11 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस का हमला, झारखंड अध्यक्ष बोले — इस्तीफा दें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस का हमला, झारखंड अध्यक्ष बोले — इस्तीफा दें

सारांश

झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की माँग की। दिल्ली के CJP प्रदर्शन को बाधित करने के लिए मेट्रो-ट्रेन बंद करने और SIR के ज़रिये 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटने का दावा किया गया।

मुख्य बातें

झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने 10 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की।
कमलेश ने हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार चुनावों में कथित वोट चोरी का आरोप लगाया।
दिल्ली CJP प्रदर्शन से पहले मेट्रो सेवाएँ बंद और दूसरे राज्यों की ट्रेनें रोके जाने का दावा — स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
कांग्रेस का आरोप — SIR प्रक्रिया के तहत देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए।
चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने 10 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर तीखे आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की। उनके अनुसार, दिल्ली में कांग्रेस जन प्रतिरोध (CJP) के विरोध-प्रदर्शन को बाधित करने के लिए प्रशासन ने असाधारण बल-प्रयोग किया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

कमलेश के प्रमुख आरोप

कमलेश ने कहा कि जो सरकार संवैधानिक संस्थाओं को अपने एजेंट की तरह इस्तेमाल करती है, उसका 'विनाश तय है।' उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार के चुनावों में बड़े पैमाने पर 'वोट चोरी' हुई और मुख्य चुनाव आयुक्त इस कथित षड्यंत्र के केंद्र में हैं। उनके शब्दों में, 'विनाश की घंटी बज चुकी है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।'

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी सड़क से संसद तक इस मुद्दे को उठा रहे हैं और इसी से सरकार घबराई हुई है। कमलेश ने सवाल उठाया, 'सांच को आंच क्या? यदि पारदर्शिता के साथ चुनाव कराया होता, तो आज ये नौबत नहीं आती।'

दिल्ली प्रदर्शन पर गंभीर आरोप

कमलेश के अनुसार, 10 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित विरोध-प्रदर्शन को विफल करने के लिए प्रशासन ने मेट्रो सेवाएँ बंद कीं, दूसरे राज्यों से आने वाली ट्रेनें रोकी गईं और हवाई किराया 'काफी ज़्यादा बढ़ा दिया गया।' इसके अलावा आसपास के जिलों से भारी पुलिस बल तैनात किए जाने का भी दावा किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है।

गौरतलब है कि विपक्षी दलों द्वारा बड़े जनसमागमों से पहले दिल्ली में यातायात-प्रतिबंध और सुरक्षा-तैनाती की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग का 'विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR)' कार्यक्रम देशभर में विवाद का विषय बना हुआ है।

मतदाता सूची पर आरोप

कमलेश ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के तहत देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। उनका कहना है कि यह कार्यक्रम मूल रूप से पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए था, लेकिन व्यवहार में इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के 'षड्यंत्रों' के ज़रिये पात्र लोगों को हटाने के लिए किया जा रहा है। इन आँकड़ों और आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। चुनाव आयोग पहले यह स्पष्ट कर चुका है कि SIR एक नियमित और संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रक्रिया है।

आगे क्या

कांग्रेस के इस आक्रामक रुख के बीच यह देखना होगा कि क्या विपक्ष मतदाता सूची विवाद को संसद में उठाता है और क्या अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का यह अभियान आगामी चुनावी मौसम में पार्टी की प्रमुख रणनीति बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक संरचनात्मक सवाल छिपा है — क्या SIR प्रक्रिया वास्तव में पारदर्शी है? '13 करोड़ नाम काटे गए' का दावा अगर आंशिक रूप से भी सही है, तो यह मतदाता अधिकारों का गंभीर मामला है, जिसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे बयानों को 'राजनीतिक आरोप' कहकर खारिज कर देती है, लेकिन चुनाव आयोग की जवाबदेही पर बहस को इससे दबाया नहीं जाना चाहिए। दूसरी ओर, बिना सत्यापन के मेट्रो-ट्रेन बंद करने और हवाई किराया बढ़ाने के दावे उस विश्वसनीयता को कमज़ोर करते हैं जो इस मुद्दे को वास्तव में चाहिए।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा क्यों माँगा?
केशव महतो कमलेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार के चुनावों में कथित वोट चोरी कराने का आरोप लगाया और कहा कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के 'एजेंट' की तरह काम कर रहा है। ये आरोप कांग्रेस के दिल्ली CJP विरोध-प्रदर्शन के संदर्भ में आए।
CJP विरोध-प्रदर्शन क्या है और यह क्यों चर्चा में है?
CJP (कांग्रेस जन प्रतिरोध) कांग्रेस का एक जन-आंदोलन अभियान है, जिसके तहत 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया। कांग्रेस का दावा है कि इसे विफल करने के लिए मेट्रो-ट्रेन बंद की गईं और भारी पुलिस तैनात की गई, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
SIR प्रक्रिया क्या है और कांग्रेस को इस पर क्या आपत्ति है?
SIR यानी 'विशेष सारांश पुनरीक्षण' चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि इस बार SIR के ज़रिये देशभर में लगभग 13 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो मताधिकार का हनन है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या कहा?
इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। चुनाव आयोग पहले स्पष्ट कर चुका है कि SIR एक संवैधानिक रूप से अनिवार्य और पारदर्शी प्रक्रिया है।
राहुल गांधी की इस पूरे विवाद में क्या भूमिका है?
कमलेश के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक उठा रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि सरकार इसी कारण विपक्षी प्रदर्शनों को बाधित कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 2 सप्ताह पहले