ज्ञानेश कुमार इस्तीफा विवाद: राहुल गांधी बोले — 'वो जाएंगे और जिस सिस्टम ने उन्हें बैठाया, वो भी जाएगा'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर देशभर में हुए प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार न केवल पद छोड़ेंगे, बल्कि 'जिस सिस्टम ने उन्हें बैठाया है, वो भी जाएगा।' गांधी जयंती के अवसर पर हजारों युवाओं के सड़क पर उतरने को राहुल गांधी ने संवैधानिक अधिकार का शांतिपूर्ण इस्तेमाल बताया।
राहुल गांधी का एक्स पर बयान
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'आज गांधी जयंती है और आज ही हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं। शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए। उनकी मांग साफ है — ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।' उन्होंने आगे लिखा, 'बापू ने यही सिखाया था — सच बोलो, शांति से लड़ो और यही सरकार को सबसे ज्यादा डराता है, क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं।'
दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP), वामपंथी छात्र संगठनों और अनेक नागरिक समूहों ने शुक्रवार को नई दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की थी और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई अन्य दलों के नेता भी प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका और कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। गौरतलब है कि यह प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा — देश के कई हिस्सों में एक साथ माँग उठाई गई।
विवाद की पृष्ठभूमि
विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और कार्यशैली पारदर्शी नहीं रही है। आलोचकों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में 'वोट चोरी' जैसी अनियमितताएँ हुई हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनाव आयोग की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रिया पर बहस तेज हो चुकी है।
राजनीतिक संदर्भ
राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की जयंती पर आंदोलन को प्रतीकात्मक महत्व देने की कोशिश की — अहिंसक प्रतिरोध की गांधीवादी विरासत से इसे जोड़ते हुए। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जो चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता को केंद्रीय मुद्दा बनाने पर ज़ोर दे रही है। चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
आगे क्या होगा
विपक्ष की माँग और प्रदर्शनों की तीव्रता को देखते हुए, आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसदीय बहस या न्यायिक हस्तक्षेप की माँग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी का यह बयान संकेत देता है कि कांग्रेस इस मसले को दीर्घकालिक राजनीतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।