षा चिंताओं के चलते ऑफलाइन कक्षाएं ऑनलाइन किए जाने पर उन्होंने कहा कि यह समस्या का स्थायी हल नहीं है। डर के कारण लड़कियों को घर में बंद नहीं किया जा सकता — यह जिम्मेदारी सरकार और गृह मंत्रालय की है कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

सपा-कांग्रेस गठबंधन पर संदेश

रायबरेली से समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा की शुरुआत पर उदित राज ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की सबसे अधिक ज़रूरत आज के दौर में है। उन्होंने सपा-कांग्रेस गठबंधन की अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि जब दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा, तो 42 सीटें मिलीं। उन्होंने दोनों दलों से अनावश्यक बयानबाजी से बचने की अपील की और कहा कि 'राजनीति में एक और एक मिलकर कई बार 11 हो जाता है।'

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसका समर्थन करने वाले बयान बिना ठोस कानूनी आधार के जनता को भ्रमित कर सकते हैं। वोटर लिस्ट से 'आधे मतदाताओं' के नाम हटाए जाने का आरोप गंभीर है, लेकिन स्वतंत्र सत्यापन के बिना यह केवल राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाता है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष चुनावी सुधार की ठोस लड़ाई लड़ रहा है, या केवल आरोपों से जनभावनाएं उभाड़ रहा है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उदित राज ने ममता बनर्जी की किस मांग का समर्थन किया?
कांग्रेस नेता उदित राज ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मांग का पूरी तरह समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने 'अक्षम्य अपराध' किए हैं और उन्हें समय आने पर सजा मिलेगी।
उदित राज ने PM के चिंतन शिविर को 'नौटंकी' क्यों कहा?
उदित राज का तर्क है कि केंद्रीय मंत्रियों के पास महत्वपूर्ण निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति नहीं है — फैसले PMO और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर होते हैं। ऐसे में दो दिवसीय चिंतन शिविर उनके अनुसार केवल एक दिखावा है।
दिल्ली की वोटर लिस्ट को लेकर उदित राज ने क्या आरोप लगाया?
उदित राज ने आरोप लगाया कि दिल्ली में करीब आधे मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इसे विपक्षी मतदाताओं को निशाना बनाने की सुनियोजित प्रक्रिया बताया और चुनाव आयोग पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर उदित राज का क्या रुख है?
उदित राज ने सपा और कांग्रेस के गठबंधन का समर्थन किया और दोनों दलों से बयानबाजी से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब दोनों ने मिलकर चुनाव लड़ा, तो 42 सीटें मिलीं, और एकजुटता में ही राजनीतिक ताकत है।
लेडी श्री राम कॉलेज के ऑनलाइन कक्षाओं के फैसले पर उनकी क्या राय है?
उदित राज ने कहा कि सुरक्षा कारणों से लड़कियों की ऑफलाइन कक्षाएं ऑनलाइन करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। डर के कारण छात्राओं को घर में नहीं बैठाया जा सकता — सरकार और गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था दुरुस्त की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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