CJP प्रदर्शन: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने पर विपक्ष एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली/लखनऊ/मुंबई, 11 अक्टूबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर नई दिल्ली में जारी सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन को विपक्षी दलों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और समाजवादी पार्टी सहित कई दलों के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से नहीं हटते, यह विरोध देशभर में जारी रहेगा।
मुख्य घटनाक्रम
11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के कनॉट प्लेस पर चुनाव आयोग के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे अनेक लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास भी शामिल रहे, जिन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान उठाया गया। यह प्रदर्शन मुख्यतः SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद की पृष्ठभूमि में हो रहा है।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने युवाओं की बड़ी संख्या में सड़कों पर उपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा, 'इतनी बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर रहे हैं, इससे पता चलता है कि मौजूदा सरकार के दिन गिने-चुने हैं। सरकार चाहे जो कर ले, चाहे सेना, अर्धसैनिक बल, रिजर्व बल या पूरी पुलिस फोर्स लगा दे, युवा विरोध करते रहेंगे।' उन्होंने विशेष रूप से युवा महिलाओं की भागीदारी को रेखांकित किया और कहा कि 'वे इस देश का भविष्य हैं।'
लखनऊ में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यह प्रदर्शन किसी पार्टी का नहीं, बल्कि 'जेन जी' (Gen Z) का है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'भारत का युवा जान चुका है कि ज्ञानेश कुमार किसके लिए वोट चोरी कर रहे हैं।' उनके अनुसार ज्ञानेश कुमार के पद छोड़ने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ज्ञानेश कुमार को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का प्रदर्शन बताया। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति मिलनी चाहिए, और आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी की है।
सरकार और चुनाव आयोग की स्थिति
सरकार की ओर से अभी तक विपक्ष के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस पर जमा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया। चुनाव आयोग (ECI) ने भी इस संदर्भ में फिलहाल कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
आम जनता और युवाओं पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर देश में व्यापक बहस छिड़ी हुई है। SIR को लेकर उठे सवालों ने खासतौर पर शहरी युवाओं को आंदोलित किया है, जो कई शहरों में सड़कों पर उतर आए हैं। विपक्ष के नेताओं का दावा है कि यह जन-आंदोलन किसी एक दल तक सीमित नहीं है।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक दबाव बनाए रखेंगे। आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तर्ज पर प्रदर्शन आयोजित किए जाने की संभावना है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इस बढ़ते दबाव पर किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं।