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सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग: इंडी गठबंधन दो हफ्तों में राज्यसभा में लाएगा संशोधित नोटिस

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सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग: इंडी गठबंधन दो हफ्तों में राज्यसभा में लाएगा संशोधित नोटिस

सारांश

इंडी गठबंधन सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपनी मुहिम को नई धार देने की तैयारी में है। अप्रैल में दिए गए 73 सांसदों वाले नोटिस से 7 ने पलटी मारी, अब कांग्रेस CWC की बैठक के बाद संशोधित नोटिस दो हफ्तों में आने की उम्मीद — चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर यह लड़ाई और तीखी होने वाली है।

मुख्य बातें

इंडी गठबंधन ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए अगले दो सप्ताह में राज्यसभा में संशोधित नोटिस देने का निर्णय लिया।
24 अप्रैल को दिए गए पिछले नोटिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर थे, जिनमें से 7 बाद में पाला बदल गए।
राज्यसभा में सीईसी हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं।
सीईसी के दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने आरोप लगाया है कि उनकी सहमति के बिना निर्णय लिए गए।
कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग को लेकर इंडी गठबंधन ने नई रणनीति अपनाई है। कांग्रेस की पहल पर विपक्षी दलों ने राज्यसभा में संशोधित नोटिस लाने पर सहमति जताई है, और सूत्रों के अनुसार यह नोटिस अगले दो सप्ताह के भीतर सौंपा जाएगा। नए नोटिस में हालिया घटनाक्रम और ताज़े तथ्य भी शामिल किए जाएंगे।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में विस्तृत चर्चा हो चुकी है। इसके बाद इंडी गठबंधन के नेताओं से हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उल्लेखनीय है कि नोटिस देने के लिए संसद का सत्र चलना अनिवार्य नहीं होता, इसलिए विपक्ष संसद के बाहर भी यह कदम उठा सकता है।

पिछला नोटिस और नई चुनौती

विपक्ष ने इससे पहले 24 अप्रैल को राज्यसभा में सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया था, जिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर थे। वह नोटिस अभी भी लंबित है। हालांकि, बाद में उस नोटिस पर दस्तखत करने वाले सात सांसद पाला बदल चुके हैं, जिससे समर्थन की संख्या घट गई। यही कारण है कि विपक्ष अब नए सिरे से समर्थन जुटाकर संशोधित नोटिस लाने की तैयारी में है।

कितने सांसदों की ज़रूरत

राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। कांग्रेस का दावा है कि इंडी गठबंधन इस आवश्यक संख्या को पूरा करने की स्थिति में है और समर्थन जुटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

विपक्ष के आरोप और पृष्ठभूमि

विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। विशेष रूप से, सीईसी ज्ञानेश कुमार के दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने भी यह आरोप लगाया है कि कई बार उनसे बिना पूछे या सहमति के ही निर्णय लिए गए। इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर संशोधित नोटिस तैयार किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और पारदर्शिता को लेकर बहस पहले से तेज़ है।

आगे क्या

गठबंधन के सूत्रों के अनुसार, हस्ताक्षर अभियान पूरा होते ही राज्यसभा के सभापति को संशोधित नोटिस सौंपा जाएगा। इस पूरे मामले पर विपक्षी दलों के बयान लगातार सामने आ रहे हैं और आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या विपक्ष वाकई प्रस्ताव पर मतदान तक जाने का इरादा रखता है — क्योंकि राज्यसभा में सत्ता पक्ष के बहुमत के सामने इसके पारित होने की संभावना फिलहाल नगण्य है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडी गठबंधन सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
इंडी गठबंधन अगले दो सप्ताह के भीतर राज्यसभा में एक संशोधित नोटिस सौंपने की तैयारी में है, जिसमें हालिया घटनाक्रम और नए तथ्य शामिल होंगे। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस पर सहमति बन चुकी है और हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पहला नोटिस क्यों कमज़ोर पड़ा?
24 अप्रैल को दिए गए पहले नोटिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर थे, लेकिन बाद में उनमें से 7 सांसद पाला बदल गए। इससे नोटिस का राजनीतिक समर्थन कमज़ोर हुआ, इसलिए विपक्ष ने नए सिरे से समर्थन जुटाने का फैसला किया।
राज्यसभा में सीईसी को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कितने सांसदों की ज़रूरत होती है?
राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। कांग्रेस का दावा है कि इंडी गठबंधन यह संख्या पूरी कर सकता है।
सीईसी ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप हैं?
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इसके अलावा, सीईसी के दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने यह आरोप लगाया है कि कई बार उनकी सहमति के बिना ही फैसले लिए गए।
क्या संसद सत्र के बाहर भी यह नोटिस दिया जा सकता है?
हाँ, राज्यसभा में इस तरह का नोटिस देने के लिए संसद का सत्र चलना अनिवार्य नहीं होता। इसलिए विपक्ष संसद सत्र से इतर भी यह कदम उठाने में सक्षम है।
राष्ट्र प्रेस
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