ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, राहुल गांधी के आवास पर चाय-चर्चा में नेताओं ने कहा — लड़ाई जारी रहेगी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नई दिल्ली स्थित आवास पर मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को हुई चाय-चर्चा में इंडिया गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने एकसुर में ऐलान किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग में सुधार की माँग तब तक नहीं छोड़ी जाएगी, जब तक उनकी बात नहीं मानी जाती। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास पर हुई इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य गठबंधन दलों के सांसद मौजूद रहे।
बैठक का स्वर — 'रास्ता मुश्किल है, पर पीछे नहीं हटेंगे'
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने बैठक के बाद कहा कि रास्ता मुश्किल ज़रूर है, लेकिन विपक्ष इस पर आगे बढ़ने को तैयार है। उन्होंने चुनाव आयोग में संरचनात्मक सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को अपरिहार्य बताया। सरकार के रवैये पर तंज़ कसते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है, मानो वह कोई शाही दरबार हो।
कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने माँग को और धार देते हुए कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि CEC ने कई मामलों में अपनी मर्जी से निर्णय लिए हैं और उनके फैसलों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
राहुल गांधी की चुप्पी, बघेल और पायलट का बयान
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने बताया कि राहुल गांधी ने बैठक में किसी नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक दिन पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी राहुल ने कहा था कि पहले से चल रहा कार्यक्रम जारी रहेगा और आगे की रणनीति वे स्वयं बताएँगे।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि सभी नेता जनता की आवाज़ उठाने के एकमात्र उद्देश्य से एकजुट हुए हैं। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने इसे फिलहाल विचार-विमर्श की बैठक करार दिया।
पुणे से पृथ्वीराज चव्हाण — 'सरकार आंदोलन दबाने की कोशिश कर रही है'
पुणे में वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने दिल्ली में हुए इंडिया गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन को याद करते हुए दावा किया कि इसमें बड़ी संख्या में विपक्षी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को कुचलने की हर संभव कोशिश कर रही है और प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लिया जा रहा है।
चव्हाण ने कहा कि विरोध और असहमति नागरिकों के संवैधानिक अधिकार हैं और इन्हें कुचलने की कोशिश सरकार की घबराहट को उजागर करती है।
गठबंधन की एकजुटता — सपा और अन्य दलों की आवाज़
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने कहा कि यह मुद्दा पूरे देश से जुड़ा है और गठबंधन के सभी दल — चाहे आम आदमी पार्टी हो या अन्य — एकजुट होकर लड़ रहे हैं।
सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने सरकार पर कड़े आरोप लगाते हुए कहा कि देश की जनता को धोखे और विश्वासघात का ऐसा अनुभव हुआ है जिसकी मिसाल इतिहास में शायद ही मिले। उन्होंने पुरानी घोषणाओं का हवाला दिया — युवाओं को ₹10 लाख देने का वादा, हर साल 1 करोड़ नौकरियों का लक्ष्य, किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प और 100 स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा — और कहा कि इनमें से कोई भी पूरा नहीं हुआ।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि किसी फैसले या कार्रवाई को कुछ दिनों या दो हफ्तों के लिए टालना स्थायी राहत नहीं है और इसे समाधान मानकर संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
आगे क्या होगा
विपक्ष की अगली रणनीति राहुल गांधी स्वयं घोषित करेंगे, यह बैठक में स्पष्ट कर दिया गया। गौरतलब है कि इंडिया गठबंधन पहले भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता रहा है और अब CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर यह संघर्ष नई तीव्रता पर पहुँच गया है। यह देखना होगा कि सत्तापक्ष इस दबाव पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।