सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा: तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत, CEC पर एकतरफा फैसले के आरोप खारिज
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) आदेश पूर्णतः सर्वसम्मति से लिए गए थे। यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसले लेने के दावों को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है।
याचिकाओं की पृष्ठभूमि
चुनाव आयोग के कामकाज और विभिन्न राज्यों में SIR प्रक्रिया को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर की हैं। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि CEC ज्ञानेश कुमार अन्य दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना एकपक्षीय निर्णय ले रहे हैं।
इन्हीं आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक संयुक्त प्रति-हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया।
हलफनामे में मुख्य दावे
आयोग ने हलफनामे में स्पष्ट किया कि प्रति-हलफनामे को CEC और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। आयोग ने यह भी कहा कि याचिका केवल एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है और CEC ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसले लेने की खबर को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है।
हलफनामे में आयोग की आंतरिक फाइल प्रक्रिया का ब्यौरा देते हुए कहा गया कि फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और अंत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास जाती है। आयोग के अनुसार, किसी फाइल पर लिखे गए नोट या सवाल अंतिम फैसले नहीं माने जाते।
28 जुलाई के आदेश पर स्पष्टीकरण
हलफनामे के अनुसार, 28 जुलाई का एक आदेश अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) स्तर पर जारी हुआ था। इसके अगले दिन दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद वह आदेश लागू नहीं हुआ। यह उदाहरण आयोग ने यह दिखाने के लिए दिया कि आयुक्त सामूहिक रूप से निर्णय लेते हैं, न कि एकतरफा।
फॉर्म 6 और SIR डिक्लेरेशन पर स्थिति
हलफनामे में यह भी बताया गया कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे केवल सरकार बदल सकती है। SIR डिक्लेरेशन फॉर्म 6 से अलग दस्तावेज़ है। 21 अक्टूबर से ऑनलाइन फॉर्म दो हिस्सों में बँटेगा — फॉर्म 6 और SIR डिक्लेरेशन — जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
आगे क्या होगा
यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और आयोग के हलफनामे के बाद याचिकाकर्ताओं की अगली प्रतिक्रिया और न्यायालय की टिप्पणियाँ इस विवाद की दिशा तय करेंगी। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और उसके आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर यह पहली बार नहीं है जब सर्वोच्च न्यायालय में इतनी बड़ी संख्या में विपक्षी नेताओं ने याचिकाएँ दायर की हों।