7 अक्टूबर 2026
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CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के सवाल, BJP क्यों दे रही जवाब — कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन का तीखा हमला

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CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के सवाल, BJP क्यों दे रही जवाब — कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन का तीखा हमला

सारांश

विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार से जवाब माँग रहा है — और BJP उनकी तरफ से बोल रही है। कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन का यह सवाल संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता पर सीधा वार है। इस्तीफा, SIR रद्दीकरण और बैलेट पेपर — तीन माँगें, और चुनाव आयोग की चुप्पी विपक्ष की आग को और भड़का रही है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने 7 अक्टूबर 2026 को CEC ज्ञानेश कुमार को 'BJP की कठपुतली' बताया।
विपक्ष की तीन माँगें: ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा , SIR रद्द , और बैलेट पेपर से चुनाव ।
रंजीत रंजन ने कहा सुप्रीम कोर्ट तक को हस्तक्षेप करना पड़ा — फॉर्म 6 स्वीकृति के बिना जारी होने का आरोप।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के 'नाटक' वाले बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया।
कांग्रेस लगभग दो वर्षों से राहुल गांधी के नेतृत्व में वोट चोरी के आरोप उठाती रही है।
चुनाव आयोग ने विपक्ष को मिलने का समय देने से कथित तौर पर इनकार किया।

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि जब विपक्ष चुनाव आयोग से सवाल पूछ रहा है, तो जवाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) क्यों दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (ECI) सरकार के इशारे पर काम कर रहा है और CEC को 'कठपुतली' करार दिया।

विपक्ष की तीन प्रमुख माँगें

रंजीत रंजन ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की तीन केंद्रीय माँगें हैं — पहली, ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा देना होगा; दूसरी, विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) को रद्द किया जाए; और तीसरी, आगामी चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएँ। उन्होंने कहा कि इन्हीं माँगों को लेकर विपक्ष CEC से मिलना चाहता था, लेकिन मुलाकात से इनकार कर दिया गया।

उनके अनुसार, 'लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि विपक्ष ने चुनाव आयोग से समय माँगा हो और चुनाव आयोग ने मिलने से मना कर दिया हो।' यह बात उन्होंने बेहद गंभीर संकेत के रूप में रेखांकित की।

सुप्रीम कोर्ट और फॉर्म 6 विवाद का हवाला

रंजीत रंजन ने दावा किया कि चुनाव आयोग की कथित अनियमितताओं का सबसे बड़ा प्रमाण सर्वोच्च न्यायालय से ही मिला है। उनके अनुसार, एक न्यायाधीश ने स्वयं कहा कि फॉर्म 6 में जो स्वीकृति का उल्लेख किया गया, वह उनसे ली ही नहीं गई और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने कहा, 'इतनी अपीलें सामने आ रही हैं — इससे बड़ा सबूत और क्या चाहिए।'

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में उठा है जब देश में चुनावी पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो चुकी है और सर्वोच्च न्यायालय में कई याचिकाएँ दायर हैं।

BJP और केंद्रीय मंत्री रिजिजू पर पलटवार

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी प्रदर्शन को 'नाटक' बताया था। इस पर रंजीत रंजन ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'हम सवाल ज्ञानेश कुमार से पूछ रहे हैं — क्या ज्ञानेश कुमार का जवाब देने के लिए आपने किरेन रिजिजू को नियुक्त किया है? ज्ञानेश कुमार खुद सामने क्यों नहीं आ रहे?'

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, तो सत्तारूढ़ दल के नेता उसका पक्ष क्यों रख रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह स्थिति संस्थागत स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

कांग्रेस का दो वर्ष पुराना अभियान

रंजीत रंजन ने याद दिलाया कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में लगभग दो वर्षों से प्रेजेंटेशन के माध्यम से वोट में गड़बड़ी के आरोप उठाता रहा है। उन्होंने कहा, 'हम आरोप लगा रहे हैं कि आप सरकार से मिले हुए हैं और आपकी गलतियों को हम उजागर कर रहे हैं।'

उनके अनुसार, सरकार का 'छुपा हुआ प्लान' यह है कि वोटर का मत जबरन छीनकर सत्ता में बने रहा जाए। उन्होंने कहा कि अगर CEC के पास बेईमानी न करने के सबूत हैं, तो उन्हें स्वयं सामने आना चाहिए।

आगे क्या होगा

विपक्ष ने संकेत दिया है कि यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। कांग्रेस और सहयोगी दलों ने CEC के इस्तीफे की माँग को अपनी प्राथमिकता बताया है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जो विपक्ष के अनुसार उनके आरोपों को और बल देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके नीचे एक गहरी संवैधानिक चिंता है। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है; यदि सत्तारूढ़ दल के नेता उसकी ओर से सफाई देने लगें, तो यह संस्थागत स्वायत्तता का क्षरण है — चाहे आरोप सही हों या गलत। दूसरी तरफ, विपक्ष पर भी यह सवाल उठता है कि दो वर्षों के प्रदर्शन के बावजूद उसने अदालत में ठोस साक्ष्य के बजाय राजनीतिक मंच को प्राथमिकता दी। असली परीक्षा यह है कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के माध्यम से क्या कोई सत्यापन-योग्य निष्कर्ष निकलता है — वरना यह विवाद चुनावी राजनीति का स्थायी हथियार बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने CEC ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए?
रंजीत रंजन ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार BJP के इशारे पर काम कर रहे हैं और चुनाव में बेईमानी की जा रही है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को 'कठपुतली' बताया और कहा कि सरकार उन्हें विपक्ष के सामने आने से रोक रही है।
विपक्ष की चुनाव आयोग से तीन प्रमुख माँगें क्या हैं?
विपक्ष की तीन माँगें हैं — पहली, CEC ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा; दूसरी, विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करना; और तीसरी, भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराना।
फॉर्म 6 और सुप्रीम कोर्ट का इस विवाद से क्या संबंध है?
रंजीत रंजन के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने स्वयं कहा कि फॉर्म 6 में जो स्वीकृति दर्शाई गई, वह उनसे ली ही नहीं गई और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। कांग्रेस इसे चुनाव आयोग में गड़बड़ी का सबसे बड़ा प्रमाण मान रही है।
किरेन रिजिजू और BJP पर रंजीत रंजन ने क्या कहा?
रंजीत रंजन ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान पर पलटवार किया जिसमें विपक्षी प्रदर्शन को 'नाटक' कहा गया था। उन्होंने सवाल किया कि CEC के सवालों का जवाब BJP नेता क्यों दे रहे हैं और क्या रिजिजू को ज्ञानेश कुमार का प्रवक्ता नियुक्त किया गया है।
चुनाव आयोग ने विपक्ष से मिलने से इनकार क्यों किया?
रंजीत रंजन ने कहा कि चुनाव आयोग ने विपक्ष को मिलने का समय देने से इनकार किया, जो उनके अनुसार लोकतंत्र के इतिहास में अभूतपूर्व है। चुनाव आयोग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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