कांग्रेस की मांग: CEC ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, SIR विवाद में मतदान अधिकारों का सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने 2 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, यह कहते हुए कि चुनाव आयोग से जुड़ा मौजूदा विवाद नागरिकों के मतदान के मौलिक अधिकार पर सीधा हमला है। रायपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के विरुद्ध काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए।
विवाद की पृष्ठभूमि
चुनाव आयोग ने हाल ही में एक संयुक्त बयान जारी किया था जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की तस्वीरें एक साथ प्रकाशित की गई थीं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि संबंधित निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया था। 29 सितंबर को एक अधिसूचना जारी कर आयोग ने सामने आई कमियों को स्वीकार किया और सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
यह ऐसे समय में आया है जब विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने पहले से ही मतदाता सूचियों से नाम काटे जाने के आरोप लगाए हैं।
टी.एस. सिंह देव के तर्क
सिंह देव ने कहा कि यदि संविधान और कानून के खिलाफ काम हो रहा है, तो यह मतदाताओं के मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी परिस्थिति में मुख्य चुनाव आयुक्त को स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए था।
उनके अनुसार, संविधान प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार देता है और इस अधिकार पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
कांग्रेस सेवा दल का सत्याग्रह
कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को कांग्रेस सेवा दल द्वारा सत्याग्रह शुरू किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग के नई दिल्ली स्थित कार्यालय को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यालय में तब्दील कर दिया है।
वर्मा ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए और जल्द से जल्द उनका इस्तीफा लिया जाए।
SIR और मतदाता सूची विवाद
वर्मा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस काफी समय से SIR (विशेष सारांश पुनरीक्षण) के जरिए मतदाताओं के नाम काटे जाने का विरोध करती रही है। उनके अनुसार, जहाँ-जहाँ SIR के माध्यम से नाम हटाए गए हैं, वहाँ दोबारा नाम जोड़े जाने चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पर आरोप लगाया कि जब सच्चाई सामने आई तो गठबंधन भ्रामक जानकारी फैलाने में जुट गया। गौरतलब है कि मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर का यह विवाद आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में और संवेदनशील हो गया है।
आगे क्या
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहेंगे, पार्टी अपना विरोध जारी रखेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को लेकर उठते सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना है।