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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा: तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत, CEC पर एकतरफा फैसले के आरोप खारिज

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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का हलफनामा: तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत, CEC पर एकतरफा फैसले के आरोप खारिज

सारांश

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त हलफनामा दायर कर साफ कहा — CEC ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले के आरोप महज एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित हैं। तीनों SIR आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे। राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर यह बड़ा जवाब है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में संयुक्त हलफनामा दाखिल कर CEC ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले के आरोप खारिज किए।
जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 के तीनों SIR आदेश सर्वसम्मति से लिए गए, ऐसा आयोग ने हलफनामे में कहा।
याचिकाएँ राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने दायर की थीं, जो चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं।
आयोग ने कहा कि यह याचिका केवल एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है और तथ्यात्मक रूप से गलत है।
28 जुलाई के आदेश को 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद वापस लिया गया था।
21 अक्टूबर से ऑनलाइन फॉर्म फॉर्म 6 और SIR डिक्लेरेशन में विभाजित होगा।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) आदेश पूर्णतः सर्वसम्मति से लिए गए थे। यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसले लेने के दावों को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है।

याचिकाओं की पृष्ठभूमि

चुनाव आयोग के कामकाज और विभिन्न राज्यों में SIR प्रक्रिया को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर की हैं। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि CEC ज्ञानेश कुमार अन्य दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना एकपक्षीय निर्णय ले रहे हैं।

इन्हीं आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक संयुक्त प्रति-हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया।

हलफनामे में मुख्य दावे

आयोग ने हलफनामे में स्पष्ट किया कि प्रति-हलफनामे को CEC और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। आयोग ने यह भी कहा कि याचिका केवल एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है और CEC ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसले लेने की खबर को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है।

हलफनामे में आयोग की आंतरिक फाइल प्रक्रिया का ब्यौरा देते हुए कहा गया कि फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और अंत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास जाती है। आयोग के अनुसार, किसी फाइल पर लिखे गए नोट या सवाल अंतिम फैसले नहीं माने जाते।

28 जुलाई के आदेश पर स्पष्टीकरण

हलफनामे के अनुसार, 28 जुलाई का एक आदेश अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) स्तर पर जारी हुआ था। इसके अगले दिन दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद वह आदेश लागू नहीं हुआ। यह उदाहरण आयोग ने यह दिखाने के लिए दिया कि आयुक्त सामूहिक रूप से निर्णय लेते हैं, न कि एकतरफा।

फॉर्म 6 और SIR डिक्लेरेशन पर स्थिति

हलफनामे में यह भी बताया गया कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे केवल सरकार बदल सकती है। SIR डिक्लेरेशन फॉर्म 6 से अलग दस्तावेज़ है। 21 अक्टूबर से ऑनलाइन फॉर्म दो हिस्सों में बँटेगा — फॉर्म 6 और SIR डिक्लेरेशन — जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।

आगे क्या होगा

यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और आयोग के हलफनामे के बाद याचिकाकर्ताओं की अगली प्रतिक्रिया और न्यायालय की टिप्पणियाँ इस विवाद की दिशा तय करेंगी। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और उसके आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर यह पहली बार नहीं है जब सर्वोच्च न्यायालय में इतनी बड़ी संख्या में विपक्षी नेताओं ने याचिकाएँ दायर की हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही राजनीतिक भी। असली मसला यह है कि क्या आंतरिक फाइल प्रक्रिया की पारदर्शिता सार्वजनिक जाँच के लिए पर्याप्त है, या यह महज प्रक्रियागत बचाव है। सर्वोच्च न्यायालय में 13 विपक्षी नेताओं का एकसाथ याचिका दाखिल करना खुद में एक असामान्य घटनाक्रम है, जो दर्शाता है कि चुनावी संस्था में विश्वास की खाई गहरी हो रही है। जब तक न्यायालय इस मामले में विस्तृत सुनवाई नहीं करता, हलफनामे की बातें एकतरफी कथा बनी रहेंगी।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा क्यों दाखिल किया?
राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाओं के जवाब में यह हलफनामा दाखिल किया गया है, जिनमें CEC ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने के आरोप लगाए गए थे। आयोग ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए खारिज किया है।
SIR आदेश क्या होते हैं और इनपर विवाद क्यों है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की समीक्षा की प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप था कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 के SIR आदेश CEC ने अन्य आयुक्तों की सहमति के बिना जारी किए, जिसे आयोग ने हलफनामे में गलत बताया है।
क्या CEC ज्ञानेश कुमार ने वास्तव में एकतरफा फैसले लिए?
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में इन दावों को स्पष्ट रूप से नकारा है। आयोग के अनुसार, तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत निर्णय थे और याचिका केवल एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है।
28 जुलाई का आदेश क्यों लागू नहीं हुआ?
हलफनामे के अनुसार, 28 जुलाई का आदेश अतिरिक्त सचिव स्तर पर जारी हुआ था। इसके बाद दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा और 30 जुलाई को उनके संयुक्त निर्देश पर वह आदेश लागू नहीं किया गया।
फॉर्म 6 और SIR डिक्लेरेशन में क्या अंतर है?
फॉर्म 6 मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का सरकारी दस्तावेज़ है, जिसे केवल सरकार बदल सकती है। SIR डिक्लेरेशन इससे अलग है। 21 अक्टूबर से ऑनलाइन फॉर्म इन दोनों हिस्सों में विभाजित होगा।
राष्ट्र प्रेस
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