सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन से इनकार, केंद्र व ECI को नोटिस जारी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की माँग वाली याचिकाओं पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। अदालत ने साथ ही केंद्र सरकार, चुनाव आयोग (ECI), CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर संधु और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी को नोटिस जारी किया। याचिकाओं में CEC के कामकाज के तरीके और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
पीठ की संरचना और कार्यवाही
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने इस मामले को ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध पहले से लंबित एक अन्य याचिका के साथ संयुक्त कर दिया, जिससे अब दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ होगी।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील विकास सिंह ने तर्क दिया कि 2023 के अधिनियम के ज़रिये चुनाव आयोग के अधिकार बढ़ाए गए हैं और कुछ अंतरिम उपायों की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'आयोग की विश्वसनीयता इतनी कम हो गई है कि हर नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहा है।' सिंह ने सुनवाई पूरी होने तक CEC की शक्तियाँ निलंबित करने या वापस लेने की माँग की।
वकील मेनका गुरुस्वामी ने याचिकाकर्ता की ओर से कहा कि नागरिकों के मतदान अधिकार खतरे में हैं और CEC पक्षपाती हैं। उन्होंने एक संबद्ध याचिका में 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए और SIR प्रक्रिया में बड़ी खामियों का आरोप लगाया। गुरुस्वामी ने अदालत में कहा, 'हमने इस देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होते देखे हैं। आज वैसी स्थिति नहीं है। यह एक राष्ट्रीय समस्या है।'
अदालत का रुख
पीठ ने मेनका गुरुस्वामी से याचिका में की गई विशिष्ट माँगों के बारे में सवाल किया; उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी माँगों पर कायम हैं। अदालत ने अंततः अंतरिम निलंबन आदेश देने से इनकार करते हुए नोटिस के जवाब प्राप्त होने तक प्रतीक्षा का रुख अपनाया। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
गौरतलब है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं पद का कार्यकाल) अधिनियम पहले भी विवादों में रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले भी चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक निर्देश जारी किए हैं। SIR प्रक्रिया — जो मतदाता सूचियों के त्वरित अद्यतन के लिए होती है — के क्रियान्वयन पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।
आगे क्या होगा
केंद्र सरकार, ECI और संबंधित आयुक्तों को नोटिस का जवाब देना होगा, जिसके बाद पीठ आगे की सुनवाई तय करेगी। मामले की अगली सुनवाई की तारीख अदालत द्वारा जल्द घोषित किए जाने की संभावना है। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय चुनाव आयोग की साख और आगामी चुनावी प्रक्रियाओं पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।