मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, मनीष तिवारी ने जेपीसी जांच की भी उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 24 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की और चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित करने की अपील की। यह मांग उन खबरों के बीच आई है जिनमें कहा जा रहा है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों पर चुनाव आयोग के भीतर ही आपत्तियाँ दर्ज की गई थीं।
मुख्य आरोप और संवैधानिक तर्क
तिवारी ने दावा किया कि यदि दो चुनाव आयुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों से असहमत थे, तो वे फैसले कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से अवैध ठहरते हैं। उन्होंने इस सिलसिले में 1993 के उस ऐतिहासिक प्रसंग का हवाला दिया जब तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने चुनाव आयुक्त जीवीके कृष्णमूर्ति और सरदार मनोहर सिंह गिल की नियुक्ति को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
उन्होंने कहा, "उस समय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि जो भी होगा, वह पूरी सहमति के बाद होना चाहिए या अगर सहमति नहीं बनती है तो फैसला बहुमत से होना चाहिए।" उनके अनुसार, इस स्थापित सिद्धांत की अनदेखी कर लिए गए निर्णय संवैधानिक कसौटी पर खरे नहीं उतरते।
SIR और मताधिकार पर गंभीर आरोप
तिवारी ने यह भी दावा किया कि SIR प्रक्रिया के कारण कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ लोगों को मतदाता सूची से हटाया गया है। उन्होंने इसे 'दुनिया का सबसे बड़ा मताधिकार छीनने का मामला' करार दिया।
उन्होंने कहा, "हटाए गए लोगों की संख्या कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। यह एक अभूतपूर्व और अत्यंत गंभीर स्थिति है।" हालाँकि इन आँकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और यह तिवारी का दावा है।
ECI की प्रतिक्रिया पर सवाल
तिवारी ने कहा कि इस खुलासे के बाद चुनाव आयोग ने न तो आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया और न ही संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने इसे 'अजीब' रवैया बताया और कहा कि इस बार सवाल 'बाहर' से नहीं बल्कि संस्था के 'भीतर' से उठे हैं, जो इस मामले को और अधिक गंभीर बनाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया, "अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तो संसद को जेपीसी के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की जांच करनी चाहिए।"
लोकतांत्रिक व्यंग्य और अन्य मुद्दे
इसके अलावा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति वाले एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री पर उठे विवाद पर तिवारी ने कहा कि व्यंग्य लोकतांत्रिक विमर्श का अनिवार्य अंग है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के आसपास से ही भारतीय लोकतंत्र में व्यंग्य की परंपरा रही है, हालाँकि इसकी एक 'सीमा और मर्यादा' होनी चाहिए।
पंजाब में नशे की समस्या से जुड़ी आत्महत्याओं पर बोलते हुए तिवारी ने आरोप लगाया कि 1995 में पंजाब में आतंकवाद पर काबू पाने के बाद पाकिस्तान ने भारत की युवा पीढ़ी को नशे की लत में धकेलकर उन्हें कमज़ोर करने की रणनीति अपनाई। यह उनका राजनीतिक आकलन है।
आगे क्या
चुनाव आयोग ने अब तक इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक हलकों में यह मामला तेज़ी से बहस का केंद्र बन रहा है और संभव है कि विपक्षी दल संसद में भी इस मुद्दे को उठाएँ।