24 सितंबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाएं: कर्नाटक के डिप्टी सीएम परमेश्वर की मांग, चुनाव आयोग की स्वतंत्र जांच पर ज़ोर

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सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाएं: कर्नाटक के डिप्टी सीएम परमेश्वर की मांग, चुनाव आयोग की स्वतंत्र जांच पर ज़ोर

सारांश

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और ECI की स्वतंत्र जांच की माँग की है। मामले की जड़ में हैं वे कथित 14 आपत्तियाँ जो दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में दर्ज कराईं — और कर्नाटक की मतदाता सूची में 1.08 करोड़ संदिग्ध प्रविष्टियों का विवाद।

मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने 24 सितंबर 2026 को सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग की।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार कथित तौर पर औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज कराईं।
आपत्तियाँ मतदाता रजिस्ट्रेशन, फॉर्म-6 में बदलाव, एसआईआर और डेटाबेस नियंत्रण जैसे मुद्दों से जुड़ी बताई गई हैं।
कर्नाटक की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं को संदिग्ध श्रेणियों में चिह्नित किया गया; अकेले बेंगलुरु में 46.88 लाख शामिल।
चुनाव आयोग ने मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि सभी निर्णयों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी मिली थी।
परमेश्वर ने माँग की है कि जांच पूरी होने तक सीईसी को पद से हटाया जाए।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। साथ ही उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज को लेकर हाल में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराए जाने की माँग भी रखी। परमेश्वर का यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ निर्णयों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई।

आरोपों की पृष्ठभूमि

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कथित तौर पर उन फैसलों और सूचनाओं पर बार-बार आपत्ति दर्ज कराई, जिन्हें उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किया गया था। रिपोर्ट किए गए आंतरिक रिकॉर्ड के मुताबिक, ये आपत्तियाँ मतदाता रजिस्ट्रेशन, मतदाता सूची से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुँच जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ी थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने यह भी चिंता जताई थी कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 में संशोधन किए बिना फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किए जा सकते। एक आपत्ति में इस कदम को कथित तौर पर 'अनधिकृत और अवैध' तक बताया गया था।

परमेश्वर के मुख्य आरोप

परमेश्वर ने सवाल उठाया कि क्या तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था अब व्यवहार में केवल एक व्यक्ति की इच्छा पर चल रही है। उन्होंने कहा, 'मुख्य चुनाव आयुक्त समान लोगों में प्रथम हैं, वह आयोग से ऊपर नहीं हैं।' उनका तर्क था कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले सभी फैसले सामूहिक निर्णय के सिद्धांत के अनुसार लिए जाने चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची के डेटाबेस का नियंत्रण केंद्रीकृत करने और राज्य स्तर के वैधानिक अधिकारियों को दरकिनार किए जाने को लेकर भी गंभीर चिंताएँ हैं। उन्होंने कहा, 'इन गंभीर खुलासों के बीच सीईसी ज्ञानेश कुमार ने जिस तरह से काम किया है, मैं उसकी कड़ी निंदा करता हूँ।'

कर्नाटक में मतदाता सूची विवाद

परमेश्वर ने कर्नाटक की ड्राफ्ट मतदाता सूची का विशेष उल्लेख किया, जिसमें करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट, मृत और अन्य श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। इनमें अकेले बेंगलुरु के 46.88 लाख मतदाता शामिल हैं। उन्होंने करीब 43.8 लाख उन मतदाताओं का भी जिक्र किया, जिन्हें 'लॉजिकल विसंगतियों' या मैपिंग न होने के कारण नोटिस का सामना करना पड़ा। ये आँकड़े ECI की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सामने आए थे।

गौरतलब है कि परमेश्वर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूचियों, मतदान प्रतिशत के आँकड़ों और विभिन्न राज्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर पहले उठाए गए मुद्दों का भी संदर्भ दिया।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने संस्था के भीतर किसी भी मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों सहित आयोग के सभी निर्णयों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद सामने आया है जिनमें दावा किया गया था कि 14 आपत्तियाँ दर्ज कराई गई थीं।

आगे की राह

परमेश्वर ने माँग की है कि आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच पूरी होने तक ज्ञानेश कुमार को सीईसी पद से हटाया जाए। उन्होंने कहा, 'भारत के चुनाव और हमारे लोकतंत्र में प्रत्येक मतदाता का विश्वास इससे कम की मांग नहीं करता।' यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश के कई राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है, और चुनावी पारदर्शिता पर राष्ट्रीय बहस तेज़ होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्यापित होता है, तो यह दर्शाता है कि मतदाता सूची जैसे बुनियादी लोकतांत्रिक उपकरण पर भी सहमति की प्रक्रिया टूट रही है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि असली प्रश्न सीईसी की व्यक्तिगत छवि का नहीं, बल्कि संस्थागत संरचना का है — तीन सदस्यीय आयोग में बहुमत के सिद्धांत का सम्मान हो रहा है या नहीं। चुनाव आयोग का खंडन संतोषजनक नहीं, क्योंकि यह आंतरिक रिकॉर्ड पर आधारित आरोपों का विशिष्ट जवाब नहीं देता।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक के डिप्टी सीएम परमेश्वर ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग क्यों की?
परमेश्वर ने यह माँग उन मीडिया रिपोर्टों के आधार पर की है जिनमें दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार कथित तौर पर फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका आरोप है कि अन्य दोनों सदस्यों को दरकिनार कर फैसले लिए गए, जो संवैधानिक संस्था के सामूहिक निर्णय के सिद्धांत के विरुद्ध है।
चुनाव आयोग के भीतर कथित 14 आपत्तियाँ किन मुद्दों पर थीं?
रिपोर्ट किए गए आंतरिक रिकॉर्ड के अनुसार ये आपत्तियाँ मतदाता रजिस्ट्रेशन, फॉर्म-6 में बदलाव, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतदाता सूची से नाम हटाने-जोड़ने और डेटाबेस तक पहुँच जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं। एक आपत्ति में फॉर्म-6 के बदलाव को 'अनधिकृत और अवैध' तक बताया गया था।
कर्नाटक की मतदाता सूची में क्या विवाद है?
कर्नाटक की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट, मृत और अन्य श्रेणियों में चिह्नित किया गया है, जिनमें अकेले बेंगलुरु के 46.88 लाख मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा करीब 43.8 लाख मतदाताओं को 'लॉजिकल विसंगतियों' के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने संस्था के भीतर मतभेद की सभी खबरों को खारिज किया है। उनका कहना है कि एसआईआर सहित आयोग के सभी निर्णयों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिया गया था।
इस विवाद का आगे क्या होगा?
परमेश्वर ने माँग की है कि स्वतंत्र जांच पूरी होने तक सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए। फिलहाल कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया जारी है, और यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी पारदर्शिता की बहस को और तेज़ कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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