CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और फैसलों की समीक्षा की मांग, कांग्रेस का देशभर में विरोध तेज
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 25 सितंबर 2026 को लखनऊ, नई दिल्ली और शिमला में एक साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। पार्टी नेताओं ने मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक असहमति को आधार बनाते हुए ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए कथित गैरकानूनी फैसलों की निष्पक्ष समीक्षा की भी माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
लखनऊ में कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार विधानसभा चुनावों के बाद वोट चोरी का मुद्दा उठाया था और SIR के ज़रिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित किए जाने की आशंका के समर्थन में सबूत भी पेश किए थे। उस समय केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।
मिश्रा ने कहा कि अब चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय ढाँचे में दो सदस्यों की आपत्तियों और असहमति को लेकर सामने आई जानकारी से कांग्रेस के पुराने आरोपों पर फिर बहस छिड़ गई है। उनके अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने स्पष्ट किया है कि उनकी चिंताओं को दरकिनार किया गया।
दिल्ली और शिमला में भी उठी इस्तीफे की माँग
नई दिल्ली में महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि पार्टी करीब एक साल से वोट चोरी के मुद्दे को उठाती आ रही है। उन्होंने बताया कि 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट चोर, गद्दी छोड़ो' रैली आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की थी। लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 24 घंटे के भीतर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेने की माँग की।
शिमला में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भी CEC को पद से हटाने की माँग करते हुए कहा कि तीन में से दो सदस्यों द्वारा कथित तौर पर कई मौकों पर आपत्ति जताए जाने के बाद ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विनय कुमार ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की माँग भी रखी।
SIR विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों को विशेष अभियान चलाकर अद्यतन किया जाता है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में अनुचित तरीके से वैध मतदाताओं को सूची से हटाया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।
कांग्रेस के आरोप नए नहीं हैं — पार्टी हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव परिणामों के बाद से लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही है। हालाँकि, चुनाव आयोग और BJP ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अब तक खारिज किया है।
कांग्रेस की प्रमुख माँगें
कांग्रेस नेताओं ने सामूहिक रूप से तीन मुख्य माँगें रखी हैं: पहली, CEC ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा; दूसरी, उनके कार्यकाल में लिए गए कथित गैरकानूनी फैसलों की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा; और तीसरी, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई। पार्टी का कहना है कि वह लोकतंत्र और संविधान प्रदत्त मताधिकार की रक्षा के लिए अपना आंदोलन जारी रखेगी।
आगे क्या होगा
फिलहाल ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से इन माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया और मतदाता सूची पुनरीक्षण की विश्वसनीयता पर व्यापक राष्ट्रीय बहस को और गहरा कर सकता है।