मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस का हमला, झारखंड अध्यक्ष बोले — इस्तीफा दें
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने 10 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर तीखे आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की। उनके अनुसार, दिल्ली में कांग्रेस जन प्रतिरोध (CJP) के विरोध-प्रदर्शन को बाधित करने के लिए प्रशासन ने असाधारण बल-प्रयोग किया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
कमलेश के प्रमुख आरोप
कमलेश ने कहा कि जो सरकार संवैधानिक संस्थाओं को अपने एजेंट की तरह इस्तेमाल करती है, उसका 'विनाश तय है।' उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार के चुनावों में बड़े पैमाने पर 'वोट चोरी' हुई और मुख्य चुनाव आयुक्त इस कथित षड्यंत्र के केंद्र में हैं। उनके शब्दों में, 'विनाश की घंटी बज चुकी है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी सड़क से संसद तक इस मुद्दे को उठा रहे हैं और इसी से सरकार घबराई हुई है। कमलेश ने सवाल उठाया, 'सांच को आंच क्या? यदि पारदर्शिता के साथ चुनाव कराया होता, तो आज ये नौबत नहीं आती।'
दिल्ली प्रदर्शन पर गंभीर आरोप
कमलेश के अनुसार, 10 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित विरोध-प्रदर्शन को विफल करने के लिए प्रशासन ने मेट्रो सेवाएँ बंद कीं, दूसरे राज्यों से आने वाली ट्रेनें रोकी गईं और हवाई किराया 'काफी ज़्यादा बढ़ा दिया गया।' इसके अलावा आसपास के जिलों से भारी पुलिस बल तैनात किए जाने का भी दावा किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है।
गौरतलब है कि विपक्षी दलों द्वारा बड़े जनसमागमों से पहले दिल्ली में यातायात-प्रतिबंध और सुरक्षा-तैनाती की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग का 'विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR)' कार्यक्रम देशभर में विवाद का विषय बना हुआ है।
मतदाता सूची पर आरोप
कमलेश ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के तहत देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। उनका कहना है कि यह कार्यक्रम मूल रूप से पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए था, लेकिन व्यवहार में इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के 'षड्यंत्रों' के ज़रिये पात्र लोगों को हटाने के लिए किया जा रहा है। इन आँकड़ों और आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। चुनाव आयोग पहले यह स्पष्ट कर चुका है कि SIR एक नियमित और संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रक्रिया है।
आगे क्या
कांग्रेस के इस आक्रामक रुख के बीच यह देखना होगा कि क्या विपक्ष मतदाता सूची विवाद को संसद में उठाता है और क्या अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का यह अभियान आगामी चुनावी मौसम में पार्टी की प्रमुख रणनीति बन सकता है।