ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन, 11 मेट्रो स्टेशन बंद
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 2 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोकने की माँग को लेकर विपक्षी दलों का प्रदर्शन तेज़ हो गया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत राजधानी में 11 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। यूथ कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने का प्रयास बताते हुए आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने 11 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया और रणनीतिक स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाई। भारी पुलिस तैनाती के बावजूद यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रस्तावित मार्च में भाग लेने का संकल्प लिया। यह प्रदर्शन 2 अक्टूबर को, जो महात्मा गांधी की जयंती है, आयोजित किया गया — जिसे प्रतीकात्मक माना जा रहा है।
यूथ कांग्रेस की प्रतिक्रिया
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर उठ रही आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं देते, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।' चिब ने यह भी कहा कि चाहे जितनी बैरिकेडिंग हो, कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे।
उनका कहना था कि यह आंदोलन केवल किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि देश के युवाओं और नागरिकों की आवाज़ है। उन्होंने दावा किया कि 'लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संकल्प के सामने बैरिकेडिंग आंदोलन को नहीं रोक सकती।'
दलबदल और तृणमूल सांसदों पर निशाना
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए 20 सांसदों द्वारा ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की माँग पर उदय भानु चिब ने इन सांसदों को 'आया राम-गया राम' की संज्ञा दी। उन्होंने दलबदल-विरोधी कानून को और सख्त बनाने की वकालत की, यह तर्क देते हुए कि चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलना मतदाताओं के विश्वास के साथ धोखा है।
चिब ने कहा कि मतदाता किसी उम्मीदवार को न केवल व्यक्तिगत आधार पर, बल्कि उसके राजनीतिक दल और विचारधारा को ध्यान में रखकर भी वोट देता है। ऐसे में दलबदल करने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए कानून में ऐसे प्रावधान होने चाहिए जिससे मतदाताओं के भरोसे की रक्षा हो सके।
एसआईआर विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों ने पहले भी आपत्ति जताई है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूचियों में हेरफेर का जरिया बन सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आगामी विधानसभा और आम चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस तेज़ हो गई है।
आगे क्या
यूथ कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े तक प्रदर्शन का सिलसिला थमेगा नहीं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह विरोध-प्रदर्शन विपक्ष की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें चुनाव आयोग की स्वायत्तता और प्रक्रियागत पारदर्शिता को केंद्रीय राजनीतिक मुद्दे के रूप में स्थापित किया जा रहा है।