14 अक्टूबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग: इंडिया ब्लॉक का आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट की लड़ाई जारी रहेगी

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सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग: इंडिया ब्लॉक का आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट की लड़ाई जारी रहेगी

सारांश

इंडिया ब्लॉक सिर्फ सड़क पर नहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ेगा — सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर सीपीआई(एम) और सीपीआई के नेताओं ने दोहरी रणनीति का ऐलान किया। 24 घंटे के नोटिस पर सांसदों को दिल्ली बुलाने की तैयारी बताती है कि यह आंदोलन लंबी लड़ाई के लिए तैयार है।

मुख्य बातें

इंडिया ब्लॉक ने 14 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर आंदोलन जारी रहेगा।
सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा — सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई के साथ साथ राजनीतिक विरोध भी चलता रहेगा।
जरूरत पड़ने पर सभी सांसदों को 24 घंटे के नोटिस पर नई दिल्ली में एकत्र होने के लिए तैयार रहने का निर्देश।
सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने भारत निर्वाचन आयोग की जवाबदेही को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का सवाल बताया।
राजा ने कहा — आंदोलन की रणनीति घटक दलों के बीच नियमित समन्वय से तय होगी।
छात्र संगठनों सहित विभिन्न नागरिक समूहों ने भी इस अभियान में रुचि दिखाई है।

इंडिया ब्लॉक के घटक दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के शीर्ष नेताओं ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर गठबंधन का राजनीतिक आंदोलन बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ता रहेगा। विपक्षी दल सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई के साथ साथ सड़क पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन भी जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

नेताओं का रुख और आंदोलन की रणनीति

सीपीआई(एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। आंदोलन में कोई कमी नहीं आएगी। सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई के साथ साथ हम राजनीतिक विरोध और आंदोलन भी जारी रखेंगे।" उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सांसदों को फिलहाल अपने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लौटकर जिम्मेदारियां निभाने का समय दिया गया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सभी सांसदों को 24 घंटे के नोटिस पर नई दिल्ली में एकत्र होने के लिए तैयार रहना होगा।

यह व्यवस्था संकेत देती है कि गठबंधन किसी भी समय आंदोलन को और तेज करने की स्थिति में रहना चाहता है। आंदोलन की आगे की रणनीति, समय और अवधि इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के बीच नियमित समन्वय और विचार विमर्श के जरिए तय की जाएगी।

संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही का सवाल

सीपीआई(एम) के महासचिव एमए बेबी ने इस आंदोलन को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और भारत निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, "संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और भारत निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने का संघर्ष बेहद महत्वपूर्ण है। इस संघर्ष को हमें कई स्तरों पर आगे बढ़ाना पड़ सकता है। इंडिया ब्लॉक इस संघर्ष में सबसे आगे है।"

बेबी ने यह भी उल्लेख किया कि छात्र संगठनों सहित विभिन्न नागरिक समूहों ने सीईसी को पद से हटाने के अभियान में रुचि दिखाई है। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को मिलने वाली कानूनी छूट के मुद्दे पर उन्होंने व्यापक विचार विमर्श और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता जताई।

सीपीआई का स्वर: एकजुटता और आगे का अभियान

सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा कि इंडिया ब्लॉक के सभी नेता इस अभियान को जारी रखने के लिए एकमत हैं। उन्होंने बताया कि गठबंधन के नेताओं ने नई दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन की समीक्षा की और विपक्ष के आह्वान पर मिली जन प्रतिक्रिया की सर्वसम्मति से सराहना की। राजा ने कहा, "पिछली बैठक में सभी नेताओं ने इस अभियान को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी। यह संदेश जाना चाहिए कि इंडिया ब्लॉक चुप नहीं बैठेगा।"

यह ऐसे समय में क्यों अहम है

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में कई राज्यों में आगामी चुनावों की चर्चा तेज है और चुनाव आयोग की स्वायत्तता व निष्पक्षता को लेकर राष्ट्रीय बहस छिड़ी हुई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है, हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है।

इंडिया ब्लॉक का यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के साथ साथ राजनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय रहने की दोहरी रणनीति अपनाए हुए है, जो इसे महज प्रतीकात्मक विरोध से आगे ले जाता है। आगे आने वाले हफ्तों में इंडिया ब्लॉक के घटक दलों की बैठक में आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा तय होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे विपक्ष का यह अभियान कानूनी बाधाओं से टकराने की पूरी संभावना रखता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया की संरचनागत कमियों पर है — और उस बहस का नतीजा दीर्घकालिक लोकतांत्रिक प्रभाव रखता है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग क्यों कर रहा है?
इंडिया ब्लॉक का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है और चुनाव आयोग की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है।
इंडिया ब्लॉक का आंदोलन आगे कैसे चलेगा?
गठबंधन ने दोहरी रणनीति अपनाई है — सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई और सड़क पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन। आंदोलन की समय सारणी और अगली रणनीति घटक दलों के बीच नियमित समन्वय से तय होगी।
क्या सीईसी को पद से हटाना कानूनी रूप से संभव है?
भारतीय संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है और इसके लिए संसद में महाभियोग की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और साथ ही राजनीतिक दबाव बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।
सीपीआई(एम) और सीपीआई के किन नेताओं ने यह बयान दिया?
सीपीआई(एम) के सांसद जॉन ब्रिटास और महासचिव एमए बेबी, तथा सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में यह बयान दिया। तीनों ने आंदोलन जारी रखने और इंडिया ब्लॉक की एकजुटता पर जोर दिया।
इंडिया ब्लॉक के आंदोलन में और कौन से संगठन शामिल हो रहे हैं?
सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी के अनुसार, छात्र संगठनों सहित विभिन्न नागरिक समूहों ने भी सीईसी को हटाने के अभियान में रुचि दिखाई है। इससे संकेत मिलता है कि आंदोलन को राजनीतिक दलों से परे व्यापक सामाजिक समर्थन मिलने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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