फॉर्म-6 विवाद: उदित राज का CEC ज्ञानेश कुमार पर हमला, 'पद की गरिमा खत्म कर दी'
सारांश
मुख्य बातें
चुनाव आयोग की 27 सितंबर 2026 को हुई अहम बैठक के बाद सियासी तापमान और बढ़ गया, जब कांग्रेस नेता उदित राज ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधा और फॉर्म-6 में बदलाव को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल रहे, जिसके बाद आयोग ने कहा कि फॉर्म-6 विवाद 'मुख्य मुद्दा नहीं है' — इस बयान पर उदित राज ने कड़ी आपत्ति जताई।
फॉर्म-6 विवाद का मूल
उदित राज ने स्पष्ट कहा कि फॉर्म-6 ही सबसे बड़ा और केंद्रीय मुद्दा है। उनके अनुसार, 1960 के नियम के तहत फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव की अनुमति नहीं है। मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए मात्र तीन शर्तें निर्धारित हैं — 18 वर्ष की आयु, उस क्षेत्र में 6 महीने का निवास और मतदाता बनने की पात्रता। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 की हार्ड कॉपी में बदलाव नहीं किया गया, परंतु ऑनलाइन फॉर्म में चुपचाप परिवर्तन कर दिया गया — जो उनके मुताबिक पूरी तरह अवैध है।
SIR का कानूनी आधार नहीं — उदित राज
उदित राज ने यह भी कहा कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) का 1950 या 1960 — किसी भी नियम में कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने इस पर चुनाव आयोग के भीतर की असहमति का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने इस मुद्दे पर लिखित रूप में अपनी असहमति दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया। यह आंतरिक असहमति आयोग की एकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
2002 की वोटर लिस्ट से लिंक — करोड़ों वंचित
उदित राज ने विस्तार से समझाया कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव के अनुसार अब 18 वर्ष के नए मतदाताओं को पंजीकरण के लिए 2002-2003 की मतदाता सूची में अपने माता-पिता या दादा-दादी का नाम दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। उनके अनुसार यह व्यवस्था करोड़ों युवाओं और नए मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है, क्योंकि नियम केवल 18 वर्ष की आयु, भारतीय नागरिकता और सामान्य निवास को ही पात्रता की शर्त मानता है।
CEC पर तीखा प्रहार, भाजपा से पलटवार
भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) के सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुँचा रही है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सत्ता न मिलने की वजह से चुनाव आयोग व सर्वोच्च न्यायालय जैसी संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं। इस पर उदित राज ने पलटवार करते हुए कहा कि 2014 के बाद ऐसी कोई संवैधानिक संस्था नहीं बची जिसे भाजपा ने निशाना न बनाया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि 13 करोड़ 80 लाख मतदाताओं के नाम काटकर लोकसभा 2024, बिहार, बंगाल, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र के चुनावों में अनुचित तरीके से जीत हासिल की गई — हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने गैर-कानूनी काम किया है, 'पद की गरिमा को ही खत्म कर दिया है' और उन्हें सीईसी नहीं मानना चाहिए।
आगे क्या
यह विवाद चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बड़े राष्ट्रीय बहस की ओर बढ़ता दिख रहा है। चुनाव आयोग के भीतर आयुक्तों के बीच दर्ज असहमति और विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच, आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर न्यायिक हस्तक्षेप या संसदीय बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।